sourabh sharma

Joined January 2017

Copy link to share

माँ

*माँ* माँ जिसे भगवान से भी बढ़कर मानते हैं हम, माँ कितना पवित्र और पावन है ये शब्द, वो कष्ट सभी सह लेती है, पर संतान हो कष्ट नही... Read more

मुलाकात

वो पहली मुलाकात तुमसे, जैसे कोई सपना पूरा हो गया हो मेरा... कब से जाने कब से इंतज़ार था मुझे तुमसे मुलाकात का, मन तो किया गोद म... Read more

मेरे बाद

जब तुम पढ़ रही होगी खत मेरा.... तब तक जल चुका होऊँगा मैं, तुम रोना नहीं जानती... पर अपनी आँख का पानी रोक न पाओगी तुम, इसलिए तुमक... Read more