Sonika Mishra

Joined October 2016

मेरे शब्द एक प्रहार हैं,
न कोई जीत न कोई हार हैं |
डूब गए तो सागर है,
तैर लिया तो इतिहास हैं ||

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मुक्तक भाग 1

मैं बाटती हूं रौशनी मेरा कोई ठिकाना नहीं है! तेरे इस शहर में अब मेरा आना जाना नहीं है! यूं तो मैं आज भी अंधेरों में महफूज़ रहती हूं... Read more

क्या सच में अब तुमको प्यार नहीं है!!

माना कि वो लम्हा साथ नहीं है! हम तो है पर वो बरसात नहीं है!! हमसफ़र भी हो मेरे, पास भी हो! पर फिर भी हांथो में हांथ नहीं है!! ... Read more

मुझे कुछ दिनों की, मोहलत तो दे दो!

मुझे कुछ दिनों की, मोहलत तो दे दो! तुम्हारी गली में, यूं न भटका करुँगी!! यादों में तेरी खुद को, सताने तो दो! तुझसे लिपटकर, यूं ... Read more

कभी वो पास आता है, कभी तो रूठ जाता है!

कभी वो पास आता है, कभी तो रूठ जाता है! मेरे लिए ही तो, खुशियां जहां की लूट लाता है!! नदी की एक लहर सा वो, बहकता चल रहा है! किना... Read more

मैं तो अब भी तुममें ही जीता हूं

दिन भर गर्मी में जलता हूं! तब तुमको खुश करता हूं! तुम मुझको नहीं समझते! कैसे ख्वाइश पूरी करता हूं!! सुबह निकलता हु सूरज बनकर... Read more

वक्त की खींचा तानी में जमाने चले गए

वक्त की खींचा तानी में जमाने चले गए! अँधेरे की चौखट पर दर्द मिटाने चले गए! जब वक्त की मार से हौसले कमजोर दिखे! खुद को सूरज की लौ ... Read more

खेलती है चिन्गारियां

खेलती है चिन्गारियां बेबस आग के लिए है मजदूर लहू बहाता कठपुतली से बैठे साहूकार के लिए दीर्घ चोटी पर है लहराता ध्वजा मिट जाती... Read more

देखकर शोहरत मेरी

देखकर शोहरत मेरी क्यूँ जल रहा है वो था अभी तक साथ मेरे क्यूँ अकेला चल रहा है वो हर रोज कहता था वो दर्द दिल के सुनाता था भावन... Read more

आज की बेटी

है अग्रसर देश मेरा पर आज की बेटी कहां है खुद की आवाज बनती खुद बिखरती खुद संवरती पर आज की बेटी कहां है है ज्वलित हर मुद्दा यहां खोद... Read more

कतरा कतरा जी रही है वो

गजल :- कतरा कतरा जी रही है वो-: कतरा कतरा जी रही है वो दर्द-ए-आंसू पी रही है वो त्याग करके घर बनाती रही उसी घर में घाव सी ... Read more

एक रूप में हिन्दुस्तानी

निर्मल पावन सुंदर स्वर्णिम सुशोभित करते नाद मेरे भारत माँ को हैं समर्पित हर पल ये प्राण मेरे भिन्न भिन्न है धर्म हमारा भिन्न भ... Read more

क्या सोचा है तुमने,

क्या सोचा है तुमने, आज दिवाली क्यूँ मना रहे । ऐसी कौन सी विजय मिली, जो दीप खुशी का जला रहे ।। क्या सोचा है तुमने, अरमान किसी... Read more

हद से बढ़ा

हाइकु :- हद से बढ़ा ! वो सरहद पर ! आकर खड़ा !! आज है भरा ! हमारे दुश्मन के ! पाप का घड़ा !! है मिटाने का ! इस दिल मे... Read more

शायरी भाग 1

मेरी ज़िंदगी की तन्हाई का, कोई रास्ता नहीं है | हर पल एक चोट सी चुभी है, मेरी मुस्कान का इससे, कोई वासता नहीं है || ************** हर... Read more

सच

कोई जीतने की चाहत रखता है, कोई प्यार की इबादत करता है | बड़ा कमज़ोर है आदमी, सोचता है पाने को मंज़िल, पर हाँथ खाली रखता है || ज़िंदगी के... Read more

तू हार न अभी

तू हार न अभी छमता को अभी पहचानना है ख़ामोशी को लगा न गले तपते सूरज को निहारना है कर न नीरस मन को अभी बाकी है कुछ रातें ... Read more

अंधेरे जोड़ के

मुक्तक :- तुम गये क्यूं छोड़ के ! कसमे वादे तोड़ के ! जी रहे हैं हम अकेले ! बिखरे मोती जोड़ के !! देखते है जब मुख मोड़ के ! ... Read more

प्रमाण चाहिये

मुक्तक उसको हर बात का जवाब चाहिये ! मेरे दिन और रात का हिसाब चाहिये! चलना तो चाहूं हर कदम उसके साथ! पर मेरे विश्वास का उसे प्रमा... Read more

कब सावन आवे

धूप सुनहरी चलती रहती, वक्त का दामन थामे | पर्वत नदियाँ सब सहमे से, कहते है कब सावन आवे || पतझड़ छाया है मन में, मुस्कान भी धूमिल... Read more

जीतने का जूनून

आसमां क्या चीज़ है वक्त को भी झुकना पड़ेगा अभी तक खुद बदल रहे थे आज तकदीर को बदलना पड़ेगा अधूरी कहानी छोड़ने की आदत नहीं ह... Read more

आशियाना है वहां

ना जाने वो कहां इस गली इस शहर को छोड़कर वो अब रहता कहां सो गए है जख्म पर दर्द है जागे यहां मैं जिंदा हूं अभी है म... Read more

ऐ बचपना

ऐ बचपना, मुझे जाने दे आगे बड़ना है मुझे तेरी मासूमियत को छोड़कर मुसीबतों से लड़ना है मुझे तू बहुत नादान है मेरे चेहरे की मुस... Read more

एक हलचल सी है

हवाओं में भी, एक हलचल सी है । तुमसे मिले तो, आहट सी है ।। खोकर भी जाना, पाकर भी जाना । कोई नहीं है, सबसे दिवाना ।। हवाओं में भी, एक ... Read more

झूठ बहका,सच है महका

झूठ बहका,सच है महका पाप के अंधकार में, रोशनी का दीप कहता था तेरा कभी, जो बोलबाला छल से लिपटा, फकत एक सहारा है आज मेरे कदमों में तू... Read more

वक्त

वक्त जो गुज़र गया उसको तलाशते रहे किसी की याद में वो आज भी आंसू बहाते रहे दो पल के लिए भी कोई रुक न सका वो उम्र भर उनको ... Read more

क्युँ नहीं है

हम हार के भी मुस्कुराते है तू जीत कर खुश क्युँ नहीं है एहसास है मुझे तेरे गम का तू मेरे जख्मों से रूबरू क्युँ नहीं है मेरे हर ल... Read more

एक सवाल बनकर

ऐसा न हो भीड़ में खो जाए हम कुछ पल चले और ठहर जाएं हम बिखर न जाएं कही ख्वाब बनकर जी रहे है हम एक सवाल बनकर शायद कुछ खास... Read more

ऐे ज़िंदगी

ऐे ज़िंदगी मुझे तुझसे मोहब्बत क्युँ है, तू हसती है मेरे जख्मों पर , फिर मुझे तेरी आदत क्युँ है | गिरना भी तूने सिखाया, उठना भी तू... Read more

मेहनत

तू क्यूं करता है तुलना उनसे जो रहते है जग में बनकर न्यारे जरा देख उन्हे भी जो रहते है भूखे पेट बिचारे धन्य हो तुम जो ईश्वर ... Read more