मै सत्येन्द्र प्रसाद साह (सत्येन्द्र बिहारी) ग्राम – सैय्यदराजा, जिला – चंदौली उत्तर प्रदेश का निवासी हूं । परन्तु मेरा मूल जन्म स्थान बिहार है । मै एक शिक्षक हूं और वर्तमान समय में सासाराम बिहार में पदस्थापित हूं। मेरा मुख्य उद्देश्य अपनी लेखन विधा से हिन्दी को समृद्ध और सुशोभित करना है।जिसे पूर्ण करने के लिए मुझे आपके सहयोग और आशीर्वाद की जरूरत पड़ेगी ।
धन्यवाद ।

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बलिदान

कतरे-कतरे चीथड़े-चीथड़े का हिसाब होना चाहिए, बिछी जो लाशे सड़कों पर उनका इंसाफ होना चाहिए। बहाना था जो रक्त तुम्हे बहा लिया ... Read more

दिव्य कुम्भ

दिव्य कुम्भ दिव्य कुम्भ की बात निराली छायी सब पर संगम की हरियाली स्नान ध्यान पूजा अर्चन संगम पर सब संतों ने प्रयागराज में... Read more

शिशिर कामिनी

लौटते पशु-विहग कोलाहल चहुंओर, कांपती अरुणिमा छिपती क्षितिज की ओर। सकुचाई शिशिर वसन लिपटी लौट रही ‘शिशिर कामिनी’, वसुधा की ओर। ... Read more

दुपहरी

अनल अम्बर झरता ज्येष्ठ की दुपहरी उष्ण वातावरण तप्त तवा सी धरणी व्याकुल पखेरू पशु जन लू समीरणी पाषाण खंडों को तरासती बैठ दुपहरी। ... Read more

जोकर

मै बात पते की कहता जीवन सरकस है होता। रास रचाता मन बहलाता पर सदा मै जोकर कहलाता ।। तरह तरह का स्वांग रचाता कभी हसाता कभी रुला... Read more

मॉ की टीस

मांए जब बिलखती है , कलेजा छलनी हो जाता है। पापिन मंजर नाचती है , रब भी सजदा करता है। चित्कार हृदय भी करती है, अम्बर का सीना... Read more

अवध के राम

आस्था और अनास्था का दीप जलाए बैठे है मंदिर बनेगा राम का ये उम्मीद जगाए बैठे है त्रेता से कलयुग आ गया सत्ता के गलियारों में सत्ता ... Read more

मां

सुना है रहबरों के किस्से बड़े सुहाने होते है । मां तो मां होती है मां के किस्से कहां पुराने होते है।। मां की ममता का कोई मोल नहीं... Read more