हिन्दी साहित्य के प्रति रुझान, अपने विचारो की अभिव्यक्ति आप सब को समर्पित करता हूँ| ‎स्नातकोत्तर की उपाधि मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान से प्राप्त की और वर्तमान समय मे सॉफ्टवेर इंजिनियर के पद पर मल्टी नॅशनल कंपनी मे कार्यरत हूँ||
दूरभाष क्रमांक:- 9158680098 ईमेल :- shivshrotriya91@gmail.com

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जब भी तुम्हारे पास आता हूँ मैं

जब भी तुम्हारे पास आता हूँ मैं कितना कुछ बदल जाता है सारी दुनिया एक बंद कमरे में सिमिट जाता है सारी संसार कितना छोटा हो जाता... Read more

जब से तुम गयी हो

जबसे तुम गये हो लगता है की जैसे हर कोई मुझसे रूठ गया है हर रात जो बिस्तर मेरा इंतेजार करता था, जो दिन भर की थकान को ऐसे पी जाता ... Read more

जिस रात उस गली में

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय रौशनी में खो गयी कुछ बात जिस गली में वो चाँद ढूढ़ने गया जिस रात उस गली में || आज झगड़ रहे है आपस में कुछ... Read more

आया था चाँद पानी पर

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय किसी ने उपमा दी इसे महबूबा के चेहरे की, किसी ने कहा ये रात का साथी है कभी बादल मे छिपकर लुका छिपी क... Read more

करो वंदना स्वीकार प्रभो

वासना से मुक्त हो मन, हो भक्ति का संचार प्रभो जग दलदल के बंधन टूटे हो भक्तिमय संसार प्रभो ॥ वाणासुर को त्रिभुवन सौपा ... Read more

बेटी है नभ में जब तक

बेटी तुम्हारे आँचल में जहां की खुशियां भर देती है तुम्हारी चार दीवारों को मुकम्मल घर कर देती है ॥ बेटी धरा पर खुदा की कुदरत ... Read more

अब बाग़बान नही आता

हम उस गुलशन के गुल बन गये जहाँ अब बाग़बान नही आता कुछ पत्ते हर रोज टूट कर, बिखर जाते है पर कोई अब समेटने नही आता ॥ क्योकि अब बा... Read more

बढ़ाए रखी है दाढ़ी..

चेहरा छिपाने, चेहरे पर लगाए रखी है दाढ़ी माशूका की याद मे कुछ बढ़ाए रखी है दाढ़ी|| दाढ़ी सफेद करके, कुछ खुद सफेद हो लिए कितने आ... Read more

तब होगा नव-वर्ष का अभिनंदन

कुछ बीत गया, कोई छूट गया कुछ नया मिला, कोई रूठ गया डोर समझ कर जिसे सम्हाला एक धागा था जो टूट गया|| मान जाए रूठे, जुड़ जाए टूटे... Read more

मैं मुस्कराने गया था, पर मुस्करा नही पाया

हर दिन की तरह कल सुबह, आकर उन चन्द परिंदो ने घेरा हलवाई की दुकान के बाहर सुबह से ही जैसे डाला था डेरा || कढ़ाई लगी, समोसे कचोड... Read more

तू मेरी नज़रों मे ना खुदा हो जाए

तू मेरी नज़रों मे ना खुदा हो जाए अच्छा होगा कि अब तू मुझसे जुदा हो जाए, इससे पहले कि कोई मुझसे खता हो जाए इसी तरह अगर नज़रों से न... Read more

मुझे गर्भ मे ही मार दो ||

देख मैं तेरे गर्भ मे आ गयी माँ, कितना सुंदर सा घर है ना सर्दी है ना गर्मी है ना ही दुनिया का डर है || माँ, एक कंपन सा महसूस हो... Read more

किसी और का हो जाऊ क्यों होने नहीं देता

वो चेहरा खुद के अलावा कहीं खोने नहीं देता किसी और का हो जाऊ क्यों होने नहीं देता || अजीब सी बेचैनी चेहरे पर रहती है आजकल तन्हाइ... Read more

आवारा कुत्ते ..

दफ़्तर से देर रात जब घर को जाता हूँ चन्द कदमो के फ़ासले मे खो जाता हूँ सुनसान सी राहे, ना कोई कदमो के निशा ट्यूब लाइट की रोशनी,... Read more

बस छू कर लौट आता हूँ

आसमान को छूने को लिया पतंगो का सहारा असहाय सा कहने लगता मैं खुद को बेचारा दरिया मे उतरने से आज तक डरता हूँ बस छू कर लौट आता हूँ ह... Read more

जब से बदल गया है नोट

एक रात समाचार है आया पाँच सौ हज़ार की बदली माया ५६ इंच का सीना बतलाकर जाने कितनो की मिटा दी छाया वो भी अंदर से सहमा सहमा पर बाह... Read more

ब्रह्म प्रकाश

सूर्य नही था, चंद्र नही था दुनिया मे कोई बंद नही था ना थी रोशनी ना था अंधेरा ना थी रात और ना ही सवेरा ना धरती थी ना था आकाश तब ... Read more

रेल से अजब निराली है

रेल से अजब निराली है इस काया की रेल - रेल से अजब निराली है| ज्ञान, धरम के पहिए लागे, कर्म का इंजन लगा है आंगे, पाप-पुण्य की दिशा... Read more

तुझे कबूल इस समय

परिस्थितियाँ नही है मेरी माकूल इस समय तू ही बता कैसे करूँ तुझे कबूल इस समय || इशारो मे बोलकर कुछ गुनहगार बन गये है लब्जो से कुछ... Read more

तो सच बताएगा कौन?

अगर दोनो रूठे रहे, तो फिर मनाएगा कौन? लब दोनो ने सिले, तो सच बताएगा कौन? तुम अपने ख़यालो मे, मै अपने ख़यालो मे यदि दोनो खोए रहे... Read more

देश का बुरा हाल है||

हर किसी की ज़ुबाँ पर बस यही सवाल है करने वाले कह रहे, देश का बुरा हाल है|| नेता जी की पार्टी मे फेका गया मटन पुलाव जनता की थाली... Read more

सरहद

सरहद, जो खुदा ने बनाई|| मछली की सरहद पानी का किनारा शेर की सरहद उस जंगल का छोर पतंग जी सरहद, उसकी डोर || हर किसी ने अपनी सरहद ... Read more

देने वाला देकर कुछ कहता कहाँ है||

हर पहर, हर घड़ी रहता है जागता बिना रुके बिना थके रहता है भागता कुछ नही रखना है इसे अपने पास सागर से, नदी से, तालाबो से माँगता दि... Read more

कहीं कुछ भी नही है

सब कुछ है धोखा कुछ कहीं नही है है हर कोई खोया ये मुझको यकीं है ना है आसमां ना ही कोई ज़मीं है दिखता है झूठ है हक़ीकत नही है|| ... Read more

अदालत मे खुदा होगा

जलाल उल्लाह जब रोजे कयामत पर खड़ा होगा ना जाने हम गुनहगारो का उस दम हाल क्या होगा|| करेंगे नॅफ्सी-नॅफ्सी और जितने भी है पेगेम्बर... Read more

एक तुच्छ बूँद सा जीवन दे दो

फसल खड़ी है खेतो मे उष्णता उन्हे जलाती है धधक रही है धरती भी पर बूँद नज़र नही आती है|| किनारे बैठ मै देख रहा बच्चे जो मेरे झु... Read more

एक दीप जलाया था मैने

तम के उस गहरे साये से अस्तित्व विहीन समाए से निशा के उद्वेलित आवेशो से अंतः मन मे घबराए से तेरी शरण मे आकर कुछ ऐसे बचाया था ... Read more

मुझे चलना है बस चलने दो

मै राह चला हूँ प्रीत मिलन की मुझे चलना है बस चलने दो || प्रीत लगी जब दिव्य ओज से उस ओज मे जाकर मिलना है मोह पतंगे को ज्वाला का... Read more

सफ़र आसान हो जाए

गुमनाम राहो पर एक नयी पहचान हो जाए चलो कुछ दूर साथ तो, सफ़र आसान हो जाए|| होड़ मची है मिटाने को इंसानियत के निशान रुक जाओ इससे ... Read more

रातभर तुम्हारे बारे मे लिखा मैने

उस रात नीद नही आ रही थी, कोशिश थी भुला के तेरी यादे बिस्तर को गले लगा सो जाऊ पर कम्बख़्त तू थी जो कहीं नही जा रही थी|| नीद की ख... Read more

मेरे साथ चलता नही

मंज़िल पर मिलने वाले बहुत है यहाँ क्यो कोई रास्तो पर नही मिलता धूप भी इतनी तेज है तेरे शहर मे, मेरा साया भी मेरे साथ चलता नही |... Read more

क्या है किस्मत?

किस्मत क्या है, आख़िर क्या है किस्मत? बचपन से एक सवाल मन मे है, जिसका जबाब ढूंड रहा हूँ| बचपन मे पास होना या फेल हो जाना या फिर ए... Read more

माना मै मर रहा हूँ

बेटो के बीच मे गिरे है रिश्‍तो के मायने कैसे कहूँ कि इस झगड़े की वजह मै नही हूँ | कुछ और दिन रुक कर बाट लेना ये ज़मीं माना मै म... Read more

कुछ आस नही लाते

हर मोड़ पर मिलते है यहाँ चाँद से चेहरे पहले की तरह क्यो दिल को नही भाते || बड़ी मुद्दतो बाद लौटे हो वतन तुम आज पर अपनो के लिए क... Read more

क्या सचमुच शहर छोड़ दिया

अपने शहर से दूर हूँ, पर कभी-२ जब घर वापस जाता हूँ तो बहाना बनाकर तेरी गली से गुज़रता हूँ मै रुक जाता हूँ उसी पुराने जर्जर खं... Read more

लाजबाब हो गयी

चाहने वालो के लिए एक ख्वाब हो गयी सब कहते है क़ि तू माहताब हो गयी जबाब तो तेरा पहले भी नही था पर सुना है क़ि अब और लाजबाब हो गयी|| Read more

तब तक समझो मे जिंदा हूँ

जब तक आँखो मे आँसू है तब तक समझो मे जिंदा हूँ|| धरती का सीना चीर यहाँ निकाल रहे है सामानो को मंदिर को ढाल बना अपनी छिपा रहे ह... Read more

प्यार नाम है

कवि:- शिवदत्त श्रोत्रिय प्यार नाम है बरसात मे एक साथ भीग जाने का प्यार नाम है धूप मे एक साथ सुखाने का || प्यार नाम है समुन्दर... Read more

अगर भगवान तुम हमको, कही लड़की बना देते

अगर भगवान तुम हमको, कही लड़की बना देते जहाँ वालों को हम अपने, इशारो पर नचा देते|| पहनते पाव मे सेंडल, लगाते आँख मे काजल बनाते र... Read more

फ़ौज़ी का खत प्रेमिका के नाम

कितनी शांत सफेद पड़ी चहु ओर बर्फ की है चादर जैसे कि स्वभाव तुम्हारा करता है अपनो का आदर|| जिस हिम-शृंखला पर बै... Read more

मैने तुम पर गीत लिखा है

एक नही सौ-२ है रिस्ते है रिस्तो की दुनियादारी, कौन है अपना कौन पराया जंजीरे लगती है सारी तोड़के दुनिया के सब बंधन तुमको अपना मी... Read more

मकान की यादे

मकान का बाहरी कमरा जहाँ दादा जी रहते थे| ना जाने सोते थे कब, बस जागते रहते थे पिताजी डाँटते थे जब भी मुझे दादा जी बचाते थे तुझसे... Read more

हम बनाएँगे अपना घर

हम बनाएँगे अपना घर होगा नया कोई रास्ता होगी नयी कोई डगर छोड़ अपनी राह तुम चली आना सीधी इधर|| मार्ग को ना खोजना ... Read more

क्यो कहते हो मुझे दूसरी औरत

कवि:- शिवदत्त श्रोत्रिय मै गुमनाम रही, कभी बदनाम रही मुझसे हमेशा रूठी रही शोहरत, तुम्हारी पहली पसंद थी मै फिर क्यो कहते हो मुझ... Read more

ऐसी मेरी एक बहना है

ऐसी मेरी एक बहना है नन्ही छोटी सी चुलबुल सी घर आँगन मे वो बुलबुल सी फूलो सी जिसकी मुस्कान है जिसके अस्तित्व से घर मे जान है उसक... Read more

तेरे शहर मे गुज़ारी थी मैने एक जिंदगी

तेरे शहर मे गुज़ारी थी मैने एक जिंदगी पर कैसे कह दूं हमारी थी एक जिंदगी || जमाने से जहाँ मेने कई जंग जीत ली वही मोहब्बत से हारी... Read more

मुझे मेरी सोच ने मारा

नही जख़्मो से हूँ घायल, मुझे मेरी सोच ने मारा || शिकायत है मुझे दिन से जो की हर रोज आता है अंधेरे मे जो था खोया उसको भी उठाता ... Read more

सहारा ना था

कवि:- शिवदत्त श्रोत्रिय वक़्त को क्यो फक़्त इतना गवारा ना था जिसको भी अपना समझा, हमारा ना था|| सोचा की तुम्हे देखकर आज ठहर जा... Read more

कहाँ आ गया हूँ ?

कल सुबह से घर पर बैठे-२ थक चुका था और मन भी खिन्न हो चुका था शुक्रवार और रविवार का अवकाश जो था, तो सोचा कि क्यो ना कही घूम के आया जा... Read more

जिंदगी के उस मोड़ पर

कवि:- शिवदत्त श्रोत्रिय जिंदगी के उस मोड़ पर(यह कविता एक प्रेमी और प्रेमिका के विचारो की अभिव्यक्ति करती है जो आज एक दूसरे से बुढ... Read more