एस. कुमार मौर्य

बहराइच, उत्तर प्रदेश

Joined December 2019

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जज्बात

बहुत कम लोग है जो दिल की, सच्ची बात लिखते है । उजाले को तिमिर और, दिन को रात लिखते हैं सही क्या है गलत है क्या, उन्हें मालूम है... Read more

चाहत

हमारी चाहते भी चाहकर न हो सकी मेरी मगर हम चाहकर भी चाहतो को न भुला पाए Read more

नीर ही जब अपनी नमी से डरता हो,

नीर जब अपनी नमी से डरता हो, प्यार जब अपने कमी से डरता हो, ऐसे में ज़िन्दगी वहाँ मुस्कराए कैसे, जब आदमी ही, आदमी से डरता हो. Read more

अत्त दीपो भव

ज्योति पर्व सा मन उज्जवल हो, और मिटे तम काला.. अत्त दीपो भव मंत्र सफ़ल हो, मन मंदिर में रहे उजाला.. मिटे अंधेरा पथ उज्जवल हो, सब्बे... Read more

नोटबंदी

प्रिय मित्रों दो चार हजार रुपयों के लिए लाइन में लगकर अपनी जान व समय ना गंवाइये,, लक्ष्मी धन वर्षा यंत्र और कुबेर धनवर्षा यंत्र मं... Read more

मैं तुमको याद रखने के सिवा कुछ भी नही करता

मुहब्बत न रहे तो फिर रहा कुछ नहीं करता.. की इतनी तेज़ आँधी मे बचा कुछ भी नहीं करता.. तू मुझको याद रखना अब गवारा ही नहीं करती.. मैं... Read more

आज नहीं यदि लिख सकते तुम, कलम उठाओ कल लिख डालो,,

आज नहीं यदि लिख सकते तुम, कलम उठाओ कल लिख डालो,, बिखरे हैं जो शब्द पिरो कर, सुंदर एक गजल लिख डालो,, लिखने वालों ने खूब लिखा, ... Read more

हर रोज तुम्हारी गलियों में, हम आते जाते रहते हैं !!

सपनोंं की दुनियां में, तुमको, हम रोज़ बुलाते रहते हैं !! हर रोज तुम्हारी गलियो में, हम आते जाते रहते हैं !! शब्दो की संरचना तुम... Read more

सब्बे सत्ता सुखी रहे

ज्योति पर्व सा मन उज्जवल हो, और मिटे तम काला,, अत्त दीपो भव मंत्र सफ़ल हो, मन मंदिर में रहे उजाला,, मिटे अंधेरा पथ उज्जवल हो, सब्बे... Read more

जब मन में आये हर्ष प्रिये.. ऐसा अपना नववर्ष प्रिये

जब मन में न हो हर्ष प्रिये,, समझो सब कुछ है व्यर्थ प्रिये,, फिर कैसा यह नव वर्ष प्रिये,, जब दिल में ना हो हर्ष प्रिये,, न फसल ... Read more