shivank

Joined August 2018

Copy link to share

आधुनिकता

सुबह से शाम तक यूँ ही चले जा रहे हैं निरुद्देश्य निश्चिंत ऐसा नही है कि उद्देश्य न हो यहाँ तो उद्देश्य है फिर भी निरुद्देश्य ह... Read more