Mugdha shiddharth

Bhilai

Joined October 2018

मुझे लिखना और पढ़ना बेहद पसंद है ; तो
क्यूँ न कुछ अलग किया जाय…
लड़ने के लिए तलवार नही
कलम को हथियार किया जाय
थूक से इतिहास नही लिखा जाता
बिका हुआ कलम क्रांति गीत नही गाता
इस लिए, इश्क़ को तौफीक़ तो
इंकलाब को तौफीक़ ए दहक कहा जाय
कभी इश्क़ पे रक्स तो, कभी…
इकलाब को कलम बंद किया जाय
इस दहर में इश्क और इंकलाब पर मचला जाय।
…मुग्द्धा सिद्धार्थ
rshiddharthbhilai@gmail.com

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स्त्रियों का स्त्रियों से घृणा

मेरी प्यारी बेटी ' ओशी ' दुनियां को खूबसूरत ही होना था प्रेम प्यार से लबा लब भरे होना था नानी दादी की परिकथा सा ही रहना था मग... Read more

मुक्तक

१. मेरे उलझे हुए ख्वाबों की ताबीर में वो बस सगा सा दिखे अपनी ताबीर में वो ~ सिद्धार्थ २. बीते जून का झगड़ा था, मन से मन का रगड... Read more

मुक्तक

१. कुछ कुछ अपने कुछ पराये लगते हो तुम मुझे जिंदगी के सताये लगते हो ! ...सिद्धार्थ २. ये सूरज जल रहा है, या हम तुम जल रहे हैं ... Read more

मुक्तक

१. नजर से दूर दिल से भी दूर जाओग क्या ? हमें अपने ख्याल से निकाल पाओगे क्या ? ~ सिद्धार्थ २. एक कहानी से कई और कहानी निकल आते... Read more

ओशी

मेरी प्यारी बेटी ओशी (Oshi ) बहुत -बहुत प्यार। आज तुम्हारा जन्म दिन है, खुश हूँ मैं बहुत खुश, तुम्हारे पास होती तो गले लग... Read more

मुक्तक

1. सूरज ससुराल जा रहा है... रात के दामन में मुँह छिपा के रोयेगा सुबह सबेरे मैके आके अपना ओज बिखेरेगा ...सिद्धार्थ 2. दम है अ... Read more

भाग के आग में बेटी

ये है देश मै औरतों कि इस्थिति, मगर आधी अधूरी। ज्यादा मामले तो संज्ञान में आते ही नहीं और लोग संसद मै बैठ बकैती करने में, और हैदराब... Read more

राष्ट्रहित

कबूतर उतरे नहीं उतारे गए है दाना डाल कर ललचाए गए हैं अब शिकारियों का तांता लगेगा पाव पाव मांस राष्ट्रहित में बटेगा फिर डकार के स... Read more

लेख

#हाउड़ी मोदी का #नारा कस के #बुलन्द करने वाले देश ने कस के तमाचा जरा है भक्तों के गाल पे । लेकिन भक्त तो ठहरे भक्त उसे भी चुम्मा ... Read more

लेख

#हाउड़ी मोदी का #नारा कस के #बुलन्द करने वाले देश ने कस के तमाचा जरा है भक्तों के गाल पे । लेकिन भक्त तो ठहरे भक्त उसे भी चुम्मा ... Read more

मुक्तक

1. बेटियों को नंगा कर के गाय को कोट पहनाएंगे साहिब-ए- मुल्क जाने और क्या क्या दिखलायेंगे ! ~ सिद्धार्थ 2. ऐ दोस्त इस दहर में खु... Read more

हम ने तेरी चाहत में खुद को सजा के रखा है

हम ने तेरी चाहत में खुद को सजा के रखा है झुमके-बाली, कंगना बिंदिया लगा के रखा है आओगे उम्मीद नहीं है फिर भी आश लगा के रखा है ... Read more

मुक्तक

१. कहां- कहां खोजूं मैं खुद को मुझ में तो तुम अंदर तक बैठे हो ~ सिद्धार्थ २. हमने हिसाब रखा ही नहीं तुम कितनी बार आकर जाते हो... Read more

लेख

सारा माथा पच्ची छोड़ कर, साहेब से कोई पूछे युवा देश के युवाओं को पढ़ना चाहिए या दलाली, भड़वागिरी ही करना चाहिए ? अगर यही करना है ... Read more

मैं अभागी भारत हूँ

मैं भारत हूँ, अब जर्जर और संतप्त हुई हूँ अब तक गैरों ने ही लूटा था अब अपनों के हांथो ही अभिशप्त हुई हूँ डलहौजी तो ग़ैर था फिर... Read more

मुक्तक

१. तबाही हमारी लेकर आये हो पर तुम अपनी मान से गए आग हमने भी फेंका है क्या हुआ जो हम भी जान से गए। ~ सिद्धार्थ २. तबाही हमारी ले... Read more

कोई नहीं ... आओ, साथ में मेरे

कोई नहीं... आओ, साथ में मेरे ले चलूं तुझे मैं... सच से रूबरु कराने... बर्दास्त न कर पाओ तो छोड़ जाना साथ मेरा... बढ़ कर धर लेना ... Read more

लेख

रेप, बलात्कार का जिस पे आरोप न हो, इस कलिकाल में वो साधु सन्यासी नहीं... ये करामात हमारे ही देश में हो सकता है, कहीं और मुमकिन ही न... Read more

मुक्तक

१. हम आएंगे ... किसी दिन तुम से मिलने फिर पूछेंगे क्या तुम्हें भी तंग किया है दिल ने ...पुर्दिल २. कैसे कहूं तेरे हिज्र का बा... Read more

मुक्ता

१. तू कोई ख़्वाहिश करे और पूरी न हो 'अल्लाह' की ऐसी कोई मजबूरी न हो ! ... पुर्दिल २. नींद से अलसाई आंखों को मालूम है नींद ... Read more

मुक्तक

हम सोते रहे आरामदेह बिस्तरों पे नींद के बगैर वो सो गया माटी पे यूं ही कागजी शब्दों को ओढ़। ... सिद्धार्थ २. फलक के दामन में देख ... Read more

ये अहले बतन ' वादा ' सर तेरा झुकने न देंगे

अपनी अंगुलियों को बना कर कलम आंखों को अपने रक्तिम कर रखा है । इस दविस के दौर में भी हमने खुद को इश्के इंकलाब से लबरेज कर रखा है... Read more

ये मेरी मर्जी थी

ये मेरी मर्जी थी नाम तेरे एक अर्जी थी रात के सिरहाने में तेरे दिलकश तराने में डूब जाने की जाने मुझ में कैसी खुदगर्जी थी आंचल ... Read more

लेख

#रामजल #मीणा और #जेएनयू सब कुछ याद कर ही रहे हैं तो, इन्हें भी याद कर ही लीजिए । शायद दिमाग के बन्द खिड़की किवाडी ही खुल जाय। ये ... Read more

मुक्तक

१. क्यूँ पूछ कर तुम को बेजार करूँ क्यूँ खुद को गम का तलबग़ार करूँ तुम्हें फुरसत मिले तो बताजाना अपना हाल खुद ही सुना जाना, म... Read more

तुम्हारे पीठ पे...

यूँ तो कई बार मिले हो तुम मगर खाबों में... एक बार... बस एक बार पीछे से धपाक करने की चाहत तुम्हारे पीठ पे... छोटे बच्चे की तर... Read more

मुक्तक

१. मेरे जिस्म की जर्जर दीवार पर मजहब न खोज इश्क हूं इश्क बनकर ही खाक में मैं मिल जाऊंगा ... सिद्धार्थ २. हम लड़ रहें है कि सबको ... Read more

शशिभूषण समद

#JNU के छात्र आंदोलन का एक सिपाही: कॉमरेड '#शशिभूषण समद' जो दृष्टि हीन हैं। पुलिस और सरकार जानवर हुई है इन्हें भी पीटा गया छाती मे... Read more

हम भी बिहारी और हम भी गमछाधारी ...

हम भी बिहारी और हम भी गमछाधारी, अरे सौ पे न सही दस पे तो जरुरे भारी हम अभी पगलाए नहीं हैं, हम सहिय कह रहे हैं। अरे गजवे कुछ चल रहा... Read more

मुक्तक

१. मन्दिर तुम रख लो, स्कूल हमें दे दो मनुस्मृति तुम रख लो, संविधान हमें दे दो भगवान तुम रख लो विज्ञान हमें दे दो जातिवाद के पहाड... Read more

मुक्तक

१. तुम चालाक कभी मत बनना गलतियां चाहे जितना कर लो ... सिद्धार्थ २. मैं, हर बार हार कर छुप कर बैठ जाती हूं फीर एक फोन आता है...... Read more

मुक्तक

१. इस दौर का जब भी इतिहास लिखा जायेगा एक तुम्हारा नाम ' समद' उस में दर्ज किया जायेगा कि आंख वाले आंधो के नस्लों की फसलों के लिए ... Read more

मुक्तक

1. समय को बांधने का हुनर यहां किस ने सीख़ रख़ा है वो कौन है जिस ने जहां में नहीं जहर को चख रखा है ! ...सिद्धार्थ 2. गरम खून को ... Read more

मुक्तक

१. लाज़मी है तेरा उठ के खड़ा होना तारीख़ें गवाह है. ज़िद पे जो आई आईना तो, पत्थर को भी तोडा है ! ...सिद्धार्थ २. खुल कर हंसने द... Read more

मुक्तक

१. फूल ही अपनी खुश्बू पे क्यूँ इतराए यार की यादों की ख़ुश्बू ऐसी पल में कुंवरानी को मीरा कर जाय ! ...पुर्दिल २. दिमाग कहता है छ... Read more

अब फ़रियादें घुटेंगी नहीं

अब फ़रियादें घुटेंगी नहीं अब शब्द अटकेंगे नहीं सिले होठों को अब चीखना होगा रुंधे हुए गले को चितकरना होगा पर्ची चाहे जो भी निकले ... Read more

वशिष्ठ नारायण सिंह

#वशिष्ठ नारायण सिंह ; बिहार के भोजपुर जिला में बसंतपुर नाम के गाँव में जन्म हुआ था। निधन से पूर्व वे मानसिक बिमारी से पीडित थे और ... Read more

और हो गए हम...अछूत

पैदा होने से अब तक... न जाने कब से कब तक... माँ के पेट की भीत को को लात मारने से धरती को लातों के निचे रौदने तक हवा पानी मिट्टी ... Read more

लेख

#हाय क्या #जोरदार सीन है... J. P. Dutta भी देख लें तो एक नई फ़िल्म बना दें। अरे 'बॉडर' टाईप, लेकिन नाम क्या रखेंगे ? 'मूर्खिस्तान मे... Read more

मुक्तक

१. बड़ा नाज़ुक मिज़ाज है वो, बस साफ़गोई से चलता है समझा कर तो देखो, इश्क़ अक़्ल के बगीचे में नहीं पलता है ...सिद्धार्थ २. इश्क़ भीतर ... Read more

माँ कहती थी

माँ कहती थी देश घर है मेरा...अब, मेरे घर में आग लगी है कैसे चुप बैठूँ ... कैसे न तन के एठुं कुछ लोग कहतें हैं शब्द मेरे तल्ख... Read more

जेएनयू विरोध

#जेएनयू में विरोध प्रदर्शन क्यूँ ? यूनिसेफ (यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रेंस फंड, लघुनाम:यूनीसेफ) की ओर से एक रिपोर्ट आई है। उनके चीफ ... Read more

सिगरेट फूंक रही हूँ मैं

सिगरेट फूंक रही हूँ मैं नए जीवन के प्रवेश द्वार पे डर कर छुप कर खड़ी हूँ मैं... अंदर कुछ लकड़ी सा है... उसी को अबकी धूक रही हूँ मै... Read more

धन्य हम धन्य हमारे साहेब हम दोनों धन्यवाद के अधिकारी ...

#धन्य हम #धन्य हमारे #साहेब हम दोनों #धन्यवाद के #अधिकारी इस फोटो को देख कर क्या लगता है... ??? क्या इन्हें पैसों की जरूरत होगी ? ... Read more

लेख

पटना हनुमान मन्दिर ट्रस्ट राम मंदिर के लिए 10 करोड़ रुपया देगा_ वैसे अच्छी बात ही होगी, जब इतने ज्ञानी सब मंदिरों में बैठे हैं और उन... Read more

मुक्तक

१. लब्ज़ हर दूसरे ज़बान पे अपना बयान बदलती है तुम नजरों को पढ़ना भला क्यूं नहीं सीखते...? ... सिद्धार्थ २. रब ने जाने कैसी दुनि... Read more

छोटी-छोटी कविता

१. 10.11 ये चमन, ये गुल, ये गुलिस्तां सब अपनी ही जगह रह जाएंगे लोग आते हैं, आते रहेंगे अपनी अदाकारी दिखा कर लौट जाएंगे ... सिद्ध... Read more

मुक्तक

1 मैं सरल होने में लगी रही दुनियां कठोर होती रही ! ...सिद्धार्थ 07.11 2. प्रेम पगा मन बस रहा करें खल - छल से न मिला करें। .... Read more

मुक्तक

1. 8.11.2019 जागती आंखों के मेरे सपने से जाके कह दो मेरा नींद मेरा चैन ले गया सुबह से रात तक को सुलगता ख़्वाब कर गया। ...सिद्धार्... Read more

तीस हजारी में वकीलों का तांडव

तीस हजारी में वकीलों का तांडव दिल्ली तीस हजारी कोर्ट में जो कुछ हुआ, या अब तक हो हरा है। उस मामले को थोड़े से ध्यान से सोचें तो इसक... Read more