श्रीकृष्ण शुक्ल

मुरादाबाद (उ प्र)

Joined December 2016

सहजयोग, प्रचार, स्वांतःसुखाय लेखक, कवि एवं विश्लेषक.

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चलो अब लौटें अपने गाँव

चलो अब लौटें अपने गाँव -------------------------------- उखड़ने लगे यहाँ से पाँव। चलो अब लौटें अपने गाँव। बुला रहा है बूढ़ा पीपल,... Read more

आशियाँ ही आशियाँ

गज़ल जिन दरख्तों को गिराना चाहती हैं आँधियाँ।। कुछ परिन्दों ने बना रक्खे हैं उनमें आशियाँ। कल यहाँ पर खेत थे बस और कुछ पगडंडिय... Read more

क्या होता है कोरोना

क्या होता है कोरोना छोटू ने मम्मी से पूछा एक बात बतलाओ। क्या होता है यह कोरोना, आप मुझे समझाओ। बंद हुए स्कूल, खेलने पर भी पाबंद... Read more

कवि पत्नी की नोंकझोंक

07.02.2020 कवि पत्नी की नोंकझोंक कवि जी और घराणी में नित नोंकझोंक चलती थी। अपना घर तुम स्बयं सम्हालो, वो अक्सर कहतीं थी।। आप... Read more

रोज़ा इफ्तार

रोज़ा इफ्तार -------------- बाबूजी, पाँच बजने वाले हैं, ये फोल्डर ऐसे ही रख देता हूँ, कल काम पूरा कर दूँगा, मुनव्वर ने रामबाबू से... Read more

घर वापसी

घर वापसी -------------- पापा, अभी कितना और चलना है, घर कब पहुँचेंगे, नन्हीं मुनिया ने राकेश से पूछा। पहुँच जायेंगे बिटिया, जल्द... Read more

कोरोना तू अब तो जा

कोरोना तू अब तो जा -------------------------- कोरोना तू जा जा जा। खा के जहर कहीं मर जा।। बहुत हो चुका तेरा राज। बंद घरों मे... Read more

कोरोना का संकट मित्रों, कब तक हमें डरायेगा।

कोरोना का संकट मित्रों, कब तक हमें डरायेगा। ---------------------------------------------------------- कोरोना का संकट मित्रों, क... Read more

कब तक घर में बंद रहूँगा

कब तक घर में बंद रहूँगा। -------------------------------- छोटू पापा से ये बोला, कब तक घर में बंद रहूँगा बैठे बैठे ऊब गया हूँ, क... Read more

नववर्ष मात्र इतना करना।

नववर्ष मात्र इतना करना पूरा करना सबका सपना चहुँ ओर शांति सुख चैन रहे माँ बहनों का सम्मान रहे वहशी हैवान दरिंदों से नारी की अ... Read more

रूढ़ियों को तोड़िए।

यह कविता मैंने सन् 1985 में लिखी थी। रूढ़ियों को तोड़िए, धर्मांधता को छोड़िए। और सबको राष्ट्र की धारा में लाकर जोड़िए।। हैं नहीं ... Read more

धार के विपरीत ही मैं तो सदा चलता रहा

एक दर्पण रूप मेरे नित्य नव गढ़ता रहा। मैं स्वयं की झुर्रियों के बिंब ही पढ़ता रहा।। दौड़ता हरदम रहा लेकिन कहीं पहुँचा नहीं। धार के... Read more

जैसी करनी वैसी भरनी

दूर दूर तक धुआँ धुआँ है दिन में ही अँधकार हुआ है घोर कुहासे के बादल में बेबस सूरज कैद हुआ है. दृश्य सभी धूमिल दिखते हैं चक्ष... Read more

बाबूजी का श्राद्ध

बाबूजी का श्राद्ध --------------------- बाबूजी के श्राद्ध पर पंडित जी बोले, सुनो जजमान, जो बाबूजी खाते थे, वही बनवाना पकवान।... Read more

कुछ हमको भी जी लेने दो

कुछ हमको भी जी लेने दो। कुछ हमको भी खुश रहने दो।। हम तो सुनते ही आए हैं , सुन सुन कर घुटते आए हैं, अपने सपने ध्वस्त हुए हैं, ... Read more

बाल कविता:दूध के दाँत

कविता: दूध के दाँत ------------------------- नटखट छोटू लगा बिलखने उसका दाँत लगा था हिलने दाँत कहाँ से मैं लाऊँगा बाबा जैसा हो... Read more

मैं हूँ नंबर वन

बाल कविता ः मैं हूँ नंबर वन ----------------- नटखट छोटूराम मुहल्ले भर का प्यारा। हर चाची ताई नानी का रहा दुलारा।। खेल कूद म... Read more

सैनिक की जिंदगी,

दिवाली पर न आऊँगा, उमंगों को सुला देना नहीं मिल पाई है छुट्टी अकेले घर सजा लेना यहाँ सरहद पे हम मिलकर बमों को खूब फोड़ेंगे हमारे ... Read more

बेटियाँ अब देश में कैसे जियें।

बेटियाँ अब देश में कैसे जियें ----------------------------------- खून के आँसू भला कैसे पियें। बेटियाँ अब देश में कैसे जियें।। ... Read more

जीवन की परिभाषा

जीवन भर सँग सँग चलती है, आशा और निराशा । सुख.दुख से ही रची गई है, जीवन की परिभाषा ।। सुख की इच्छा मन को प्रतिपल, स्वप्न दिखाती रह... Read more

मैं भारत माँ का प्रहरी हूँ

मैं सीमाओं पर रहूँ सजग, अपना कर्तव्य निभाता हूँ मैं भारत माँ का प्रहरी हूँ, चरणों में शीश झुकाता हूँ। है शस्य श्यामला भारत माँ,... Read more

जिस जगह पूज्य होती नारी, उस जगह देवता बसते हैं

नारी ही तो जननी सबकी, उससे ही जीवन पाया है उसने पयपान कराकर ही, हमको बलवान बनाया है वह जननी है, वह भगिनी है, सहचरिणी है, पुत्री भी... Read more

नेकी कर दरिया में डाल

नेकी कर दरिया में डाल नमस्ते सर, हरीश ने सिर उठाकर देखा तो एक अधेड़ सा व्यक्ति जो देखने में उद्विग्न सा लग रहा था, हाथ जोड़े खड़ा ... Read more

भगवान और भक्त : कलियुगी संवाद

भक्त और भगवान, कलियुगी संवाद जन्माष्टमी पर भक्ति भाव कुछ ऐसा हो गया कि कान्हा से साक्षात्कार हो गया मैं नतमस्तक हो गया कान्हा... Read more

दुनियादारी

मिलना जुलना, शादी उत्सव, यारी रिश्तेदारी एक लिफाफे में सिमटी अब सारी दुनियादारी प्रेम भाव तो लुप्तप्राय दिखता है संबंधों में रि... Read more

नुकसान

ए बाबू कुछ पैसे दे दो, सुबह से कुछ नहीं खाया है. कहते कहते वो औरत सतीश के सामने आकर खड़ी हो गई. चेहरे पर ही मजबूरी के भाव झलक रहे थ... Read more

नमामि गंगे हर हर गंगे

नमामि गंगे हर हर गंगे ============== नमामि गंगे सुनते सुनते इक दिन हमने भी ये सोचा गंगा को हम भी दे आएं पापों का सब लेखा जोख... Read more

गज़ल: मुफलिसी में ज़िन्दगी दुश्वार है

गज़ल --–---- मुफलिसी में जिन्दगी दुश्वार है जेब पर भारी हुआ बाजार है पेट भरना जंग ही है आजकल अर्थ ही सबसे बड़ा हथियार है क... Read more

माँ तेरा अहसास

लगता है तुम यहीं कहीं हो छिपी हमारे पास यदा कदा होता रहता है माँ तेरा अहसास तुमने ही जन्म दिया मुझको जब आँख खुली तुमको पाया ... Read more

हम श्रमिक

आज श्रमिक दिवस है. श्रमिक की वेदना व्यक्त करती मेरी कविता. हम श्रमिक हम रहे श्रमिक हम क्या जानें अच्छे दिन कैसे हो... Read more

लाज रखनी है अपने वतन की हमें

गज़ल है ज़रूरत सदा इस वतन की हमें इस चमन की हमें, अंजुमन की हमें मर मिटेंगे वतन के लिए दोस्तो लाज रखनी है अपने वतन की हमें ... Read more

आओ हम सब बनें भगीरथ

आओ हम सब बनें भगीरथ एक भगीरथ के तप से ही, धरती पर गंगा आई शिव के सहस्त्रार से होकर, अमृतमय जल ले आई गंगाजल का एक आचमन, तन मन पा... Read more

हवा कुछ बेतुकी चलने लगी है

हवा कुछ बेतुकी चलने लगी है फिज़ां भी मजहबी होने लगी है जलाए थे दिये जो रौशनी को उन्हीं से आग अब लगने लगी है किसी ने हाल क्या ... Read more

फुटपाथों का बचपन

आँखों में अगणित प्रश्न लिए और मन में बस जिज्ञासा तन से कोमल मन से कुंठित लगता है डरा डरा सा बचपन में मानो जान लिया हो सारा जीवन दर... Read more

जंगल में दरबार

उपचुनाव की हार से, कैसा हाहाकार बुआ भतीजा सोचते, जीत लिया संसार गठबंधन पर पड़ रही, टुकड़ा टुकड़ा धूप सभी मुखौटे खुल गए, दिखता असली... Read more

हम दर्पण भी दिखलाते हैं

हम भक्त नहीं, शुभचिंतक हैं, हम सच्ची बात बताते हैं केवल गुणगान नहीं करते, हम दर्पण भी दिखलाते हैं क्यों जनता तुमसे विमुख हुई... Read more

ससुराल में पहली होली

खूब याद आती है अब भी पहली होली पहुँचे जब ससुराल मनाने को हम होली पत्नी मैके गई हुई थी, मन आतुर था होली पर पत्नी सँग होगी खूब ठिठो... Read more

होली है आज गले मिल लो

मन के सारे बंधन खोलो होली है आज गले मिल लो इस अवसर पर लज्जा कैसी ये तो है रीत जमाने की तुम कर लो आलिंगन कर लो होली है आज गले ... Read more

एक गज़ल

हालात से लड़ा है वो दिखता थका थका चलता ही जा रहा है वो लेकिन झुका झुका वो शख्स शक्ल से भी तो दिखता लुटा लुटा तकदीर से पिटा है वो... Read more

गज़ल

अचानक वो नजदीक आने लगे हैं नया मुझसे रिश्ता जताने लगे हैं मैं जबसे हुआ हूँ महकमे का हाकिम सभी हाजिरी अब लगाने लगे हैं चुनावी... Read more

रंग तिरंगे के छाएं

जन जन को प्राणों से प्यारा, ये गणतंत्र हमारा है संविधान निज मिला राष्ट्र को, सबका बना सहारा है संविधान के इस उत्सव को, हम प्रतिवर्... Read more

प्रीत के ही गीत गाना चाहता हूँ

प्रीत के ही गीत गाना चाहता हूँ प्यार मै सबको सिखाना चाहता हूँ मैं विरह के गीत गाकर क्या करूँगा वेदना में मुस्कुराना चाहता हूँ ... Read more

दर्द में भी मुस्कुराना चाहिए

एक नुस्खा आजमाना चाहिए दर्द में भी मुस्कुराना चाहिए दोस्ती सच्ची किसी से है अगर गर्दिशों में काम आना चाहिए छोड़ बातें मजहबी उ... Read more

वोटर सबपे भारी है

मंच सज गया है दंगल की देखो फिर तैयारी है आरोपों प्रत्यारोपों का, खेल बराबर जारी है दावेदार टिकट के देखो, भागदौड़ में उलझे हैं र... Read more

मन की कोई थाह नहीं

पल में जाता आसमान पे पल में सपनों की उड़ान पे सपनों में ही भरे कुलाचें मन को कुछ परवाह नहीं मन को कोई जान न पाया मन की कोई थाह ... Read more

शत् कोटि नमन मेरे भगवन्

भगवान तुम्हारी करुणा से चलता क्षण क्षण मेरा जीवन किस भांति तुम्हें आभार कहूं शत कोटि नमन मेरे भगवन रवि बनकर तुमने दिया तेज च... Read more

विजयादशमी तभी मनायेंं

विजयादशमी के उत्सव को, धूमधाम से सभी मनाते नगर नगर में रावण के, ऊँचे पुतले फूंके जाते त्रेतायुग की उस घटना का, ढोल पीटते नहीं... Read more

ये तूने क्या कर डाला

आज प्रस्तुत हैं पर्यावरण पर दो मुक्तक वृक्ष काट कर इस धरती को, हमने बंजर कर डाला भूजल का अतिशय दोहन कर, रिक्त किया जल का प्याल... Read more

मुस्कुराना आ गया

=हार में भी जीत सी खुशियाँ मनाना आ गया दर्द सहकर भी हमें अब मुस्कुराना आ गया, आपकी इस खुशमिजाजी ने किया ऐसा असर आपसे मिलकर हमें... Read more

श्वासों का होम

नित्य होम श्वासों का करता हूँ नित्य ही जीता नित्य ही मरता हूँ सूनी आँखों में स्वप्न सँजोए हैं, बगिया में थोड़े पौधे बोए हैं वि... Read more