S Kumar

Joined February 2017

मैं वो लिखता हूँ, जो मैं महसूश करता हूँ, जो देखता हूँ,
कभी कभी अपने ही शब्दों में खुद को ढूंढ़ता हूँ,
हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करता हूँ,
बस कुछ ऐसा ही हूँ मैं,
ठहरता नहीं हूँ, मैं चलता रहता हूँ ।।

कुमार
हरियाणा की माटी से जुड़ा एक कलाकार
लिखने के साथ साथ अभिनय और निर्देशन में भी रूचि है ।

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प्यार

किसी के साथ सपने देखना प्यार नहीं किसी के सपनों को पूरा करना प्यार है ।। सिर्फ किसी के साथ जीना प्यार नहीं, किसी से दूर होकर, उ... Read more

जमाने की पोल... हरियाणवी रागनी

ढ़के हैं तो ढ़के रहण दे, तू ढ़के रहण दे ढ़ोल ना खुलवावे तू ना खुलवावे, र जमाने की पोल बात चाल पड़ी तो र मैं बात सारी बोलूँगा ... Read more

मुझे फूल नहीं, कांटा बनना है

सच ही तो कहतें हैं, बाग में सबसे पहले वही फूल टूटता है, जो सबसे खूबसूरत हो । कुछ फूल होते हैं ऐसे, जिनके साथ काटें होते हैं व... Read more

बहुत याद आते हैं वो दिन

एक लड़की पर उसके प्रेमी ने तेजाब फेकां । कुछ महीनों बाद लड़की ने उस लड़के को एक पत्र लिखा, कुछ इस तरह.... बहुत याद आते है अब वो ... Read more

मैं बाट देखूंगा तेरी (मैं इंतजार करूँगा तेरा)

आज तो तू मज़बूरी का बहाना बना के चाल पड़ी, एक दिन खुद लौट के आवेगी, मैं बाट देखूंगा तेरी आज कदर नहीं तेने प्यार की, पर प्यार के ... Read more

इन्टरनेट मुक्ति धाम

कई दिनों से खाली बैठा था, सोच रहा था कि कुछ नया काम करूँ ।। भीड़ से हटकर, कुछ अलग कुछ आसान सा कुछ नया काम करूँ ।। अपने दिमाग क... Read more

मैं और मेरा भगवान

मैं उस भगवान को नहीं मानता जो किसी मंदिर या मजार में एक पत्थर में रूप लिए बैठा है । मैं उस भगवान को मानता हूँ जिसनें मुझे ये दुनिया... Read more