Shivansh Mishra

Basti, Uttar Pradesh, India

Joined October 2018

सारा दिन मैं शब्द ढूंढ़ता, सांझ को लिखता, फिर सो जाता।

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वक़्त हो तो रंग बारिश का समझना

घास के छप्पर को सम्भाली, माटी की मोटी दीवारें, गीत झोपडी की वो गाती, बांस की हल्की पतली टाटी। वक़्त हो तो झाँक कर तुम देखना झरोखों ... Read more

ऐ ट्यूबलाइट

ऐ ट्यूबलाइट, जिस तरह शाम को कमरे पर पहुंचते ही स्वतः उंगलियां स्विच पर चली जाती हैं और तू ऐसे फट्ट से मुस्कुरा देती है जैसे सिर्फ... Read more

शिकारी

तड़फड़ाती छटपटाती जल बिना है वो बेचारी, किन्तु उसकी प्यास को समझे कभी ना ये शिकारी। उसकी चंचल चाल ऐसी सागर कभी स्थिर ना रहता, जल ... Read more

कलम हमारी

कौन सुने अब व्यथा हमारी, आज अकेली कलम हमारी, जो थी कभी पहचान हमारी, आज अकेली कलम हमारी। हाथों के स्पर्श मात्र से, पढ़ लेती थी हृ... Read more