Shivalik Awasthi

Joined November 2018

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ऋतु वसन्त जो आई

फिर ली करवट मौसम ने यूँ, गूँज उठा जग सारा है । दस्तक दी ऐसी मनमोहक, वाह क्या ख़ूब नज़ारा है ।। बीते कुछ दिन पिछले मानो, छिपे कहीं हम... Read more

एकता का पर्व लोहड़ी।

आ, गई जी लोहड़ी फिर से, जश्न को सब तैयार हैं । नए वर्ष के प्रथम पर्व से, भरे हुए बाज़ार हैं ।। चौतरफ़ा है रंगत बिखरी, चहक उठा परिवेश ... Read more

*एक कविता "माँ" को समर्पित*

जग में था जब जन्म लिया तब खूब मुझे सहलाया था । जीवन का कुछ पता नहीं उस आँचल में सुख पाया था ।। पहली दफा जब उसे पुकारा माँ ही माँ म... Read more