मैं, आचार्य शीलक राम, । मेरी अब तक धर्म, दर्शन, संस्कृति, योग, लोकसाहित्य, काव्य संग्रह आदि पर पैंतीस से ज्यादा किताबें छप चुकी हैं । इसके अलावा मैं ग्यारह International Research Journals का संपादक भी हूं। वर्तमान में दर्शन विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में तैनात हूँ। संपर्क -9813013065, 8901013065
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‘ढाई आखर’ की भूल-भुलैया

दैहिक प्रेम करना जरूर, परंतु रखना साक्षीभाव। बेहोशी में यदि किया इसे, निश्चित डूबेगी नाव।।1 प्रेयसी का प्रेम अमर है, मत रखना सुनो ... Read more

प्यार- व्यार झूठी बातें हैं..

प्यार- व्यार झूठी बातें हैं खेल है बस स्वार्थ का सारा! दिया प्रेम मिली है बस घृणा सब जीते यहां मैं बस हारा !! स्वार्थ की सारी ... Read more

मन की व्यथा!!!!

मन चाहा तब रो लिए! प्रेम मिला उसी के हो लिए!! अपने सम माना अन्य! इसी से हम हो गए धन्य!! पाप इसी से सारे धो लिए!! प्रेम... Read more

भारत की सिंहगर्जना

इस युग के प्रसिद्ध रहस्यदर्शी, योगी, दार्शनिक एवं चिन्तक ओशो रजनीश ने बेबाकी से यह घोषणा की है कि सभी आत्त्मकथाएं अहंकार की घोषनाएं ... Read more

चिन्तन

चिन्तन करो अवश्य, चिन्तन सन्तुष्टि होय ।। चिन्तन से पथ प्रशस्त हो, सुख की निद्रा सोय ।। चिन्तन जरूरी जीवन में, चिन्तन समस्या समाधा... Read more