ANIL KUMAR SRIVASTAVA

चीरा-चास, बोकारो, झारखंड ।

Joined August 2018

पक्षियों की चहचहाहट जैसे प्रकृति को जीवंत कर देती है वैसा चरित्र है मेरा। घुलकर विचारों को आंदोलित जो कर दे वैसा अस्तित्व है मेरा।

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मुक्ति

जुड़े जो तार जिन्दगी के इस मिट्टी से, मुक्ति के लिए। तुम्हीं बोलो मैं क्यों न हँसूं। जीवन का मधुमास रूप -बैराग्य बन उपव... Read more

गुमशुदा

जिन्दगी अब गुमशुदा है न नाम है, न पता है। भारी आपदा है। राह में कल किसी ने पुकारा था, सम्बोधन स्पष्ट पर असंतोष भरा था। क... Read more

इजहार

गले लगा लो आए हैं आज पहली बार। वो जिनके आने से आए बहार महफ़िल में नज़र उतार लो उनकी, गले लगाने के बाद। गले लगा लो आए हैं आ... Read more

बंदिशें

"जब व्यक्ति की भावनाएं मर जाय तो समाज स्वत: मृत-प्राय: हो जाता है।" चीजों को बदलने दीजिए नफरतों से ही सही, दिल के आईने में बसन... Read more

तुम्हारा साथ

प्रिये, तुम आ जाओ। बन बसंत,पुष्पित तन-मन यौवन-रस बरसा जाओ, प्रिये, तुम आ जाओ। कुछ बंदिशें,कुछ साजिशें कुछ वक्त की नुमाइशें,... Read more

जीवन रीति

पग पग डगर डगर पीपल की छांव बरगद की ओट तले खेत - खलिहान। बाँस - बँसवाड, रचे जीवन संगीत महूए की छांव तले जगमग विहान। ... Read more