Mugdha shiddharth

Bhilai

Joined October 2018

House Wife

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मुक्तक

कुछ स्याह से दिख रहे हो तुम... कुछ बदला है क्या ? तुम तो लड़ाकों के पहचान हो... तुम्हें याद दिलाना पड़ेगा क्या ? अपने लाल पंखों को... Read more

मुक्तक !

56 इंच का सीना लेकर कह रहे खुद को चौकीदार हम ने देखा है भईया देश को लूटते इनको ही बार-बार कैसा अजब-गज़ब माया है, चोर कहे खुद को ... Read more

मुक्तक

तुम्हें अपनी आना को सरे बाम सहलाना था बस इस लिए अहले बतन को बेच आना था। हिन्दू - मुस्लिम जो कभी थे भाई- भाई उनके हाथों में ... Read more

माँ है वो मेरी !

कौन है वो जो, मेरे 'ऐब' को भी आंचल समोता है 'खूबियों' को भी मेरे, अपने दामन में संजोता है। देखने वालों ने बस अपनी आँखों की पुत... Read more

मुक्तक !

बस दो टका दे के, सौ टका का ईमान खरीदने आई है हमारी सरकार हमें हाशिये पे धकेलने कि क़वायद लाई है। हम जिन्दा लाशों के ढेरो से खू... Read more

मुक्तक !

तेर-मेरे दिल कि बात, जो आज आग बन आई है हर एक लब पे गर सुर सा सज जाए तो वही अच्छा। / भँवर से क्या डरें हम जिंदगी लहरों पे ही गु... Read more

मुक्तक !

इस चुनावी मौसम में कुछ अलग कर के देख राम-रहीम नहीं, अपनी जेब को टटोल के देख तू दूसरों के फ़र्जी वादों को चुप-चाप न सुन अपनी ... Read more

मुक्तक

कुछ लोग उसे फकीर समझते हैं हम तो भईया हुआ गिरा ज़मीर समझते हैं। देश को जो बेच दे, बाँट दे और तोड़ दे उसे,वाहियात-नकारा सरकार समझ... Read more

मुक्तक

वो मुझे लफ़्ज़ों से अपने लबरेज़ कर गया आखों से छलका ऐसे मुझे मोती कर गया... / जिन्हें वस्ल-ए-यार कि हवस हो ख़्वाबों से करते कहा... Read more

मुक्तक !

वो बदन ही नहीं तू ध्यान से देख तू बदन के आगे भी कुछ और देख के देख लड़कियां हर दौर में बेहतरीन होती हैं ढलेंगी हर सांचे में एक ... Read more

मुक्तक !

मेरा बचपन मेरे दामन को छोड़ती ही नही जब भी छुड़ाती हूँ और जोर से लिपट जाती है ! ** हमें अपने घऱ-आंगन गए जमाने हो गए माँ के हाँ... Read more

मुक्तक !

आज की औरत हूँ, आज़ाद होना है उड़ती हवा हूँ माहताब होना है। हवाओं के पर पे सबार होना है, उड़ने-खुलने के लिए तैयार होना है। ते... Read more

मुक्तक !

खुले पिंजड़े में बैठी चिड़िया से कोई पूछो पर होने पे भी परवाज़ क्यूँ नहीं करती। घर की देहरी पे बैठी औरत से भी पूछो आंगन से ख़ुद ... Read more

मुक्तक !

दुख इसका नही कि वो शांति की बात नही करते हैं हम परेशां हैं कि वो इंसानियत भुलाने की बात करते हैं। हथियारों के व्यपारी हैं जो, शा... Read more

मुक्तक !

आज तुम्हारी हर कही बात झूठ ही लगती है हमें एक वो भी दिन थे तुझ पे एतबार कर लिया था। चापलूसी देख के गलतियां हो ही जाया करती हैं... Read more

मुक्तक

मेरे दिल को सुकून क्यों नहीं कुछ टुटा है क्या ? मेरे दिल के पिंजर में दो नाम चीख़ कि तरह आया है चित्रकूट की गलियों से ! ।।... Read more

मुक्तक !

"तीर तलवार कि जरूरत नहीं मुझे, तुम्हें हो तो सँभाल लो, मुल्क़ मुहाने पे है धर्मयुद्ध के, हम कलम से काम चलालेंगे !" *** 07-02-20... Read more

मुक्तक

खैरात नहीं हमें हमारा हक़ का तो दीजिए जो हमारे हक का है बस उतना ही दे दीजिए चंद सिक्के उछाल के मातमपुर्सी कर रहें हैं आप हमार... Read more

मुक्तक

जब कभी इस दौर का इतिहास लिखा जायगा बग़लगीर नीरो का ही तुझको समझा जाएगा, जल रहा था देश मेरा धर्म के उन्वान पर, तू बैठ मजे में जु... Read more