Shobhit Ranjan

India

Joined November 2019

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शायरी

बढ़ कर तूफान के आग़ोश में दे दी ज़िन्दगी अपनी, अरे, मरने वाले तुझे कहां ज़ीने का हुनर आता था। Read more

लड़के भी घर छोड़ जाते हैं।

घर की सलामती को घर छोड़ जाते हैं, हम अक्सर पैसों के खातिर अपना शहर छोड़ जाते हैं। खुदा से यू बगावत करना अच्छी बात नहीं, चंद खुश... Read more

बताने लगा हूं मैं।

अब बाहर निकलने लगा हूं मैं, लोगो के दिए दर्द सहने लगा हूं मैं। हंसने की आदत एक ही बुरी थी मुझे, देखो हंसते - हंसते अब रोने लगा ... Read more

भारत जान हमारी है

भारत माता का बटवारा करने की क्यों तैयारी है, देश के गद्दारों से कह दो, ये भारत शान हमारी है, ये भारत जान हमारी। गुल और गुलशन फिर... Read more

वक़्त

समय से लड़ाई है अपनी, अक्सर उससे हार जाता हूं, फिर भी पता नहीं कैसे, मैं उसे हर दम अपने साथ पाता हूं। Read more

शायरी

वो जिसे देख के दूर जाया जाता है, ऐसा कोई सक्स मै बन जाऊ क्या, और, मैं मानता हूं कि वक़्त देना व ज़रूरी है प्यार में, वक़्त ना मि... Read more

शायरी

जो दुःख है उसे हराता रहता हूं, की खुशियों को हर दम हंसाता रहता हूं, ज़िंदगी एक पल की हो या एक उम्र की, बस उसी ज़िंदगी के पलों को ... Read more

मुक्तक

आईना धुंधला गया है, सिर्फ़ तेरी याद से, दिल मेरा बैठ गया है, सनम तेरे तकरार से, वक़्त मिल जाए कभी तो लौट आना तुम सनम, ये दीवाना... Read more

जीवन

जिसको मन अपना ना सके उसको भी अपनाना पड़ता है, जीवन की पटरी पर चलने की खातिर साथ निभाना पड़ता है। दर्द भरे हो जीवन में फिर भी, हर... Read more

टूटा दर्द।

तेरे आने से पहले तेरी आहट जान जाते थे, तू एक ऐसा सक्स था जिसके सारे बात हम मान जाते थे। खुदा ने क्या कारनामा दिखाया था मुझ पर, ए... Read more

हकीक़त

अच्छा। तुम्हारे सहर का दस्तूर बदल गए हैं, तभी, वो हमारे प्यारे हमसे दूर हो गए हैं। दूरियों ने दूर कर दी हम दोनों की सेकायते, आं... Read more

देश

कहां तो तय था घर हर एक सर के लिए, यहां तो घर मयस्सर नहीं बेघर के लिए। यहां गरीबों को नहीं रोटी-मकान मिलता है, यहां मयस्सर है रो... Read more

मैं जिसे गाता-गुनगुनाता हूं

मैं जिसे गाता-गुनगुनाता हूं, उस हसीना से आपको मिलाता हूं। कत्थई सी हैं आंखे उनकी , मैं अक्सर उसी में घुल सा जाता हूं। तू किस... Read more

रोए थे।

मिलने की चाहत में दिल खोल कर रोए थे, हम भी किसी के बदले लहजे को याद करके रोए थे। मिले उनसे जब भी गम छुपा लिया हमने, बैठकर तन्हा... Read more

मेरी सोच - मेरी ताकत

उदासी शाम है, आसमान कितना शांत बैठा है, दिल टूटा परिंदा शाम की पुल पर खामोश बैठा है। मैं अगर मर जाऊं, मुझे जलाना मत, मेरे अंदर ... Read more

ग़ज़ल

साथी कुछ पल साथ चलो तुम, कुछ दूर तलक तो चलना है, तुम तो अभी ही थक गए हो, मुझको तो नया इतिहास गड़ना है। जिंदगी मिली है दो पल की... Read more

ग़ज़ल

अगर यकी नहीं आता तो आजमाओ मुझे, अरे, सच में अंदर से टूट गया हूं, तू कहे तो बिखर कर दिखाऊं तुझे। अजब आग है दिन-रात जलती है लोगो... Read more

शायरी

सामने बैठो तो बातें ना किया करते हैं, दीवारों को तरफ मुंह मोड़ लिया करते हैं, और फिर अगर दूसरों से बातें करो तो, उस पर भी अक्सर ह... Read more

शायरी

नए किरदार में ढल गया हूं, बीती गलतियां नहीं दोहराऊंगा, और, जो कहते है तुम कुछ नहीं कर सकते, वक़्त आने पर उनको भी उनकी औकात दिखाऊंगा Read more

ज़िन्दगी।

खुद को ही कश्ती खुद को पतवार बना डाला, मैंने अपनी मां को ही अपना संसार बना डाला। दोसी होगा कोई और उसके कत्ल का, उसने खुद को ही ... Read more

ग़ज़ल

हसने के बहाने से ही रोएं आंखे, मगर आंसू पोछने को पास में एक रुमाल तो रक्खा जाए। घर के मंदिर में रक्खो भगवान की मूरत तुम, मगर दि... Read more

मां

दुश्मन घबरा गए हमरी कामयाबी पर, जो जाते हुए उन्हें मेरी हार दिख गई, और, मार दूंगा हर एक सक्श को मैं, अगर बेबस उसके होते हुए मुझे... Read more

सायरी

ये नया वक़्त, दौर बनने लगा, धूप छट्टे ही आसमां सोर करने लगा, और, हौंसला इन जीनों का तो देखिए जनाब, चंद पैसे आते ही अपने आकाओं को... Read more

शायरी

समंदर की गहराई से मोती धुंड लाओ, सायारो के शेर की गहराई धुंड लाओ, और क्या कहते रहते तुम मेरे बारे में आक्सर, जाओ बाज़ार वहां से ... Read more

मां

घर की वीरानी को, वो औरत दूर कर देगी, अरे, मां को घर तो ला, वो मका को घर कर देगी। Read more

मां

जिसकी ओढ़नी ओढ़ कर सोया करते थे, जिसकी जिंदगी के कारण हम जिया करते थे, प्यार क्या है उसने मुझे बताया, उस खुदा के फरिश्ते को हम मा... Read more

देश

प्यार करना है तो वतन से करो, सनम में क्या रक्खा है, अलग ही करना है तो अपने दुश्मनी को करो, कश्मीर में क्या रक्खा है, निकाल कर फै... Read more

शायरी

हर शाम परिंदों को चह-चहाते देखा है, मैंने लोगों को पैसे के लिए जान लुटाते देखा है, फिर कहां किसी को मोहब्बत की तस्वीर अच्छी लगी, ... Read more

मैं और तेरी सोच।

जूते फटे पहनकर ऊपर कभी चढ़े थे, जरूरते हमारी हरदम इच्छाओं से परे थे। काम लेने से पहले हमने दाम न पूछ पाया, सोच हमारी हर दम तुम्... Read more

ग़ज़ल

मैं हिंदू हूं मगर कुरान लिखता हूं, तुम लड़ते हो चलो, मैं तुम्हारे लड़ाई की दास्तान लिखता हूं, क्या फर्क है अपने अंदर उसे ढूंढो त... Read more

मां

प्यार, यार, वादे, इरादे सब छुट जाएंगे, और आसमान, सूरज, चांद, सितारों से क्या सिकायात करू, मेरे बाद तो मुझे मेरे अपने है भूल जाएंगे... Read more

मैं क्या चाहता हूं।

ना मैं हुस्न की अंजुमन चाहता हूं, ना मैं धन दौलत,ना दुल्हन चाहता हूं, ना मैं चांद जैसा बदन चाहता हूं, ना मैं रोशनी की समा चाहता ह... Read more