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क्यों करें हम

एक ग़ज़ल- ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ कोई भी ख़ाब देखा क्यों करें हम खुद अपनी नींद रुस्वा क्यों करें हम नहीं जब गुलशन-ए-दिल में कोई फूल ... Read more

एक मुसलसल ग़ज़ल

दर्द देते है वो नफासत से बाज़ आते नही हैं फितरत से तल्ख़ लहज़ा भी शख़्त तेवर भी" हो गए नर्म सब मुहब्बत से अर्श पर माहो-आफताब भी ... Read more

चांद का मेला

नभ ये उपवन सा सजेगा देखना कल रात मे, प्रेम रूपी गुल खिलेगा देखना कल रात मे। आ रही है सज संवरकर कल शहर मे महज़बीं, चांद ... Read more

अमीरों की बनकर रही रौशनी है

अमीरों की बनकर रही रौशनी है, गरीबों के हिस्से मे बस तीरगी है। मै बातें करूं चांद तारों की कैसे, मुझे रौशनी जुगनुओं से मिली ह... Read more

दोरे-हाजिर से डर रहा हूँ मैं,

दोरे-हाजिर, से डर रहा हूँ मै, रोज बेमौत मर रहा हूँ मै। ढूँढना है मुझे हुनर अपना, खुद में गहरा उतर रहा हूँ मै। ग़म म... Read more