Shyam Sundar Subramanian

Bangalore

Joined October 2019

An ex banker and financial consultant.Presently engaged as Director in Vanguard Business School at Bangalore. Hobbies includes writing in self blog shyam53blogspot.blogspot, singing ,and meeting people and travelling and exploring new places and cultures.
Email : shyamsundar1953@gmail.com

Copy link to share

व्यक्तिगत सोच

कभी-कभी हम किसी व्यक्ति विशेष के लिए एक धारणा बना लेते हैं जो गलत सिद्ध होती है। इसका मुख्य कारण हमारी सोच में उसके प्रति बिना किस... Read more

उसके आ जाने से

उसके आ जाने से फ़िज़ा में बहार आ जाती है। गम़ग़ीन लम़्हों में मस़र्रत सी छा जाती है। अब तक जो ब़ेचैन था जो मेरा दिल । उसमें सु... Read more

चन्द अल्फ़ाज़

हमें जिन से ऱहम की उम्मीद थी उन्हीं ने सरे म़हफिल हमारी बेचाऱगी का मज़ाक बना डाला। उन दग़ाबाज दोस्तों से दुश्मन बेहतर है जो श़िद्... Read more

सामाजिक हिंसा

मनुष्य ने इस पृथ्वी पर जब से जन्म लिया है। तब से उसमें प्राथमिक रूप से दो गुण विद्यमान रहे हैं । एक राक्षसी गुण और दूसरा दैवीय गुण ... Read more

मेरी जीवन यात्रा

जीवन में प्रथम पदार्पण पर मेरी दुनिया थी मेरी मां की गोद और उसका आंचल । शैशवावस्था में उसने मुझे हाथ पकड़कर चलना सिखाया प्रकृति का ... Read more

जज़्बा- ए- बग़ावत

वो दिल के किसी कोने में छुपा बैठा है । जो हमेशा दस्त़क देता रहता है । और दबी ज़ुबान में कहता रहता है । जगाओ मुझे कब तक तुम ये ज़़ु... Read more

मय़कश़ी

दोस्तों के संग मिल बैठकर वो जब पीने बैठे तो दो घूंट चढ़ाकर बोले वैसे तो मैं पीता नहीं बस दोस्तों का मन रखने के लिए थोड़ी सी चख़ लेता ... Read more

ज़हर

न जाने क्यों हम इस शहर में अजनबी से हो गए हैं। कल तक जो थे अपने क्यों पराए से लगने लगे हैं। क्यों ग़ुमसुम़ सी है वो मस़र्रत की फि... Read more

स़िला

इस खुदग़र्ज़ जहाँ में हम़द़र्द तलाश़ ना कर। दिल के ज़ख्म तेरी अम़ानत है दिखाया ना कर । ब़ेद़र्द है यह ज़माना करेगा रुस़वा सरे़ बाज़ा... Read more

मुस्कुराहटें

अपने आप में कुछ मर्म को समेटे हुये। या अपनी मूक सहमति प्रकट करते हुए। या कुछ निर्विकार निरापद सा भाव लिए हुए। या कुछ प्रसन्नता... Read more

नववर्ष अभिनंदन्

आइए करें अभिनंदन् नववर्ष का। द्वेष क्लेष व्याप्त संताप समाप्त हो । करें कामना उदगम् हो नवजीवन । खुशियों के प्रपात मिलेंं। हों ... Read more

आहत

ये उन दिनों की बात है जब मेरे सामने वाले फ्लेट में एक बुजुर्ग शर्मा दंपति रहते रहते थे। वह नियम पूर्वक रोज सवेरे उठकर सैर पर जाते... Read more

साऩेहा

लगता है क्यों हर शख़्स अपने ही ख्या़लों में ग़ुमसुम सा ख़ोया ख़ोया है। शायद कल रात उसने कोई खौफ़नाक ख्वाब देखा है जिस की ताबीर जानकर अक... Read more

चन्द श़ेर

ये मेरी नजरों का धोखा है या दिल का कुस़ूर है । जो उनकी बेवफाई पर भी दिल उन्हें बेवफ़ा नहीं मानता । उनके लुटने का तमाशा हम देखते ... Read more

हिम्म़त और म़ेहनत

खोजता क्या है अपने हाथों की लकीरों में मुक़द्दर। वो तो बदलेगा जब होगी तुझमें जुऩूने मश़क्कत । वक्त से पहले कुछ भी मय़स्सर नहीं होता ... Read more

अहम्

उस दिन मै खिन्न मन से घर से निकला। मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। क्योंकि लोग मेरी बात मान नहीं रहे थे । और अपनी अपनी मर्जी की कर ... Read more

चन्द श़ेर

जब से हम उनके हमद़र्द बन गए। अपने सारे द़र्द हम भूल गए । तिश़नगी ए इश़्क बुझाए नहीं बुझती। लाख कोश़िश करो छुपाए नहीं छुपती। ... Read more

चन्द मुक्तक

युवा आज का युवा दिशाहीन, दिग्भ्रमित, त्रिशंकु की तरह. लटका हुआ । शिक्षक आज का शिक्षक जैसे साँपों के बीच तक्षक । नेता आज का नेता... Read more

चन्द श़ेर

मय़खाने में बैठे वो ग़म को ग़लत कर रहे थे । होश़ में जब आए तो पाया खुद ग़लत हो रहे थे । दौलत और श़ोहरत ज़िंदगी भर कमाई जब जुदा हुए तो... Read more

युगपुरुष

उसको देखा है मैंने रात के अंधेरे में टिमटिमाते दीए की रोशनी की तरह । उसको देखा है मैंने किसी खत्म न होती कहानी की तरह । उसको देखा ... Read more

इंसांं

वक्त के साथ बदल जाते हैं इंसांं । जाना पहचाना सा अब लगता है अजनबी इंसांं । जो कभी खिलता था फूलों की मानिंद अब तो मुरझाया सा लगता ... Read more

ब़दनस़ीबी

कहते हैं इऱादे बुलंद हो और मश़क्क़त का जज़्बा ए जुनूऩ हो तो मंज़िल हास़िल होती है । पर तकदीर साथ न दें तो तदब़ीर से खड़े किए महल भी ख... Read more

सफ़र

जिंदगी के सफ़र में हम बढ़ते रहे । जब तब मिली अपनों से मिलन की खुशियांँ। तो कभी अपनी च़ाहत को खोने का ग़म । कभी व़क्त की कऱवट से निख... Read more

आश़िकी

क्या पहली नज़र में प्यार हो जाता है । जुबाँ गुमसुम रहती है नजरों से इज़हार हो जाता है। दिल से दिल की राह बनती है । ए़हसास ए इक़र... Read more

अनंत यात्रा

‌ एक पथिक चला जा रहा निर्बाध अपने गंतव्य की ओर । ‌समय के थपेड़ों की मार सहते हुए क्लान्त चेहरा असमय झुर्रियों को वहन किए हुए । आशा... Read more

समझौता दिल से

टूटे दिल ने अब अरमानों के गुलशन बनाना छोड़ दिया । सच के आईने में झूठ को सँवारना छोड़ दिया । प्यार की रुस़वाई जब से हुई ज़माने ... Read more

टूटा हुआ द़िल

जब दिल ही टूट गया तो द़र्दे द़िल की आवाज निकलेगी कैसे ? प्यार का दामन छूट गया है तो इश्क की मंजिल मिलेगी कैसे ? अब भटकता है ... Read more

सच और झूठ

हम जो कुछ सुनते हैं और जो कुछ देखते हैं वह हमेशा सच नहीं होता ।क्योंकि आजकल झूठ को भी सच की तरह बनाकर पेश कर दिया जाता है। और तो औ... Read more

ग़ुमसुम़

अब वो चुप रहते हैं कुछ कहते नहीं। हम बोलते हैं तो भी वो सुनते नहीं। समझ ना पाऊं कल तक जो चहकते रहते। क्या है उनके ग़ुमसुम़ स... Read more

कौन है ?

कौन है जो भर रहा यह ज़हर लोगों के स़ीने में । कौन है जो डाल रहा यह ख़लल लोगों के जीने में । कौन है ये जो दोस्त को दोस्त से को ज़ु... Read more

प्यार

प्यार की इंतेहा नहीं होती । प्यार की ज़ुबाँ नहीं होती। प्यार तो एक ए़़हसास है । जो दिल से म़हसूस किया नज़रों से बयां किया जाता है... Read more

सफलता

इस भागती ज़िन्दगी मे किसी के पास वक्त नही है कि समझ सके जिस दिशा मे वह जा रहा है क्या यह वह दिशा है? जो उसके गन्त्वय तक पहुँचायेगी। ... Read more

नस़ीहत

ज़िन्दगी भर नफ़े नुक़सान का हिस़ाब रखा। जो लम़्हे गवाँ दिए उनका हिस़ाब ना रखा। अपनी खुशगवारी और खुदग़र्ज़ी में मश़गूल रहे दूसरों के दर... Read more

ज़मीर

ये क्या हो रहा है हैव़ानियत की इंत़ेहा हो गई है। इंसानिय़त सिस़क रही है। जिंदगी श़र्मसार होकर ख़ौफ से दुब़क कर रह गई है । ना ज... Read more

मतभेद

कभी-कभी हम छोटी छोटी बातें को इतनी अहमियत दे देते हैं कि हम बड़े बड़े मुद्दों को उन पर विचार करने से टाल देते हैं ।इसका नतीजा ये हो... Read more

बदलती दुनिया

मौसम बदलता है हाल़ात बदलते हैं। लोगों के अंदाज़ बदलते हैं । लोगों के अल्फ़ाज़ बदलते हैं । इस रंग बदलती दुनिया में लोगों के ईम़ान बद... Read more

वचन (बाल कथा)

पेड़ पर बैठी चिड़िया ने सोचा। मैं अपना एक घोंसला बनाऊंगी। जिसमें छोटे छोटे बच्चे रहेंगे और जिनको मैं दाना लाकर खिलाऊँगी। फिर वे जब ... Read more

मेरे अपने

हम अपने ही शहर में अजनबी से हो गये । जाने पहचाने से रिश्ते अब पराये से हो गये । अब तो बेखुदी का ये आलम है कि अपने से भी परेजाँ हो ... Read more

तू ही तू

तेरे नाम से मेरा नाम है , तेरे द़म से है मेरी ज़िंदगी। मैं जिधर चला तू ही हमसफ़र , है तेरी दुआ़ मेरी रोश़नी । तू मेरा हमनफ़स , ... Read more

हाल़ात

सोचता हूं कभी-कभी हाल़ात पर बहुत ज्यादा सोचने के बजाय अपने आपको एक बार उसके हवाले कर देना चाहिए । जब हाल़ात अपने काब़ू मे ना हो त... Read more

फ़र्क

सूऱत और सीऱत में क्या फर्क है ग़र हम पहचान पाते । न आते खूब़सूरत निग़ाहों के धोखे में ग़र उनकी नीयत हम जान पाते । ना खाते फरेब उनकी ... Read more

फ़ितऱत

पता नहीं क्यों लोग छोटी-छोटी बातों को तूल देकर बड़ा बना देते हैं । छोटी-छोटी गलतियों को बड़ा बनाकर प़ेश कर देते हैं । छोटी-छोटी गु... Read more

पान की गुमटी

शहर की गली के नुक्कड़ पर उस पान वाले की गुमटी थी । उस पर लोगों का जमावड़ा लगा रहता था । जिसमें विद्यार्थी, वकील ,पत्रकार , राजनीति ... Read more

प्रदूषण

‌ सुबह सुबह जब सैर को निकलता हूं ।तो देखता हूं कि चारों तरफ कोहरा सा छाया हुआ है।जहाँ खुली हवा होना चाहिए वहां पर अजीब सी घुटन महस... Read more

दोस्त

दोस्त तो वो होते हैं जिन्हें हम द़िलो जान से चाहते हैं। जिनकी की ख़ुशी में हम ख़ुश होते हैं। और जिनके ग़मज़दा होने पर हम उनका ग़म बाँट... Read more

चिंगारी

कहना तो चाहता था बहुत पर कुछ कह ना सका। शायद हालातों ने मेरी जुबां पर ताले लगा दिए। बड़ी शिद्दत से जिसे संभाला था मैंने जिसे वह सब ब... Read more

काला सच

तंग सुनसान गलियों मे जो कुछ होता है उससे हम अन्जान हैं। रात का अंधेरा छाते ही रोशन हो जाती है ये गलियांँ।और शुरू हो जाता है वह सब क... Read more

संस्कार

भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है भ्रष्ट आचरण । स्वस्थ आचरण अंतर्निहित संस्कारों से परिलक्षित होता है । संस्कारों की शुद्धता स्वस्थ... Read more

चैन

कहां-कहां नहीं खोजा तुमको । हस़ीन पहाड़ों की वादियों में । बागों की बहारों में । आलीशान जलसों में। दोस्तों की म़हफिल में। ऐश़... Read more

सुक़ून की तलाश़

कभी कभी ज़रा सी आह़ट से चौंक जाता हूँ। बार बार पीछे मुड़कर देखने लगता हूँ। जो छूट गये पीछे फिर याद आने लगते हैं। बीते लम्हों के बादल फ... Read more