Durga Bondopadhay

Ranchi

Joined April 2020

एक पहेली सी हूं, कुछ अकेली सी हूं, खुद को जानने की कोशिश में हूं।

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मजदूर माफ नहीं करेंगे

देश को चलाने वाले कैसे भूल गए उनको,जो धूप में जल रहे हैं पैर जिनके छिल रहे हैं, भूख से जो तड़प रहे हैं, आंसुओं को जो पी रहे हैं,... Read more

मैं एक मजदूर हूं

मैं एक मजदूर हूं, महीने के अंत में ₹3000 कमाने वाला मैं एक मजदूर हूं, मेरा परिवार मुझसे दूर है मेरी बूढ़ी मां , मुझे ना देख प... Read more