मैं साहित्य प्रेमी व्यक्ति हूँ, न तो मैं दक्ष कवि हूँ, न ही लेखक बस कुछ खुबसूरत पंक्तियों को खूबसूरती से एक धागे में पिरोने का प्रयास करता हूँ,और बस एक हार तैयार हो जाती है और उसकी खूबसूरती तो बस आप बता सकते हैं।

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बेटी भी तू जननी भी तू

बेटी भी तू जननी हुई तू , ममता का समंदर तू। तु ही दुर्गा तू ही काली, खुशियों का बवंडर तू। तुझसे ही है सारी दुनिया, इस बगिया ... Read more

बेटी भी तू जननी भी तू

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