Mugdha shiddharth

Bhilai

Joined October 2018

House Wife

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मेरे मुट्ठी में कुछ नही

मेरे मुट्ठी में कुछ नही वो खाली है शब्दों के सुंदर सपने हैं जो ताली बजाने वाली है चार सुंदर पंक्तियाँ लिख कर सहेज ... Read more

मुक्तक

१. इश्क में तो हम खुद ही गिरते संभलते दरिया पार कर लेंगे तुम कहो साथी, क्या इंकलाब में मेरा तुम सब साथ दोगे ? जो साथ हो तुम तो ... Read more

मुक्तक

१. जीत हार की सीमा से परे, दोस्ती अपनी निराली है मैं थोड़ी अख्खड सी हूँ पुर्दिल, तू तो थोड़ा बबाली है ! ...सिद्धार्थ २. सुनो न... Read more

मुक्तक

मुस्कुराना और चहकते रहना दिल की गुबार को न आँखों से बहने देना इश्क का ये भी मुख़्तसर सा अन्दाज है न लब पे आहें ठहरे,न उतरे आँखो... Read more

मुक्तक

१. कहा था आओगे तुम मुलाकात के लिए मैंने दाँतों में दबा रखा था रात बस उसी एक छोटी सी बात के लिए ! ...सिद्धार्थ २. शिकायत क... Read more

माचिस की तीली था मैं

माचिस की तीली था मैं खोल में पड़ा रहा जलने से पहले आग अंदर था रगड़ने से पहले फिर मुझे निकला गया पहले सहलाया गया देखा गया, जाँ... Read more

पुरुष से किस बिधि छल कर सकता हूँ...

मैं ही कृष्ण, मैं ही केशव, मैं ही तो हूँ मधुसूदन मैं ही सहस्रजीत (हजारों को जीतने वाले), मैं ही सहस्रपात (जिनके हजारों ... Read more

मुक्तक

मुख़्तसर सी बस एक बात है, दिल के जबां पे जो तेरा प्यार है। मरने नही देता, जीने नही देता जुदाई में भी तन्हा होने नही देता... Read more

मुक्तक

कभी कभी लगता है कह दूँ पुर्दिल, समय लगेगा जाने में कुछ सांसे अब भी अटकी हुई है, जीवन के खाली खाने में। कभी-कभी दिल कहता है कि,... Read more

कई बार सोचती हूँ

कई बार सोचती हूँ तुम्हें पलट कर कह दूँ कि कोई नही रहता वहां क्यूँ तकते हो उसे...? क्या है गिला... ? जिसे कहते हो तुम उस से ... Read more

मुक्तक

मुख़्तसर सी एक बस बात है, दिल में लिए हैं प्यार हम ख़्वाहिस है तू मेरी, दिल से किया यार तेरा इंतख़ाब हम। अब ख्वाब में भी करते हैं... Read more

मुक्तक

मुख़्तसर सा एक ख़ाब है हांथो में तेरे मेरा हाँथ है दिल धड़कता है मेरा और ख्वाहिशें भी बेशुमार है। सुकून मिल जायेगा दिल-ए-बेकरार क... Read more

मुक्तक

१. जब तक चमन में तुम रहोगे प्यार खिला रहेगा दिल के बाग़-बग़ीचे में मेरी भी कुछ सांसे लेकर जीना प्यार ज़िंदा रहे सब के दिल के दर... Read more

मुक्तक

हमने कब कहा...? फासला पे रहो...? फैसला भी तुम्हारा फासला भी तुम्हारा हमने तो बस इतना चाहा... जहां भी रहो हौसलों से रहो... .... Read more

जब भूखे बच्चे न अकुलायेंगे

जब भूखे बच्चे न अकुलायेंगे जब हर पेट अन्न से भरा होगा जब माओं की सूखी छाती से छीर की गंगा बह निकलेगी जब लूटी-पीटी बेटी से को... Read more

मुक्तक

१. वो डूब रहा था जाने कितनी हसरतें लेकर हम तैरना उसको सीखा भी न पाए, कोई नही... कल फिर कोशिस करेंगे अपनी अना देकर ! ...सिद्ध... Read more

अब तुम ही कहो सुभाष...

कहो तो बोस... कौन है जो आज ये कह देगा 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा' तेरे जड़-चेतन से मैं गुलामी को हर लूंगा अब तो... Read more

मुक्तक

तुम साथ न चल पाए दूर तक, कोई नही हम अकेले भी तो न हुए... मुझमे रहोगे तुम पुर्दिल जिंदगी भर के लिए ! ...सिद्धार्थ २. और क्या थ... Read more

मुक्तक

मैं उसे खुद में मरने नही दूंगी वो मुझे खुद में जीने नही देगा ! ...सिद्धार्थ 2. कुछ जबाब आये तो हैं जानिब से उनके पर जबाब भी स... Read more

तम्हें धर्म कहूँ...या जीने का सलीका...?

तम्हें धर्म कहूँ या जीने का सलीका या तुम्हें मौत कहूँ, कुछ भी हो, तुम्हें समझना मुश्किल नहीं बस एक खाली दिल,और एक खाली दिम... Read more

मुक्तक

१. तुम अब दीवार पे ही टांग दो, तसवीर नही तकदीर मेरी तुम्हारी चालाकियों ने नंगा किया है बदन की तहरीर मेरी ! ...सिद्धार्थ २. न ... Read more

मुक्तक

१. बेहिसों की महफ़िल में लाश मेरी पड़ी रही कागा वो तंगदिल न था सड़न से बचाने को ! ...सिद्धार्थ कई जमाने हुए तू बन याद, दिल के दया... Read more

मुक्तक

1. तू और तेरी ये मुस्कान, समंदर सी लगती है हमें नदी होकर तुझ में हर बार ही समा जाती हूँ मैं बेटियां कहीं भी चहके बस अपनी सी लगत... Read more

बुरी लत

तुम्हें खुद को खुदा समझने की ये जो बुरी लत लगी है दरकिनार करके इंसानियत को नरपिशाच हो जाने की जो भूख जगी है तुम्हें रसातल तक... Read more

मुक्तक

१. मैंने, ख़्याबों को कभी अलबिदा कहा ही नही क्यूँ कहूँ आँखे हैं, हक है उसका / ये अलग बात... कुछ पुरे हुए कुछ टूट कर ब... Read more

हम खुद को दो हिस्से में बाटेंगे।

ये भी ठीक है कि तन को तुम जंजीरों से बंधोगे पर कहो तो भला ... शब्दों को किस बिधी तुम साधोगे ? अपनी हक की बातें करने को रोटी... Read more

कैसी आजादी...? कैसा 15 अगस्त...?

कैसी आजादी...? कैसा 15 अगस्त...? खुशी कैसी, कैसे रहे मन मस्त कैसे मनाऊं, मैं 15 अगस्त तुम्हें मनाना है क्या ...? मन... Read more

दिल गरीब नही...जेब फटी हुई है

दिल गरीब नही था... बस जेब थोड़ी सी फटी हुई थी उसकी नजर दिल पे कहां थी... ? वो तो बाईं जेब पे मेरी अटकी हुई थी... पेंडुल... Read more

सुनों न...

सुनों न... वो, मुझे कुछ पूछना था...? पूछूँ क्या... सच-सच कहोगे ? किसी बात से तो न डरोगे ? इस रक्षा पर्व पर, रक्षक कि... Read more

मुक्तक

साहेब की मन की बात ; हम जान क्या लेंगे किसी का, अपना हाँथ गंदा क्यूँ कर करना है पूज देते हैं हथियारों को नौजवानों को अभी देश भक्त... Read more

मुक्तक

१. भेजा था एक पैगाम हवा के पर पे तुम्हे मिली थी क्या ...? पूछना था... खुश रहते हो क्या...? मेरे शब्दों से रिश्ता बनाकर... ...स... Read more

मुक्तक

रंगती रही वो गैरों की दीवारों को निस दिन औलाद के आँसू कर के नजरअंदाज पलछिन बेरंग ही रही वो देहारी न मिली जिस दिन ! ...सिद्धार्थ Read more

तुम महादेब की गौरी हुई हो...?

छोटी-छोटी नन्हीं परियां हो तुम तुम महादेब की गौरी हुई हो...? छोड़ो, दुर्गा-काली बन जाओ... सब दुष्टों पे अकेले ही भारी पर ... Read more

ईद मुबारक...

तुमको सखे अब मैं क्या ही बोलूं , शीशा भी अब सच कहने से डरता है। तुम जब से दूर गए हो चाँद गगन में थकता है तुम जिस दर्पण क... Read more

मुक्तक

तुम्हे पता है क्या,...? क्या ढूंढती हूँ मै,...? बस एक अदना सा वकील जो दिल के दरबार में सुनवाई करवा दे यार से इश्क की गवाही दिल... Read more

उठो द्रोपदी

उठो द्रोपदी अब समर को सजना ही होगा अपने अपमान के लिए फिर नया महाभारत रचना ही होगा सीता नहीं, मीरा नहीं,राधा नहीं अब काली का ... Read more

चमकी बुखार

शिशुओं के सुंदर कोमल नरम बदन में कम्पित ज्वर के लक्छण दिखने लगे हैं। बिलख-बिलख कर माताओं के उर, मलिन वसन समान ही फटने लगे हैं... Read more

मुक्तक

वो शब्द कहाँ से लाऊँ, तेरी प्रतिछाया जिसे बनाऊँ एक माँ की जाई हम, आ तेरी परछाईं मैं बन जाऊँ। तू उर में ही मेरे रहती है, कहां कह... Read more

मुक्तक

1. हम ने कई बार पलट कर देखा था उसे दिल ने यूँ ही सूरज कह दिया था जिसे ! / तेरी तलाश में मैं कहीं भी नहीं हूँ सखे मैं हर जगह ह... Read more

मुक्तक

ख़्वाहिशों के धार पे मचलती रही जिंदगी... / सुबह से शाम ... साम से फिर सुबह में ... बदलती रही जिन्दी... *** Read more

मुक्तक

सारे दिन की थकन मैं तुझ पे ही उतार आती हूँ, तेरे खत में पलते शब्द को जब जरा सा निहार आती हूँ जब भी तेरी याद, याद बन सताती मुझ... Read more

दिल क्या है ?

दिल क्या है ? धडकन...या तड़पन नफ़रत ...या मुहब्बत सांसे ...या आसें जो भी हो, रहे बस उम्मदों भरी बगिया सी कभी तेरे लिए धड़के ... Read more

मुक्तक

१. कुछ कहना था तुम से, कहो कह दूँ क्या ? तुम यूँ जो रूठे हो, गुदगुदी कर दूँ क्या ? ...सिद्धार्थ २. जरा सा मुस्कुराने के ... Read more

सूर्य का अस्त होना

सूर्य का अस्त होना नेपथ्य की ओर जाना एक सबक है अपने आप में मुस्कुराते हुए अस्ताचल को जाना उसका रात के अंधेरे में खो जाना... Read more

मुक्तक

बेवज़ह ही मन में कुछ सपनें करबट बदल रहें हैं हँसुआ और हथौड़े उठाने को हांथ मचल रहे हैं ! ... सिद्धार्थ *** ये जो इंक़लाबी रफ़्तार... Read more

मुक्तक

१. मैं अजीब कुछ अलग ही किस्सा हूँ तू मुझ में है और मैं तेरा हिस्सा हूँ ! ...सिद्धार्थ २. तमाम रात कुछ ख़्वाब चुनते रहे सुबह ... Read more

मुक्तक

एक चुटकी नमक रखो दिल के ज़ुबान पे ख़ुशियाँ साथ चलेंगी जिंदगी की ढलान पे ! *** कभी अखबारों में सच की सियाही से शब्द फूटते थे आज प... Read more

मुक्तक

किसी के हिस्से महल आया किसी के हिस्से आई झोपड़ी मुझे फुटपाथ मिला जागीर समझ मार दी हमने चौकड़ी । ...सिद्धार्थ २. गिद्धों ने पर फै... Read more

मुक्तक

१. बेताब रुह है न तेरी, चिनार से लिपट जाने को बिजली बन गिरेगी, मक्कारी तेरी जला जाने को ! ...सिद्धार्थ *** २. जब तक बेटियों ... Read more

फूल नाराज हो क्या... ?

फूल नाराज हो क्या... ? आओ हम तुम्हें महकना सिखा दें... अपने चाहतों का रंग देकर तुम्हें आओ हम जरा चहकना सिखा दे बैठो न यूँ मायू... Read more