श्रीकृष्ण शुक्ल

मुरादाबाद (उ प्र)

Joined December 2016

सहजयोग, प्रचार, स्वांतःसुखाय लेखक, कवि एवं विश्लेषक.

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नेकी कर दरिया में डाल

नेकी कर दरिया में डाल नमस्ते सर, हरीश ने सिर उठाकर देखा तो एक अधेड़ सा व्यक्ति जो देखने में उद्विग्न सा लग रहा था, हाथ जोड़े खड़ा ... Read more

भगवान और भक्त : कलियुगी संवाद

भक्त और भगवान, कलियुगी संवाद जन्माष्टमी पर भक्ति भाव कुछ ऐसा हो गया कि कान्हा से साक्षात्कार हो गया मैं नतमस्तक हो गया कान्हा... Read more

दुनियादारी

मिलना जुलना, शादी उत्सव, यारी रिश्तेदारी एक लिफाफे में सिमटी अब सारी दुनियादारी प्रेम भाव तो लुप्तप्राय दिखता है संबंधों में रि... Read more

नुकसान

ए बाबू कुछ पैसे दे दो, सुबह से कुछ नहीं खाया है. कहते कहते वो औरत सतीश के सामने आकर खड़ी हो गई. चेहरे पर ही मजबूरी के भाव झलक रहे थ... Read more

नमामि गंगे हर हर गंगे

नमामि गंगे हर हर गंगे ============== नमामि गंगे सुनते सुनते इक दिन हमने भी ये सोचा गंगा को हम भी दे आएं पापों का सब लेखा जोख... Read more

गज़ल: मुफलिसी में ज़िन्दगी दुश्वार है

गज़ल --–---- मुफलिसी में जिन्दगी दुश्वार है जेब पर भारी हुआ बाजार है पेट भरना जंग ही है आजकल अर्थ ही सबसे बड़ा हथियार है क... Read more

माँ तेरा अहसास

लगता है तुम यहीं कहीं हो छिपी हमारे पास यदा कदा होता रहता है माँ तेरा अहसास तुमने ही जन्म दिया मुझको जब आँख खुली तुमको पाया ... Read more

हम श्रमिक

आज श्रमिक दिवस है. श्रमिक की वेदना व्यक्त करती मेरी कविता. हम श्रमिक हम रहे श्रमिक हम क्या जानें अच्छे दिन कैसे हो... Read more

लाज रखनी है अपने वतन की हमें

गज़ल है ज़रूरत सदा इस वतन की हमें इस चमन की हमें, अंजुमन की हमें मर मिटेंगे वतन के लिए दोस्तो लाज रखनी है अपने वतन की हमें ... Read more

आओ हम सब बनें भगीरथ

आओ हम सब बनें भगीरथ एक भगीरथ के तप से ही, धरती पर गंगा आई शिव के सहस्त्रार से होकर, अमृतमय जल ले आई गंगाजल का एक आचमन, तन मन पा... Read more

हवा कुछ बेतुकी चलने लगी है

हवा कुछ बेतुकी चलने लगी है फिज़ां भी मजहबी होने लगी है जलाए थे दिये जो रौशनी को उन्हीं से आग अब लगने लगी है किसी ने हाल क्या ... Read more

फुटपाथों का बचपन

आँखों में अगणित प्रश्न लिए और मन में बस जिज्ञासा तन से कोमल मन से कुंठित लगता है डरा डरा सा बचपन में मानो जान लिया हो सारा जीवन दर... Read more

जंगल में दरबार

उपचुनाव की हार से, कैसा हाहाकार बुआ भतीजा सोचते, जीत लिया संसार गठबंधन पर पड़ रही, टुकड़ा टुकड़ा धूप सभी मुखौटे खुल गए, दिखता असली... Read more

हम दर्पण भी दिखलाते हैं

हम भक्त नहीं, शुभचिंतक हैं, हम सच्ची बात बताते हैं केवल गुणगान नहीं करते, हम दर्पण भी दिखलाते हैं क्यों जनता तुमसे विमुख हुई... Read more

ससुराल में पहली होली

खूब याद आती है अब भी पहली होली पहुँचे जब ससुराल मनाने को हम होली पत्नी मैके गई हुई थी, मन आतुर था होली पर पत्नी सँग होगी खूब ठिठो... Read more

होली है आज गले मिल लो

मन के सारे बंधन खोलो होली है आज गले मिल लो इस अवसर पर लज्जा कैसी ये तो है रीत जमाने की तुम कर लो आलिंगन कर लो होली है आज गले ... Read more

एक गज़ल

हालात से लड़ा है वो दिखता थका थका चलता ही जा रहा है वो लेकिन झुका झुका वो शख्स शक्ल से भी तो दिखता लुटा लुटा तकदीर से पिटा है वो... Read more

गज़ल

अचानक वो नजदीक आने लगे हैं नया मुझसे रिश्ता जताने लगे हैं मैं जबसे हुआ हूँ महकमे का हाकिम सभी हाजिरी अब लगाने लगे हैं चुनावी... Read more

रंग तिरंगे के छाएं

जन जन को प्राणों से प्यारा, ये गणतंत्र हमारा है संविधान निज मिला राष्ट्र को, सबका बना सहारा है संविधान के इस उत्सव को, हम प्रतिवर्... Read more

प्रीत के ही गीत गाना चाहता हूँ

प्रीत के ही गीत गाना चाहता हूँ प्यार मै सबको सिखाना चाहता हूँ मैं विरह के गीत गाकर क्या करूँगा वेदना में मुस्कुराना चाहता हूँ ... Read more

दर्द में भी मुस्कुराना चाहिए

एक नुस्खा आजमाना चाहिए दर्द में भी मुस्कुराना चाहिए दोस्ती सच्ची किसी से है अगर गर्दिशों में काम आना चाहिए छोड़ बातें मजहबी उ... Read more

वोटर सबपे भारी है

मंच सज गया है दंगल की देखो फिर तैयारी है आरोपों प्रत्यारोपों का, खेल बराबर जारी है दावेदार टिकट के देखो, भागदौड़ में उलझे हैं र... Read more

मन की कोई थाह नहीं

पल में जाता आसमान पे पल में सपनों की उड़ान पे सपनों में ही भरे कुलाचें मन को कुछ परवाह नहीं मन को कोई जान न पाया मन की कोई थाह ... Read more

शत् कोटि नमन मेरे भगवन्

भगवान तुम्हारी करुणा से चलता क्षण क्षण मेरा जीवन किस भांति तुम्हें आभार कहूं शत कोटि नमन मेरे भगवन रवि बनकर तुमने दिया तेज च... Read more

विजयादशमी तभी मनायेंं

विजयादशमी के उत्सव को, धूमधाम से सभी मनाते नगर नगर में रावण के, ऊँचे पुतले फूंके जाते त्रेतायुग की उस घटना का, ढोल पीटते नहीं... Read more

ये तूने क्या कर डाला

आज प्रस्तुत हैं पर्यावरण पर दो मुक्तक वृक्ष काट कर इस धरती को, हमने बंजर कर डाला भूजल का अतिशय दोहन कर, रिक्त किया जल का प्याल... Read more

मुस्कुराना आ गया

=हार में भी जीत सी खुशियाँ मनाना आ गया दर्द सहकर भी हमें अब मुस्कुराना आ गया, आपकी इस खुशमिजाजी ने किया ऐसा असर आपसे मिलकर हमें... Read more

श्वासों का होम

नित्य होम श्वासों का करता हूँ नित्य ही जीता नित्य ही मरता हूँ सूनी आँखों में स्वप्न सँजोए हैं, बगिया में थोड़े पौधे बोए हैं वि... Read more

आँसू बहाते ही रहे

हादसों पर आप बस, लाशें गिनाते ही रहे या मदद के नाम पर, आँसू बहाते ही रहे था बड़ा वीभत्स मंजर रेल पलटी थी जहाँ जो मदद के हाथ थे,... Read more

नींव का पत्थर

एक छंदमुक्त रचना नींव का पत्थर ========== क्यों कुरेदते हो मुझे, ये दर्द मुझे सहने दो मैं नींव का पत्थर हूँ, मुझे यूँ ह... Read more

ये जिंदगी

ये जिंदगी ====== हर वक्त नए रंग, दिखाती है जिंदगी पग पग पे हंसाती है, रुलाती है जिंदगी बचपन का दौर बीत, गया हंसी खेल में उस... Read more

गतिमान रहो

दो पल का ये नश्वर जीवन हर पल इसको भरपूर जियो तुम किस उलझन में ठहरे हो गतिमान रहो, गतिमान रहो रवि में गति है, शशि में गति है प... Read more

हो सके तो ज़रा मुस्कुरा दीजिए

साऱे शिकवों गिलों को भुला दीजिए हो सके तो जरा मुस्कुरा दीजिए आप नाहक ही ऐसे परेशान हैं बात को बेवजह मत हवा दीजिए वक्त मुश्किल ह... Read more

एक पौधा बेटी के नाम

आज एक पौधा लगाओ बेटियों के नाम लाड़ नित उसपर लुटाओ हर सुबह औ शाम ब्याह कर जाए जहां सब के दिलों जीत ले फूल सी महके वहां रक्... Read more

जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर का निर्माण हो

पूरी हो मन की अभिलाषा जन जन का कल्याण हो जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर का निर्माण हो आक्रंता था बाबर जिसने जन्मभूमि कब्जाई थी प... Read more

द्रौपदी ही अब हरेगी द्रौपदी के उर की पीड़ा

रोज होते हैं स्वयंवर, रोज होती द्यूत क्रीड़ा है नहीं कोई हरे जो, द्रौपदी के उर की पीड़ा दांव पर लगती है प्रतिदिन द्रौपदी क्षण क्... Read more

वोट डालने निश्चित जाना

नेताजी लेकर आए हैं लोक लुभावन ढेरों वादे जनता तो है भोली भाली समझ न पाती कुटिल इरादे. इनको आज बदलना होगा जन जन को समझाना होगा... Read more

हिंदी अपनाओ

हिंदी दिवस पर वर्ष १९८६ , १४_९_८६ को लिखी अपनी एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ. अपनी भाषा अपनाने में, अब तो लज्जा मत दिखलाओ हिन्दु... Read more

हिंदी अपनाओ

हिंदी दिवस पर वर्ष १९८६ , १४_९_८६ को लिखी अपनी एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ. अपनी भाषा अपनाने में, अब तो लज्जा मत दिखलाओ हिन्दु... Read more

असुर हमारे भीतर ही है

बंगलोर में छात्रा से छेड़छाड़ की घटना से क्षुब्ध मन द्वारा उत्पन्न हुई मेरी रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ. असुर हमारे भीतर ही है ______... Read more

नववर्ष की शुभकामना

नववर्ष आपके जीवन में खुशियाँ अनन्त दे पल पल में हर स्वप्न आपका पूरा हो स्वर्णिम हर रोज सवेरा हो चहुं ओर शांति और सौरभ हो पद में... Read more

चोरों की बस्ती में हल्ला है

बड़े बड़े नोटों की बंदी का जबसे फरमान हुआ है एक एक भारतवासी के मन में ये अरमान जगा है अब अमीर भी मुझ गरीब सा खाली हाथ निठल्ला ... Read more