Mugdha shiddharth

Bhilai

Joined October 2018

House Wife

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तुम तो बस बेटी थी !

न तुम चमार थी, न वो राजपूत या ब्राम्हण था, न वो आगरा वर्ग का था, न तुम पिछड़ा वर्ग की थी, न तुम्हें वर्ण व्यवस्था की आग म... Read more

मुक्तक

कुछ स्याह से दिख रहे हो तुम... कुछ बदला है क्या ? तुम तो लड़ाकों के पहचान हो... तुम्हें याद दिलाना पड़ेगा क्या ? अपने लाल पंखों को... Read more

जरा ठहर तो वक्त ...

जरा ठहर तो वक्त, मैं अपनी हालत तो सुधार लूँ लडख़ड़ाते कदमों को जरा हौसलों से सवार लूँ । इजाजत हो गर तो आसमाँ से विशालता उधार लूँ... Read more

मन के सारे मोड़ सच्चे थे !

मन के सारे मोड़ सच्चे थे बस रास्ते जरा से कच्चे थे ! / उम्मीदें सारे अच्छे थी बस बांधी थी जिससे वो दिल के थोड़े बच्च... Read more

जो तू न भूले तो बात बराबर।

आगाज़ किया है मैंने साथी, सच से सीधा आँख मिला कर, क्या इंकलाब भी रोया होगा, भूखे बच्चों से आँख मिला कर गंगा-सतलुज में क्या आँखे ध... Read more

मुक्तक !

मुर्दों की बस्ती में कुछ जिन्दा लोगों को देखा मैंने मुर्दा होकर भी तुमको यारा ज़िंदा देखा। *** ख़ाहिश है देश के काम मैं भी आऊं ... Read more

तेरे नीरस जीवन में मधुर स्वप्न अभी मुझे भरना है।

जिन कातर नयनों में सपने बेजान पड़े हैं भूखे हड्डी में जिनकी अभी भी जान पड़ी है। उन नन्हें कोमल अबोध बच्चों की गरज मुझे पड़ी है ... Read more

हम लड़खड़ाए फिर संभल कर चल दिए।

सब अपनी मजबूरियां उठाए चल दिए हम लड़खड़ाए फिर संभल कर चल दिए। कौन रोकेगा लुटेरों को वतन को लूटने से हम कुछ सुस्त कुछ तेज कदम स... Read more

हाँ, मैं नास्तिक हूं !

हाँ, मैं नास्तिक हूँ मुझे नास्तिक ही रहने दो धकेलो मत मुझे आस्तिकता के खाई में बहुत अंधकार है वहां बदबू और सीलन है वहां और सी... Read more

हँसो कि सुबह की पहली धूप हो जाओ !

हँसो, उनकी आँख में आँख डाल कर हँसो उनके मुँह पे हँसो, ठहाके मार कर हँसो उनके चबूतरे और खलिहान में हँसो उनके भविष्य और वर्तमान... Read more

बढ़ो कि माँ ने तुम्हें बुलाया है !

माँ पे गिद्धों का पड़ आया साया है चोरों ने माँ को बहुत ही रुलाया है, कुछ खुद खाया, कुछ अज़ीज़ों को भी खिलाया है, कुछ चोरों को देश... Read more

'माँ' तेरे साथ तेरे हांथ के बिन, अकेले में रोती हूँ मैं !

'माँ' तेरे साथ तेरे हांथ के बिन, अकेले में रोती हूँ मैं आ कि तुझ बिन सब होके भी कुछ नहीं होती हूँ मैं। तेरी वो डांट, तेरा वो ... Read more

मुक्तक !

56 इंच का सीना लेकर कह रहे खुद को चौकीदार हम ने देखा है भईया देश को लूटते इनको ही बार-बार कैसा अजब-गज़ब माया है, चोर कहे खुद को ... Read more

मुक्तक

तुम्हें अपनी आना को सरे बाम सहलाना था बस इस लिए अहले बतन को बेच आना था। हिन्दू - मुस्लिम जो कभी थे भाई- भाई उनके हाथों में ... Read more

माँ है वो मेरी !

कौन है वो जो, मेरे 'ऐब' को भी आंचल समोता है 'खूबियों' को भी मेरे, अपने दामन में संजोता है। देखने वालों ने बस अपनी आँखों की पुत... Read more

अब उनकी कुर्सी पे बात बन आई है !

वो वोटी हमारी नोच रहे हम रोटी-रोटी करते हैं , वो शासक हैं, हम शोषित हैं वो मालिक हैं हम चाकर हैं. हम दीन-हीन वो धनी बने हम... Read more

मुक्तक !

बस दो टका दे के, सौ टका का ईमान खरीदने आई है हमारी सरकार हमें हाशिये पे धकेलने कि क़वायद लाई है। हम जिन्दा लाशों के ढेरो से खू... Read more

मुक्तक !

तेर-मेरे दिल कि बात, जो आज आग बन आई है हर एक लब पे गर सुर सा सज जाए तो वही अच्छा। / भँवर से क्या डरें हम जिंदगी लहरों पे ही गु... Read more

मुक्तक !

आप तो बस खोजते रह गए हमें सताने के नुस्खे हम ने 'साहेब' आप पे ध्यान देना ही छोड़ दिया। अपने हको हुक्क़ कि बातों को गुनगुना के देख... Read more

जब चीर के कलेजा से दिल को निकला जायेगा !

उठो बेड़ियाँ खनकाओ और ज़रा यलगार करो खनकते बाजूाओं से तुम दहलता संग्राम करो। अपनी दर्दों के सीने पे चढ़ के चीत्कार करो आओ सब म... Read more

हाँ हम ‘अर्बन नक्सल’ हैं !

देश बेच कर जो खाते हैं, खाते नहीं जो कभी अघाते हैं देश प्रेम की बातें मन मेंभूले से भी कभी नही लाते हैं देशभक्ति को जुमला बस बन... Read more

ये वो सरकार जो देशभक्ति कि पीठ पर है सबार

आईना उल्ट-पलट के देख लो चाहे जितनी भी बार सच के दामन से लिपटने के लिए आँख मिलाना ही पड़ेगा हर एक बार। बंद आँखों से सच कभी दीखत... Read more

बेशक थोड़ी मजबूर हूँ, पर हाँ मैं भी एक मजदूर हूँ ।

सौ में नब्बे आदमी हर दौर में मजदूर है बांकी जो भी बचे वो सेठ हैं, जो मगरुर हैं। कोई हसुआ-हथोड़ा लिए मेहनत की राह पे चल रहा को... Read more

मुक्तक !

सत्ता का हर एक लब्ज़ अब आवारा हो गया है हमारे देश का हर शख़्स इसके नीचे बेचारा हो गया / कोई पानी को तरसता है, कोई अदानी को खिलाता... Read more

मुक्तक !

इस चुनावी मौसम में कुछ अलग कर के देख राम-रहीम नहीं, अपनी जेब को टटोल के देख तू दूसरों के फ़र्जी वादों को चुप-चाप न सुन अपनी ... Read more

मुक्तक

कुछ लोग उसे फकीर समझते हैं हम तो भईया हुआ गिरा ज़मीर समझते हैं। देश को जो बेच दे, बाँट दे और तोड़ दे उसे,वाहियात-नकारा सरकार समझ... Read more

चाँद

चाँद रात के आंगन में उतरा है कोई कह दो जाके उसे हम मातम मना रहे हैं। बारुद के ढ़ेरों से चिथड़े उठा रहे हैं सालों पहले बिखेरे... Read more

मुक्तक

आईना ने पलट कर पूछा है ... बता आमदनी का जरिया क्या है ...? / हम ने भी उठ के कह दिया ... नफ़रत के बाज़ार में मुहब्बत ... Read more

मुक्तक

वो मुझे लफ़्ज़ों से अपने लबरेज़ कर गया आखों से छलका ऐसे मुझे मोती कर गया... / जिन्हें वस्ल-ए-यार कि हवस हो ख़्वाबों से करते कहा... Read more

मुक्तक

सादगी को रौंद के पुर्दिल महल न कभी बनाना तुम दुनियाँ की रीत देख के जुबाँ पे छाले न उगना तुम... / बड़ी बेसब्र थी जुबाँ पे इश्क ... Read more

आइये हम मिलते हैं तेज़ाब के शिकार से !

आइये हम मिलते हैं तेज़ाब के शिकार से ऊधडी हुई खालों में सिसकती बयार से. गलती हुई खालों से उठती, अजीब सी सड़ाँध से आइये हम मिलते... Read more

दोष बिच्छू का नहीं...

दोष बिच्छू का नहीं... की उस ने हमें काटा, 'जहर' हमारे शरीर में फैलाया, काटना और ज़हर फैलाना धर्म है उसका ... वो अपने धर्म पे... Read more

गांव !

कहीं एक गांव था मेरा वो गांव मुझ से छूट गया, आम,सखुआ, महुआ का छांव मुझ से छूट गया। एक शहर मिला था बदले में, गलियां,सड़कें,... Read more

कालाहांडी, भूख और गरीबी !

ओडिशा: इस चुनावी समय में भी कुछ लोग अपनी जिंदगी कि जरूरी जरूरतों को लेकर आवाज़ बुलंद करने में पीछे नहीं हट रहे ,क्या कर सकते हैं, आश्... Read more

वो जो मेरठ दो सौ घर जल गए पता तो करो लाख के थे क्या ?

कई साल हुए इस बात को पर भूल नही पाती। एक बार कापड़ा धोने के दरमियान कपड़े के साथ सै का नोट भी धुल गया था मुझ से,जिसे इस्त्री (प्रेस)... Read more

मुक्तक !

टेढ़े-मेढे रास्ते मैंने अपने वास्ते खुद ही चुन लिए बेबसों की आवाज़ जो अचानक ही मैंने सुन लिए ! *** बीरान कमरे से कोई आवाज़ सी आती ह... Read more

मुजरिम !

जब भी इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा एक-एक कर के हम सब को शामिल किया जाएगा। हथियार उठाने वाला हाँथ उनका सही, देखने वाले हम भी थे ... Read more

जकिया जाफरी एक मज़लूमा !

सियासत भी अलग-अलग दौर में अलग-अलग रंग दिखती है कभी गो हत्या को नाजायज़ कभी नर हत्या को जायज़ बताती है ! ---------------------------... Read more

मुक्तक !

वो बदन ही नहीं तू ध्यान से देख तू बदन के आगे भी कुछ और देख के देख लड़कियां हर दौर में बेहतरीन होती हैं ढलेंगी हर सांचे में एक ... Read more

मुक्तक !

मेरा बचपन मेरे दामन को छोड़ती ही नही जब भी छुड़ाती हूँ और जोर से लिपट जाती है ! ** हमें अपने घऱ-आंगन गए जमाने हो गए माँ के हाँ... Read more

मुझे सिर्फ मैं होना है !

तुम्हें राम होना है ? रोका किस ने है ? हो जाओ, हमें सीता नहीं होना है। आग में तप कर भी, जंगल का कोना नहीं होना है । दो भगव... Read more

मुक्तक !

आज की औरत हूँ, आज़ाद होना है उड़ती हवा हूँ माहताब होना है। हवाओं के पर पे सबार होना है, उड़ने-खुलने के लिए तैयार होना है। ते... Read more

मुक्तक !

तुम मुझे इतनी हैरत से न देखो, मत सोचो कि औरत हूँ, इतनी आग कहाँ से लाती हूँ ? कि चुप्पी टूटी तो सैलाब आएगा, देखना एक नया इंकलाब ... Read more

मुक्तक !

खुले पिंजड़े में बैठी चिड़िया से कोई पूछो पर होने पे भी परवाज़ क्यूँ नहीं करती। घर की देहरी पे बैठी औरत से भी पूछो आंगन से ख़ुद ... Read more

वो लड़की !

वो लड़की वो जो गई थी सौदा करने हाट में, गीत गाते बाट में, जो हाट से लौटी नहीं निगल लिया जिसे हाट ने, मैं ही तो रही होउंगी या... Read more

आईए-आईए आप हमारे साथ आ जाइए !

आइए-आइए अब की आप हमारे साथ आइए अपने हक के लिए मिल कर आवाज़ तो लगाइए, उस तरफ़ नही, ज़रा इस तरफ़ तो आइए, मेरे साथ मिल कर सरकार की ... Read more

लेख

एक उम्मीद थी अब वो भी टूटी समझो उसकी हर बात को तुम झूठी ही समझो ! --------------------------------------------- चारों तरफ़ मिडिय... Read more

मुक्तक !

दुख इसका नही कि वो शांति की बात नही करते हैं हम परेशां हैं कि वो इंसानियत भुलाने की बात करते हैं। हथियारों के व्यपारी हैं जो, शा... Read more

मुक्तक !

आज तुम्हारी हर कही बात झूठ ही लगती है हमें एक वो भी दिन थे तुझ पे एतबार कर लिया था। चापलूसी देख के गलतियां हो ही जाया करती हैं... Read more

मेरा भईया !

सोन चिरैया तुम मेरी मैं तेरा भईया रहना हमेशा खुश तुम मेरी परछाइयाँ। जब भी लगे तुम्हें तुम हो उदास बहना एक आवाज़ लगा के कहना मेर... Read more