Shyam Sundar Subramanian

Bangalore

Joined October 2019

An ex banker and financial consultant.Presently engaged as Director in Vanguard Business School at Bangalore. Hobbies includes writing in self blog shyam53blogspot.blogspot, singing ,and meeting people and travelling and exploring new places and cultures.
Email : shyamsundar1953@gmail.com

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ए़हद

ज़िंदगी कुछ बोझिल सी हो गई है , खुश़गवार चेहरों की खुशी गुम़ हो गई है , एक अजीब सा खौफ़ ज़ेहन पर तारी है , चारों तरफ माहौल में अजब... Read more

श्रृद्धा सुमन : महान कवयित्री , गद्य लेखिका डा.महादेवी वर्मा

छायावादी कवयित्री, गद्य लेखिका और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महादेवी वर्मा की आज यानी 11 सितंबर 2020 को 23वीं पुण्यतिथि है। महादेवी... Read more

फिल्मीनामा

शशि कपूर की मुस्कुराहट , नूतन की सादगी। दिलीप कुमार की बेहतरीन अदायगी संजीव कुमार की संजीदगी। राज कपूर की अदायगी का भोलापन। अशो... Read more

व्यक्तिगत स्वतंत्रता

जीवन भर हम संघर्षरत रहते हैं। अपने प्रिय जनों एवं परिवार के हितों की रक्षा करने के लिए इस संघर्ष में हम सब कुछ बलिदान कर देते हैं। स... Read more

ए मेरे दोस्त

मेरे अजीज जन्नतनश़ी दोस्त सुरेश को पेश - ख़िराजे अक़ीदत : मेरे दोस्त तू इस तरह जा नहीं सकता। बीते हुए लम्हों की यादें छोड़कर तू जा... Read more

ईमानदार चोर

मेरी मंझली बहन की शादी तय हो चुकी थी, 10 दिन बाद शादी थी। घर में बहुत गहमागहमी का माहौल था। दूर-दूर से रिश्तेदार आने लगे थे। उनकी ... Read more

महिला समानता दिवस 26 अगस्त

महिला समानता दिवस 26 अगस्त पर श्री पी के तिवारी द्वारा प्रस्तुत आलेख के संदर्भ में मेरे विचार : वर्तमान में महिलाओं की दशा पर प्... Read more

आधुनिक शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन

श्री राजेश व्यास अनुनय के लेख शीर्षक शिक्षा और आधुनिकता दिनांक 21 अगस्त पर विवेचना। comment box में स्थानाभाव के कारण अलग पोस्ट करन... Read more

पर्युषण एवं क्षमावाणी पर्व

जैन धर्म में दशलक्षण पर्व का बहुत महत्व है। इसे 'पर्युषण पर्व' भी कहा जाता है। इन 10 दिनों के दौरान प्रथम दिन उत्तम क्षमा, दूसरा दि... Read more

गणपति अभिनंदन

हे शिव सुत पार्वती नंदन गजानना। हे दुख भंजन विघ्न विनाशक गजवदना। हे हेरम्ब विद्यारंभ सिद्धिविनायक गजानना। हे परब्रह्मं सच्चिदानं... Read more

श्रृद्धा सुमन : महाकवि माखनलाल चतुर्वेदी

श्री माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में बाबई नामक स्थान पर दिनांक 4 अप्रेल 1889 को हुआ था।इनके पिता का नाम ... Read more

नन्ही कली

मेरे परिवार में नवजात शिशु आगमन पर काव्य प्रस्तुति : उस नन्ही कली का मन उपवन में आगमन। उसके कोमल स्पर्श से हृदय में अद्भुत स्पं... Read more

मातृ श्रृद्धा सुमन

मेरी पूजनीय माता की पुण्यतिथि पर मेरे द्वारा अर्पित काव्य श्रृद्धा सुमन प्रस्तुति : वो तेरे आंचल तले ममता की छांव। संघर्ष... Read more

आवारग़ी

जिंदगी भर सुकूँ ढूंढता रहा आवारा बनकर। कभी ढूंढा उसे तन्हाइयों में गुम हो कर कर। कभी ढूंढा उसे इश्क़ की गहराइयों में डूब कर। ... Read more

यादें

जिंदगी में कुछ यादें हमेशा बनी रहती हैं। हमारे साथ साथ चलती हैं दिल में बसी रहती हैं। कुछ खट्टे मीठे अनुभव तो कुछ हंसी खुशी भरे ... Read more

राम जन्मभूमि मंदिर : एक रक्तरंजित इतिहास

रामजन्मभूमि मंदिर के रक्त रंजित इतिहास पर एक संक्षिप्त नज़र “लखनऊ गजेटियर में अलेक्जेंडर कनिंघम ने उस नरसंहार के बारे में बात की... Read more

गौ माता की व्यथा

मैं उसे रोज अपने दरवाजे पर आते देखा करता। कातर दृष्टि से व्यक्त उसकी मूक याचना देखा करता। उसे कुछ बासी रोटियों से तृप्त आभार व्य... Read more

पुष्प की व्यथा

पुष्प हूँ काँटो में रहना पड़ता है। टूट कर मिट्टी में मिल जाना पड़ता है। मेरी सुगंध और सौंदर्य कुछ पल के हैं। मुरझाने पर मेरा स... Read more

प्यार

प्यार किया नहीं जाता हो जाता है। दिल दिया नहीं जाता खो जाता है। दिल से दिल का सौदा होता नहीं। मोहब्ब़त की कोई तिजारत नहीं। ... Read more

दोहे

समय बहुत बलवान है समय बहुत अमोल। मन का आपा खोय के बोल ना कड़वे बोल। जो सबको शीतल करें वो मीठी वाणी बोल। चढ़ सीढ़ी आप ना दूजा छ... Read more

जागृति

दुनिया देखने वाले क्या तुमने कभी खुद के अंदर झांक कर देखा है ? अपने अंदर धधकती दावानल सी क्रोध , द्वेष , क्लेश की अग्नि को कभी पह... Read more

कटु सत्य

ज़िंदगी कुछ थम सी गई है , दिन बोझिल लगता है, तो रात करवटें बदलते कटती है। वही म़ाहौल , वही चेहरे , वही रोज का ढर्रा , कुछ नयापन ... Read more

रिश्ते

रिश्ते बनते हैं बिगड़ते हैं। कुछ नए रिश्ते बनते हैं कुछ पुराने रिश्ते बिगड़ते हैं। कुछ सच्चे कुछ अच्छे रिश्ते बनते हैं। कुछ पक... Read more

व़जूद

मैं तो स़हरा -ए - सफ़र का स़राब हूं। स़फर में ग़ुम जो मिला नहीं, वो ग़ुमश़ुदा सी तलाश हूं। मैं गम़े जहाँ की किताब़ हूं , के स... Read more

ये ज़िंदगी

खुली आंखों से ख्व़ाब देखते रहे ज़िंदगी समझ ना पाए। बहुत हौसला था श़िद्दत से मंज़िल पाने का पर नस़ीब जगा ना पाए। बहुत हुऩर पाया था लि... Read more

श़ायरी का आग़ाज़

दिल में जब दर्द उठता है तो ए़़हसास उभर आते हैं। बनते हैं ज़ब्त़े ग़म जज़्बात बन जाते हैं। उबलते जज़्बात अल्फ़ाज़ बन जाते हैं। इज़हारे ... Read more

ज़माने की फ़ितरत

ज़ालिम ज़माने की फ़ितरत को मैंने जान लिया है। दर्दे दिल को जज्ब़ कर मुस्कुराना सीख लिया है। दिल के ज़ख्म़ अम़ानत है जब से मैंने जाना... Read more

क़ुदऱत का क़रिश्म़ा

तम़न्ना की थी ज़िंदगी हो गुलश़न- ए- बहार सी। पर मय़स्स़र हुई ज़िंदगी ख़िज़ाँ और ख़ार सी। आरज़ू थी ग़र सपने सच हो जाएं। अपनी जुस्त़ज... Read more

ये कैसी है मुश्किल

क्या करें ? या ना करें ? ये कैसी मुश्किल हाय ? कोई तो बता दे मुझको इसका हल ओ मेरे भाई ? एक तरफ तो कोरोना परेशान करें , दूसरी ओर... Read more

स़ब्र

ज़िंदगी के सफर में हम ख़रामां ख़रामां चलते गए। राह में कुछ ग़म मिले सहते गए कुछ खुशियां मिली बांटते गए। दोस्ती की कुछ वफ़ाऐं मिली... Read more

आत्महत्या का कारण अंग्रेजी

राजवीर शर्मा के पोस्ट आत्महत्या का कारण अंग्रेजी दिनांक 13 जुलाई 2020 पर प्रस्तुत प्रतिक्रिया : यह एक दुखद घटना है कि किसी व... Read more

आओ कुछ बातें करें

आओ कुछ पल गम़ को भूलकर मस़र्रत की कुछ बातें करें। चलो कुछ लम्ह़े माय़ूसे हिज्र भूलकर व़स्ल की कुछ बातें करें। कुछ पल रंजिशें भू... Read more

पशेमाँ

क्यों मैं अपने ही शहर गलियों में तन्हा सा होकर रह गया हूं ? क्यों मैं अपने ही शहर में अजनबी सा बनकर रह गया हूं ? क्यों मैं एक अ... Read more

कुत्सित मंतव्य

ये जो लोग देश के वीरों के शौर्य पर प्रश्न उठाते हैं। सुरक्षा रत सैनिकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा कर मातृभूमि का अपमान करते हैं।... Read more

यथार्थ

अंतर्मन में व्याप्त यह तिमिर कैसा है ? आशाएँ एवं अभिलाषाएँ मृत प्रायः हैं । हृदय स्पंदन हीन जड़ होता जा रहा है । वर्तमान स्व... Read more

श्रृद्धा सुमन

जीवन में एक वट वृक्ष भाँति जिस की छांव तले हम बड़े हुए। संकटों से सतत् जूझने हेतु धैर्य और साहस की प्रेरणा लेते हुए। अनुशासन , ... Read more

कभी-कभी

कभी-कभी छोटी-छोटी मुलाकातें है एक यादगार बन कर रह जाती हैं । कभी-कभी छोटी-छोटी गलतियाँ एक बड़ी परेशानी का सब़ब बन जातीं हैं । कभी... Read more

आत्महत्या : एक गंभीर चिंतन

आत्महत्या के कारण का पता लगाने के लिए गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। यह गहन अवसाद की एक ऐसी मनोदशा है जिसमें मनुष्य एकाकीपन से ग्रस... Read more

मंज़िल

अपनों से हारना क्या जीतना क्या हर हाल में सुकुँ हासिल नहीं होता। खुद से लड़कर खुदी को जब तक बुलंद नहीं करते कामयाबी का स़िला नहीं... Read more

दिल की आवाज़

दिल में जो उठती है आवाज़ उसे क्यों नहीं सुनते ? उभरते ए़हसास का आग़ाज़ जो है उसे क्यों नहीं म़हसूस करते ? क्यों न किसी मज़लूम के बहते... Read more

सीख

रामप्रसाद जी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हिंदी शिक्षक के रूप में कार्यरत थे । साथ ही साथ वे बढ़-चढ़कर सामाजिक कल्याण कार्यों में रु... Read more

क्षमा प्रार्थना

मन वितृष्णा से भर गया है जब सुना मानव इतना गिर गया है। एक निरीह मूक गर्भिणी माता की हत्या कर आनंदित हो गया है। वह यह भूल गया है... Read more

फ़ज़ीहत

उस रात मुझे घर के पिछवाड़े केले के पेड़ों के बीच एक साया नजर आया। कौन है ? आवाज देने पर वह छुपा साया बाहर निकल कर आया। मैंने पू... Read more

सार्थक जीवन

छोटी-छोटी बातों को नाहक बड़ा न करो। यह जीवन छोटा है उलझनों को बड़ा न करो। क्या तेरा क्या मेरा सब माया का है फेरा। जो भी इसमे... Read more

आव्हान

जागो नवयथार्थ नवजीवन में दूर करो व्याप्त द्वेष, क्लेश और अनाचार। नष्ट करो सर्वांग अहम् को त्याग स्वार्थ जागृत करो जनसमर्पित आचार ... Read more

मरीज़ -ए- इश़्क

उठती है इक लहर सी दिल में जब मैं थाम लेता हूं मय़ का प्याला। इश्क़ ने मुझे इस क़दर मारा डूबा मैं तो पीकर हाला। अश्क़ थमते नही त़र ... Read more

च़ंद इज़हार

जाने कब से ढूँढ रहा हूँ इंसान इन लोगों की भीड़ में , जो अब तक गुम़श़ुदा है। उसने मेरे दिल को सिर्फ दऱिया समझा , मेरे दिल में लह... Read more

गीता सार : श्रृद्धा एवं त्याग

समर्पित भाव को ही श्रृद्धा कहते हैं। श्रृद्धा की अवस्थाएं समर्पण भाव की तीव्रता पर निर्भर करती है। पूर्ण समर्पण भाव श्रृद्धा की पराक... Read more

गीता सार

प्रकृति अर्थात् क्या है ? प्र = विशेष और कृति = किया गया। स्वाभाविक की गई चीज़ नहीं। लेकिन विभाव में जाकर, विशेष रूप से की गई चीज़, वह... Read more

गीता सार

भय एक वर्तमान की परिस्थितियों से भविष्य में होने वाले प्रभाव के काल्पनिक निष्कर्ष की मनोदशा है। भय को जीतने के लिए सकारात्मक मनःस्... Read more