Shikkha Sharrma

Hamirpur (Himachal Pradesh)

Joined November 2018

खामोशियों को चिल्लाने दो, शब्दों में उतर जाने दो……

-UNSPOKEN THOUGHTS
-SHIKKHA SHARRMA

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नारी तू नारायणी तू

नारी तू नारायणी तू धरा दुःख धारिणी तू जननी तू जनपालक तू योग्य कष्ट निवारक तू अबला तू सबला तू लक्ष्मीरूप गृहशोभा गृहणी तू काली ... Read more

दूरियां

दूरियों में भी नज़दीकियां होती हैं प्यार की बारीकियां होती हैं जो सामने न कह पाते कभी अक्सर बयां कर जाती हैं दूरियां दूरियों मे... Read more

जनवरी फिर जवां हुई

बूढ़ा दिसम्बर जवां जनवरी के कदमों मे बिछ रहा है लो, इक्कीसवीं सदी को उन्नीसवाँ साल लग रहा है अठारह पूरे कर अंगड़ाई लेकर ऐसे मचल रह... Read more

तुम्हारे नाम

लिख रही हूं एक और कविता तुम्हारे नाम शाम की स्याही से दिल की गहराई से, एक मीठी याद अपनी, बीते पल की जुदाई से। खुल रहे है द... Read more

मैं रात अकेली

विषाद पड़ी रात सुनसान काली गहरी घनी काली अकेली दिन की रौनक से बस ! कुछ पहर दूर ख़ामोशी और तन्हाई से लिपटी सन्नाटे में... Read more

माँ

धुंए की तरह उड़ा दे सारी परेशानियां "माँ" की इस कदर बरसती है मेहरबानियां बार-बार निहारने के बाद खुद पर वहम करे माँ" काला टीका ल... Read more