Mugdha shiddharth

Bhilai

Joined October 2018

House Wife

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सुक्की हूँ मैं !

सुक्की हूँ मैं, मेरे पसलियों में फसी है एक गोली जबानों के बंदूकों की नाल से निकली बारूद भरी गर्म लोहे कि गोली, मरी नहीं हूँ म... Read more

मुक्तक

"मुझे मेरे पुरखों ने हक दिया है, जुवा पे अपने आग रख लो तुम्हें सत्ता ने हक दिया है,लहू लगे हाथों को बेदाग़ कर लो !" *** 07-02-... Read more

मुक्तक !

"तीर तलवार कि जरूरत नहीं मुझे, तुम्हें हो तो सँभाल लो, मुल्क़ मुहाने पे है धर्मयुद्ध के, हम कलम से काम चलालेंगे !" *** 07-02-20... Read more

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद !

"ईमान बेच कर जो सियासी मंडी में, सत्ताधीशों को माई-बाप लिखते हैं खबरों की उस मंडी को, इस कलिकाल का अभिशाप हम कहते हैं !" भीम ... Read more

मुक्तक

खैरात नहीं हमें हमारा हक़ का तो दीजिए जो हमारे हक का है बस उतना ही दे दीजिए चंद सिक्के उछाल के मातमपुर्सी कर रहें हैं आप हमार... Read more

गिद्ध हैं सारे के सारे !

ये जो बंगाल में हो रहा है, क्या वो हमारे मतलब का है ? है ही लोकतंत्र पर ये बड़ा सबाल है। और हम इस लोकतंत्र के अहम हिस्स्से। तो मतलब... Read more

मुक्तक

जब कभी इस दौर का इतिहास लिखा जायगा बग़लगीर नीरो का ही तुझको समझा जाएगा, जल रहा था देश मेरा धर्म के उन्वान पर, तू बैठ मजे में जु... Read more

मुक्तक

माँ :आप से फूल, खुशबु,तारे, सितारे कि बातें कौन करे, आप दिल में रहतीं हैं, आप से दिलगी कि बातें कौन करे। बस खुश रहा कीजिए, हमें भ... Read more

हमारे प्रधान सेवक !

हमारे प्रधान सेवक ठान कर बैठे हैं कि झूठ का सर झुकने नहीं देंगे। गज़ब-गज़ब झूठ बोलते हैं भाई बड़े से बड़ा झूठा पानी मांगे उनके आगे। अब क... Read more

औरत हूँ !

औरत हूँ कभी आग तो कभी पानी हूँ कभी नीमगोली तो कभी गुड़धानी हूँ छू लिया जो किसी ने आन मेरी कभी लक्ष्मी बाई तो कभी रज़िया सुल्त... Read more

आओ लेनिन इस बार हमारे घर आंगन में आओ !

लेनिन तुम्हारे मृत्यु दिवस पर, तुम से ही, तुम्हारा ही, उपहार मांगती हूँ, कि आओ हमारे घर आंगन दरवाज़े दलान में और फूंक दो क्रां... Read more

और हम चुप रह गए मिडिया की छुपाई में !

इंसान और चूहे के बीच का अंतर खत्म हुआ। चूहे को भी चुहेदानी में फंसा देख हम तड़पते नहीं, और कोयला खान में फंसे मजदूरों को देख कर ... Read more

एक चुटकी नून ढूंढ रही हूँ

एक चुटकी नून(नमक) ढूंढ रही हूँ, अपने जख्मों पे रगड़ने को ताकि सारी रात हाय-हाय करती रहूं, सिसकती, सुबकती रहूं, भोर होने तक, त... Read more

आशा है आएगा इंकलाब का काल !

समानता की राह में, एकता की बाँह में देखो तो गौर से, बिछ गए हैं काटों का जाल। नागों ने कर लिया है आपस में मंत्रणा, फूलों और कल... Read more

हम लड़ेंगे जरूर, अपने जख्मों के लिए !

जाड़े के दिनों में, अंगीठी जला के बैठना, या गुनगुने धुप में खुद को सेकना अच्छा लगता है न ? लेकिन सरकार जिस अंगीठी पे हमें बै... Read more

मेरे शब्दों की बेनी पे !

क्या नया हो जाएगा नए साल में ? जो खुश होजाऊं, इतराऊं, जश्न मनाऊं । क्या गिद्धों के चोंच गिर पड़ेंगे भेड़ियों के रक्तपिपासु दांत... Read more

मालिक कौन

शेर, कुत्ता ,गीदर सब की लोग उपमा देते हैं बिल्ली को क्यूँ भूल जातें हैं ? क्यूंकि बिल्ली उनकनी परछाई है क्यूंकि पालतें है... Read more

तो आओ घसीटो हमें !

रोज - रोज थोड़ा - थोड़ा मारने में क्या मज़ा है ? मैं तो बोलती हूँ उठाओ अपना हाथ, ले जाओ हमारे बालों तक और घसीटो हमें, राज महल से... Read more

संजलि अब तुम डरना !

संजलि अब तुम डरना, हमारे बदले, हमारे देश में, देश हित में नया कानून पारित हुआ है। डरना मना है, डर नहीं सकते कुछ भी हो जाए,... Read more

प्यारी संजलि !

प्यारी संजलि तुम मर गई, तुम मुक्त हो गई, हम लोग भी मर चुके हैं, आधे - आधे पर मुक्त नहीं हुए तुम्हें पहले जलाया गया,फिर मारा ... Read more

अब उन्हें डरना होगा !

खोने और पाने का भय, हम ही क्यों पाले, क्यों हर वक्त हम ही इस डर में जीये, कि हमारा सब छिन जायेगा, वो जो हमारे ऊपर बैठे हैं, जिन... Read more

मुट्ठी बनो या मुट्ठी में रहो !

पीड़ा जब मन में लबालब भर जाता है, वो शब्द हो जाता है, कोरे कागज़ पे,यूँ ही छलक जाता है, अक्षरों से शब्द, शब्द से कविता हो जाता है ।... Read more

विद्रोही अभी ज़िंदा हैं !

विद्रोही मरे नहीं, विद्रोही मरा नहीं करते वो ज़िंदा हैं, जब तक शोषण ज़िंदा है जब तक शोषण के खिलाफ उठने बाली आवाज ज़िंदा जब तक ... Read more

गेरुआ रंग

मैं कई बार उठती हूँ फिर बैठ जाती हूँ, अपने मन के दरवाजे पे सहमी सी खड़ी रह जाती हूँ देख के धीरे- धीरे उडते गेरुआ रंग को मेर... Read more

धर्मांधता

उन्होंने तो सिर्फ बीज फेका था, धर्मांधता का, उर्वरक जमीन देख कर, पागल तो हम स्वयं हुए थे, अपने मन कि उर्वरक जमीन दी, अपने सह... Read more

उड़ान भरने दो !

रोको मत आज इन्हें, आवाज़ उठाने दो सदियों से ख़ामोश लबों पे, कुछ लफ्जों को इतराने दो, रोको मत आज इन्हें कुछ खुल के प्रतिकार जताने द... Read more

घसीट के घुटनों पे लाएँगे !

अकाल पड़ा है, खेतों में नहीं दिलों में,खाये -अघाये लोगों के दिलों में, हम भूख कि बात करते हैं, वो सुख अपना गिनवाते हैं, हम रोटी ... Read more

हमारी नस्ल की जड़ों में दीमक लगाना चाहते हैं !

हर बार जब सोचने लगती हूँ सब ठीक हो रहा है , किसी अंधेरे कोने से गेरुया रंग में रगें भेड़िया निकल आतें है कुछ गर्म लोहे उगलते ... Read more

असली मालिक आज चौकीदार से मिलने आये हैं,

असली मालिक आज राजधानी आए हैं, चौकीदार से अपना हिसाब मांगने आए हैं, जो चीख़ते थे बुलाना किसी चौराहे पे एक दिन, चौराहा आज उनके ... Read more

अपने मजबूत हाथों को अब, लाल झंडे का भार दो !

देश के युवा हो तुम, देश हित में एक नया बलिदान दो देश हित के लिए ,धर्म की बेड़ियों को तुम काट दो, हो अगर हौसलों में दम, बाजुओं... Read more

बेरोजगार हूँ साहिब, एक अदद रोजगार चाहता हूँ।

मेरा नहीं, देश के युवाओं का कहना है/ युवा देश का युवा हूँ, बेज़ार और बेकार हूँ, अपने हाथों के लिए कोई काम चाहता हूँ , बेरोजगार ... Read more

आज मेरी आँखों ने अपनों को जलते देखा।

आज जलते हुए लोग देखे सुलगती हुई आँखें देखी सड़ती बदबूदार माबाद निकलती खोपड़ी देखी सब को चलते देखा सब को जलते देखा आज अपन... Read more

शिव के नंदी

मैं , समझ नही पा रही - ये जो हर पाँच सालों में एक बार , हमारे दरवाज़ों पे, हाँथ बांधे ,सर झुकाये , शिव के नंदी से दीखते लोग आ खड़े... Read more

साथी ; आज राम घर आबेंगे

साथी ; आज राम घर आबेंगे, पूर्ण करके वचन पिता का। असंख्य रूपों में प्रकट हो के , जन -जन को हर्षावेंगे आज वन को त्याग राम घर आबेंगे... Read more

माँ मेरी देवी नहीं

माँ मेरी देवी नहीं – हाड़ - मांस की नारी है, ये अलग बात है , वो जग से अलग – थोड़ी सी न्यारी है ! नास्तिक नहीं वो – फिर भी कर्म को ... Read more

माँ मेरी देवी नहीं

माँ मेरी देवी नहीं - हार मांस की नारी है, ये अलग बात है , वो जग से अलग - थोड़ी सी न्यारी है ! नास्तिक नहीं वो - फिर भी कर्म को ... Read more

दिल्ली मर रहा है ।

दिल्ली मर रहा है , दिल्ली हांफरहा है , हवा में ज़हर घुल गया है। और लोग, आँख मूंदे चल रहें है , उफ; साँस भी छान- छान के ल... Read more

मेरी क़लम

एक लकीर खीच दी गई है ,दायरा बना दिया गया है एक फरमान जारी की गई है ,बंदिश लगा दी गई है / मेरे क़लम को दायरे में बांधने की कोशिस की ... Read more

कैसा शरद और कैसा पूर्णिमा

आसमान के आचंल में दूधिया सा चाँद शरद पूर्णिमा का पूरी रवानी पे है , अमावस्या को पछाड़ आया पीछे कहीं , भूतकाल के अंधेरे मे... Read more

रावण रूठा हुआ है

रावण रूठा हुआ है पूछता है मुझ से बार -बार क्या भाई होना बुरा होता है ? अपनी माँ जाई से प्यार करना क्या बुरा होता है ? बहन... Read more

माटी के मूरत में भवानी दिखती नहीं ,

किस ओर देखूँ , त्योहार है भवानी का माटी के मूरत में भवानी दिखती नही , सिद्धार्थनगर में फिर बेटी जो मसली गई माँ अपना आँचल ओढ़ाती... Read more

भ्रष्टाचार

एक सवाल मन में उमड़ घुमड़ के उठता है अपने देश में ही क्यूँ भ्रष्टाचार फैला है , नेता बने हैं अभिनेता कितने गप -सप करतें रहतें हैं... Read more

मेरे बेली के फूल

किसी अपने ने कहा फूलों पे लिख्खो , सफेद, सुगन्धि, शबनम सी बेली के फूल पे लिख्खो नहीं लिख पाई बेली के फूल को शब्दों में ... Read more

गंगा पुत्र कौन

गंगा पुत्र कौन ? वह जो बिना किसी स्वार्थ के , अपना सब कुछ त्याग के, लड़ता रहा अपना जीवन हार के , या वह जो खुद को बेटा कहता ... Read more

त्रासदी

भिलाई स्टील प्लांट में गैस पाइपलाइन में ब्लास्ट , कल हाँ कल ही एक और त्रासदी एक और दुर्घटना आसामन को छूती आग की लपटें म... Read more

अब मरूंगी भी मैं ,और देखूंगी भी मैं

मेरी आँखों में कितने ही सपने फूलों सा सुन्दर गंगा सा निर्मल असीम आकाश सा बिस्तृत पर मैं ,मैं तो बंधी हूँ अपने ही किसी अपने ... Read more

[ कृषक ] *

बच्चों का पेट काट कर जो, बीज मही में बोता है कृषि प्रधान देश का कृषक वो कहलाता है / दुनियाँ का भूख मिटाने को ,जो दिन रात परिश्... Read more

बोलते क्यूँ नहीं

चुप क्यूँ हो बोलते क्यूँ नहीं चीखते क्यूँ नहीं तुम तो मेरे अपने हो पहचानते क्यूँ नहीं मै हूँ ,हाँ मैं ही हूँ तुम्हारी बेटी... Read more

कहाँ हो गोबिन्द

कहाँ हो तुम गोबिन्द क्यूँ नहीं देखते खुलती नहीं क्यों, तुम्हरी आँख क्या चिर निंद्रा में सोये हो तुम? द्रोपदीयों की भीषन ची... Read more

औरत हूँ

औरत हूँ सपने बुन रही हूँ पानी को तोडने का आसमान पे चलने का आग को हथेलियों पे मसलने का अंगुलियों पे चाँद नचाने का क्या बुराई ... Read more