Sonit Bopche

Joined January 2017

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सौ सवाल करता हूँ..

सौ सवाल करता हूँ.. रोता हूँ..बिलखता हूँ.. बवाल करता हूँ.. हाँ मैं.......... सौ सवाल करता हूँ.. फिर भी लाकर उसी रस्ते पे पटक द... Read more

क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो..

क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो.. क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो.. इस रिश्ते की बुनियाद हिलाने की शुरुआत तो मैंने की थी.. छुपक... Read more

इन नजरों से देखो प्रियवर..पार क्षितिज के एक मिलन है..

इन नजरों से देखो प्रियवर पार क्षितिज के एक मिलन है धरा गगन का प्यार भरा इक मनमोहक सा आलिंगन है.. पंछी गान करे सुर लय में नभ क... Read more

ग़ज़ल II हमनजर हो जाइए या हमसफ़र हो जाइए

हमनजर हो जाइए या हमसफ़र हो जाइए... आज हमसे मिल के अब शाम-ओ-सहर हो जाइए... तेरे बिन चारों तरफ कैसा अँधेरा छा गया... इस अँधे... Read more

सिलवटें जाती नहीं..

नींद भी आती नहीं.. रात भी जाती नही.. कोशिशें इन करवटों की.. रंग कुछ लाती नहीं.. चादरों की सिलवटों सी हो गई है जिंदगी.. लोग आते.... Read more

|| दहेजी दानव ||

बेटा अपना अफसर है.. दफ्तर में बैठा करता है.. जी बंगला गाड़ी सबकुछ है.. पैसे भी ऐठा करता है.. पर क्या है दरअसल ऐसा है.. पैसे भी... Read more

यादें

शांत समुद्र.. दूर क्षितिज.. साँझ की वेला.. डूबता सूरज.. पंछी की चहक.. फूलों की महक.. बहके से कदम.. तुझ ओर सनम.. उठता है यूँ ... Read more

आज तन पर प्राण भारी

आज तन पर प्राण भारी मन हुआ स्वच्छन्द जैसे तोड़ सारे बंध जैसे देह की परिधि में सिमटे अब नहीं यह रूह सारी आज तन पर प्राण भारी ... Read more

वो हिन्द का सपूत है..

लहू लुहान जिस्म रक्त आँख में चड़ा हुआ.. गिरा मगर झुका नहीं..पकड़ ध्वजा खड़ा हुआ.. वो सिंह सा दहाड़ता.. वो पर्वतें उखाड़ता.. जो बढ़ रहा ... Read more

चल अम्बर अम्बर हो लें..

चल अम्बर अम्बर हो लें.. धरती की छाती खोलें.. ख्वाबों के बीज निकालें.. इन उम्मीदों में बो लें.. सागर की सतही बोलो.. कब शांत रह... Read more

ऊंचाई की कीमत

अब मुझको बढ़ जाना है ऊपर तक चढ़ जाना है  बेल बोलती बरगद तेरी संगत में पड़ जाना है  पंछी तुझसे बातें करते बादल करते तुझे सलाम  च... Read more