Shruti Rastogi

U. P.

Joined September 2017

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उलझे रिश्ते

शुरू करूँ किस कलम से, मैं लिखना अपनी गुस्ताखियाँ । अब तो इन्तजार करती रहती हैं , रक्षाबन्धन पर राखियाँ ।। सीधे-साधे भोले-भाले, ... Read more

सरकार

पढ़ा लिखा कभी बेकार जाता नहीं । फिर भी पढ़ लिख कर बेकार हूँ मैं ।। रोजगार हो कर भी खाली खाली हूँ । किससे कहूँ ! क्या बेरोजगार हूँ... Read more