Mugdha shiddharth

Bhilai

Joined October 2018

House Wife

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दोष बिच्छू का नहीं...

दोष बिच्छू का नहीं... की उस ने हमें काटा, 'जहर' हमारे शरीर में फैलाया, काटना और ज़हर फैलाना धर्म है उसका ... वो अपने धर्म पे... Read more

गांव !

कहीं एक गांव था मेरा वो गांव मुझ से छूट गया, आम,सखुआ, महुआ का छांव मुझ से छूट गया। एक शहर मिला था बदले में, गलियां,सड़कें,... Read more

कालाहांडी, भूख और गरीबी !

ओडिशा: इस चुनावी समय में भी कुछ लोग अपनी जिंदगी कि जरूरी जरूरतों को लेकर आवाज़ बुलंद करने में पीछे नहीं हट रहे ,क्या कर सकते हैं, आश्... Read more

वो जो मेरठ दो सौ घर जल गए पता तो करो लाख के थे क्या ?

कई साल हुए इस बात को पर भूल नही पाती। एक बार कापड़ा धोने के दरमियान कपड़े के साथ सै का नोट भी धुल गया था मुझ से,जिसे इस्त्री (प्रेस)... Read more

मुक्तक !

टेढ़े-मेढे रास्ते मैंने अपने वास्ते खुद ही चुन लिए बेबसों की आवाज़ जो अचानक ही मैंने सुन लिए ! *** बीरान कमरे से कोई आवाज़ सी आती ह... Read more

मुजरिम !

जब भी इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा एक-एक कर के हम सब को शामिल किया जाएगा। हथियार उठाने वाला हाँथ उनका सही, देखने वाले हम भी थे ... Read more

जकिया जाफरी एक मज़लूमा !

सियासत भी अलग-अलग दौर में अलग-अलग रंग दिखती है कभी गो हत्या को नाजायज़ कभी नर हत्या को जायज़ बताती है ! ---------------------------... Read more

मुक्तक !

वो बदन ही नहीं तू ध्यान से देख तू बदन के आगे भी कुछ और देख के देख लड़कियां हर दौर में बेहतरीन होती हैं ढलेंगी हर सांचे में एक ... Read more

मुक्तक !

मेरा बचपन मेरे दामन को छोड़ती ही नही जब भी छुड़ाती हूँ और जोर से लिपट जाती है ! ** हमें अपने घऱ-आंगन गए जमाने हो गए माँ के हाँ... Read more

मुझे सिर्फ मैं होना है !

तुम्हें राम होना है ? रोका किस ने है ? हो जाओ, हमें सीता नहीं होना है। आग में तप कर भी, जंगल का कोना नहीं होना है । दो भगव... Read more

मुक्तक !

आज की औरत हूँ, आज़ाद होना है उड़ती हवा हूँ माहताब होना है। हवाओं के पर पे सबार होना है, उड़ने-खुलने के लिए तैयार होना है। ते... Read more

मुक्तक !

तुम मुझे इतनी हैरत से न देखो, मत सोचो कि औरत हूँ, इतनी आग कहाँ से लाती हूँ ? कि चुप्पी टूटी तो सैलाब आएगा, देखना एक नया इंकलाब ... Read more

मुक्तक !

खुले पिंजड़े में बैठी चिड़िया से कोई पूछो पर होने पे भी परवाज़ क्यूँ नहीं करती। घर की देहरी पे बैठी औरत से भी पूछो आंगन से ख़ुद ... Read more

वो लड़की !

वो लड़की वो जो गई थी सौदा करने हाट में, गीत गाते बाट में, जो हाट से लौटी नहीं निगल लिया जिसे हाट ने, मैं ही तो रही होउंगी या... Read more

आईए-आईए आप हमारे साथ आ जाइए !

आइए-आइए अब की आप हमारे साथ आइए अपने हक के लिए मिल कर आवाज़ तो लगाइए, उस तरफ़ नही, ज़रा इस तरफ़ तो आइए, मेरे साथ मिल कर सरकार की ... Read more

लेख

एक उम्मीद थी अब वो भी टूटी समझो उसकी हर बात को तुम झूठी ही समझो ! --------------------------------------------- चारों तरफ़ मिडिय... Read more

मुक्तक !

दुख इसका नही कि वो शांति की बात नही करते हैं हम परेशां हैं कि वो इंसानियत भुलाने की बात करते हैं। हथियारों के व्यपारी हैं जो, शा... Read more

मुक्तक !

आज तुम्हारी हर कही बात झूठ ही लगती है हमें एक वो भी दिन थे तुझ पे एतबार कर लिया था। चापलूसी देख के गलतियां हो ही जाया करती हैं... Read more

मेरा भईया !

सोन चिरैया तुम मेरी मैं तेरा भईया रहना हमेशा खुश तुम मेरी परछाइयाँ। जब भी लगे तुम्हें तुम हो उदास बहना एक आवाज़ लगा के कहना मेर... Read more

हम ने उमीद ही ग़लत जगह लगाई है।

बदले हुए सरकार तेरे तेवर फिर आज नज़र आई है। सियासत के रंगीन चौखट पर देखो फिर एक बार आवाज़ हमारी दबी-कुचली हुई सी ही नज़र आई है। श... Read more

इंकलाब का परचम थामे वो आज़ाद हमारा है।

गले जनेऊ, मूछों पे हांथ कमर में पिस्टल रहता था, देश भक्ति ही जिसके- नस-नस में लहू बन बहता था, वो आज़ाद हमारा था-वो आज़ाद हमारा है।... Read more

मुक्तक

मेरे शब्द वो चीख़ है जो हर जख्म पे निकल आती है तू वो हाकिम है जिसके सीने में धडकता दिल ही नहीं। मौत नंगी नाचती रही हर दिन घर -आं... Read more

उमीद ही ग़लत जगह लगाई है।

होठों पे तेरे फिर वही पहले सी मुस्कान उभर आई है बदले हुए सरकार तेरे तेवर फिर आज नज़र आई है। सियासत के रंगीन चौखट पर देखो फिर एक ... Read more

मुक्तक

हम मुतमइन हो नहीं सकते इस दौरे सियासत में ख़िलाफ़त के लिए बोलना अभी बेहद जरूरी है ! उन्माद बेचने वालों की बड़ी-भीड़ लगी है प्यारे उ... Read more

मुक्तक

मेरे दिल को सुकून क्यों नहीं कुछ टुटा है क्या ? मेरे दिल के पिंजर में दो नाम चीख़ कि तरह आया है चित्रकूट की गलियों से ! ।।... Read more

अपने ही मन के अंदर से !

कुछ रोज टूट जाती हूँ मैं,'अंदर' से तुम देखते हो मुझे बाहर से, मैं बिखरती-सिसकती-सुबकती हूँ मन के अंदर से। एक पालना टूट के बि... Read more

सुक्की हूँ मैं !

सुक्की हूँ मैं, मेरे पसलियों में फसी है एक गोली जबानों के बंदूकों की नाल से निकली बारूद भरी गर्म लोहे कि गोली, मरी नहीं हूँ म... Read more

मुक्तक

"मुझे मेरे पुरखों ने हक दिया है, जुवा पे अपने आग रख लो तुम्हें सत्ता ने हक दिया है,लहू लगे हाथों को बेदाग़ कर लो !" *** 07-02-... Read more

मुक्तक !

"तीर तलवार कि जरूरत नहीं मुझे, तुम्हें हो तो सँभाल लो, मुल्क़ मुहाने पे है धर्मयुद्ध के, हम कलम से काम चलालेंगे !" *** 07-02-20... Read more

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद !

"ईमान बेच कर जो सियासी मंडी में, सत्ताधीशों को माई-बाप लिखते हैं खबरों की उस मंडी को, इस कलिकाल का अभिशाप हम कहते हैं !" भीम ... Read more

मुक्तक

खैरात नहीं हमें हमारा हक़ का तो दीजिए जो हमारे हक का है बस उतना ही दे दीजिए चंद सिक्के उछाल के मातमपुर्सी कर रहें हैं आप हमार... Read more

गिद्ध हैं सारे के सारे !

ये जो बंगाल में हो रहा है, क्या वो हमारे मतलब का है ? है ही लोकतंत्र पर ये बड़ा सबाल है। और हम इस लोकतंत्र के अहम हिस्स्से। तो मतलब... Read more

मुक्तक

जब कभी इस दौर का इतिहास लिखा जायगा बग़लगीर नीरो का ही तुझको समझा जाएगा, जल रहा था देश मेरा धर्म के उन्वान पर, तू बैठ मजे में जु... Read more

मुक्तक

माँ :आप से फूल, खुशबु,तारे, सितारे कि बातें कौन करे, आप दिल में रहतीं हैं, आप से दिलगी कि बातें कौन करे। बस खुश रहा कीजिए, हमें भ... Read more

हमारे प्रधान सेवक !

हमारे प्रधान सेवक ठान कर बैठे हैं कि झूठ का सर झुकने नहीं देंगे। गज़ब-गज़ब झूठ बोलते हैं भाई बड़े से बड़ा झूठा पानी मांगे उनके आगे। अब क... Read more

औरत हूँ !

औरत हूँ कभी आग तो कभी पानी हूँ कभी नीमगोली तो कभी गुड़धानी हूँ छू लिया जो किसी ने आन मेरी कभी लक्ष्मी बाई तो कभी रज़िया सुल्त... Read more

आओ लेनिन इस बार हमारे घर आंगन में आओ !

लेनिन तुम्हारे मृत्यु दिवस पर, तुम से ही, तुम्हारा ही, उपहार मांगती हूँ, कि आओ हमारे घर आंगन दरवाज़े दलान में और फूंक दो क्रां... Read more

और हम चुप रह गए मिडिया की छुपाई में !

इंसान और चूहे के बीच का अंतर खत्म हुआ। चूहे को भी चुहेदानी में फंसा देख हम तड़पते नहीं, और कोयला खान में फंसे मजदूरों को देख कर ... Read more

एक चुटकी नून ढूंढ रही हूँ

एक चुटकी नून(नमक) ढूंढ रही हूँ, अपने जख्मों पे रगड़ने को ताकि सारी रात हाय-हाय करती रहूं, सिसकती, सुबकती रहूं, भोर होने तक, त... Read more

आशा है आएगा इंकलाब का काल !

समानता की राह में, एकता की बाँह में देखो तो गौर से, बिछ गए हैं काटों का जाल। नागों ने कर लिया है आपस में मंत्रणा, फूलों और कल... Read more

हम लड़ेंगे जरूर, अपने जख्मों के लिए !

जाड़े के दिनों में, अंगीठी जला के बैठना, या गुनगुने धुप में खुद को सेकना अच्छा लगता है न ? लेकिन सरकार जिस अंगीठी पे हमें बै... Read more

मेरे शब्दों की बेनी पे !

क्या नया हो जाएगा नए साल में ? जो खुश होजाऊं, इतराऊं, जश्न मनाऊं । क्या गिद्धों के चोंच गिर पड़ेंगे भेड़ियों के रक्तपिपासु दांत... Read more

मालिक कौन

शेर, कुत्ता ,गीदर सब की लोग उपमा देते हैं बिल्ली को क्यूँ भूल जातें हैं ? क्यूंकि बिल्ली उनकनी परछाई है क्यूंकि पालतें है... Read more

तो आओ घसीटो हमें !

रोज - रोज थोड़ा - थोड़ा मारने में क्या मज़ा है ? मैं तो बोलती हूँ उठाओ अपना हाथ, ले जाओ हमारे बालों तक और घसीटो हमें, राज महल से... Read more

संजलि अब तुम डरना !

संजलि अब तुम डरना, हमारे बदले, हमारे देश में, देश हित में नया कानून पारित हुआ है। डरना मना है, डर नहीं सकते कुछ भी हो जाए,... Read more

प्यारी संजलि !

प्यारी संजलि तुम मर गई, तुम मुक्त हो गई, हम लोग भी मर चुके हैं, आधे - आधे पर मुक्त नहीं हुए तुम्हें पहले जलाया गया,फिर मारा ... Read more

अब उन्हें डरना होगा !

खोने और पाने का भय, हम ही क्यों पाले, क्यों हर वक्त हम ही इस डर में जीये, कि हमारा सब छिन जायेगा, वो जो हमारे ऊपर बैठे हैं, जिन... Read more

मुट्ठी बनो या मुट्ठी में रहो !

पीड़ा जब मन में लबालब भर जाता है, वो शब्द हो जाता है, कोरे कागज़ पे,यूँ ही छलक जाता है, अक्षरों से शब्द, शब्द से कविता हो जाता है ।... Read more

विद्रोही अभी ज़िंदा हैं !

विद्रोही मरे नहीं, विद्रोही मरा नहीं करते वो ज़िंदा हैं, जब तक शोषण ज़िंदा है जब तक शोषण के खिलाफ उठने बाली आवाज ज़िंदा जब तक ... Read more

गेरुआ रंग

मैं कई बार उठती हूँ फिर बैठ जाती हूँ, अपने मन के दरवाजे पे सहमी सी खड़ी रह जाती हूँ देख के धीरे- धीरे उडते गेरुआ रंग को मेर... Read more