Mugdha shiddharth

Bhilai

Joined October 2018

House Wife

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मुक्तक

१. जब हम न हों तो हमें ख़ुशी में नही बेचैनियों में ढूंढा जाए मेरे लफ़्ज़ों को सलीके से निचोड़ा जाए उसी में मिलूंगी कहीं और न मुझक... Read more

माँ...

'मुन्ने' तुमको चोट लगी है बोलो तुम थे कहां गिरे राह में कहीं गढ्ढे थे या थे तुम गढ्ढे में खेल रहे...? / माँ... मैं तो जा रहा ... Read more

मुक्तक

१. बस चाहतें ज़िंदा रहे जिंदगी की सूर्यास्त होने तक दिल का क्या है वो तो आज धड़का कल भूल गया। ...सिद्धार्थ २. किसी को परवाह नह... Read more

भाषा अपनी गरिमा खोती जा रही है

बुजुर्गों के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करना हमारी संस्कृति का हिस्सा ही नही था कभी। लेकिन इस की शुरुआत हुई हमारे देश में . थोड़ी देर के ... Read more

जय हो

मुझे पता नही ये मैंने क्या लिखा है, पर कुछ तो है... अपने आप को बचाईये, अपने होने को जाया मत जाने दीजिए ; युद्ध जब धर्म के नाम हो ज... Read more

मुक्तक

है बहुत घना अंधेरा, शब भी निशब्द है मगर जिद पे जुगनू आजाये तो अंधेरा कहां टिक पायेगा। रात की औकात क्या अंधेरे में भी वो बात कहां... Read more

मुक्तक

१. मैं कुछ रोज उस से जाके उलझ जाती हूँ सुलझाने की ज़िद में और उलझ जाती हूँ। ...सिद्धार्थ २. बहस में जाओगे तो हार ही जाओगे इश्... Read more

मुक्तक

१. कुछ और नही बस इतनी खराबी है खुद को मिटा कर भी हसीन दुनियां बनानी है तुम्हे गर प्यार से हो प्यार तो तुम्हें भी साथ लाने की मे... Read more

मुक्तक

१. हम भारत के नीच लोग नीचे गिरते ही जाएंगे किसान न रहे तो क्या हम एक दूजे को ही खाएंगे ??? ... सिद्धार्थ २. चल सखी हम घास काट... Read more

मुक्तक

१. आईने ने हंस कर कहा उम्र ने तो बस अपना काम किया देह के कोरे किताब पर कुछ लकीरों को तेरे नाम किया ! ...सिद्धार्थ २. मेरा चाक-ए... Read more

माई

जिंदगी की सिलेट पर कुछ सफ़हे मिटने को है कहां जाके रोऊँ मेरा पहला प्यार बिछड़ने को है। सबसे हसीन सबसे जहीन है वो, नौ महीने बड़ा ह... Read more

मुक्तक

१. कुछ भूख से रोते बच्चे देखे, देखे चाँद गगन में सादा सा था पूनम का चाँद मगर वो दिखे मुझे बस आधा सा । ...सिद्धार्थ २. गुरुर ... Read more

इंकलाब

बंट रहे थे पर्चे सब उसकी मर्ज़ी है बस रब को ऐसे ही माना जाये। हम गिर पड़े हैं चलते-चलते चोट खाकर क्या इसको भी उसकी रज़ा ही जाना... Read more

मुक्तक

बंट रहे थे पर्चे जो होता है सब उसकी मर्ज़ी है बिना फेर बदल ,इसे ऐसे ही बस माना जाये हम गिर पड़े हैं चलते-चलते चोट खाकर क्या इस... Read more

सड़क से संसद

सड़क से संसद तक मौन डोल रहा है क्या बात है जो... सिर्फ डेढ़ आदमी ही बोल अब रहा है सब के गहरे राज वो अपने होठों से खोल रहा है अप... Read more

मुक्तक

जो कभी झुके नही हैं, वो झुकना सीखा रहे हैं, मंजिलों से पहले बचपन को रुकना सीख रहे हैं। वो दिन ए इलाही का लेते हैं जोर से नाम ... Read more

मुक्तक

१. ज़िस्म की गली में जिंदगी का सूरज ढल भी जाय शब्दों के आंगन से बिछोड़ा किस तरह हो पाय । मिट जाते हैं बारहा हर नक़्श कदम के शब... Read more

खुश रहा करो तुम ... सिद

खुश रहा करो... पत्थरों पे फूल उगाया करो तलाश सेहरा में दरिया करो अमरबेल हो तुम, हर बार किसी भीत से लिपटी हुई जंजीरों में स... Read more

छोटी कविता

१. प्रेम सावन का पहला मेघ है , जो बिना गरजे भी बरस जाता है ... सिद्धार्थ २. मैं सारी रात बैठ के कगज से नाव बनाती रही दर... Read more

मुक्त

१. अब कोई मेरी सारी सुबहों में सूर्य ग्रहण लगा दो मगर सारी बेटियों के मन आंगन में धूप खिलने दो ! ...सिद्धार्थ २. तू नीम नींद ... Read more

मुक्त

१. बिका हुआ कलम क्रांति गीत नही गाता थूक से कभी भी इतिहास नही रचा जाता । ...सिद्धार्थ 2 ख़ता गर कर ही लिया तो सज़ा से क्या डरे... Read more

मुक्तक

जुस्तुजू उसकी करके भी ख़ाके मुहब्बत ही उड़ाया मैंने दीद की बस आरज़ू ही रही, चैन भी तो गवाया मैंने ! बस एक तेरी दीद की रही आरजू दि... Read more

क्या हम दोनों वही तो नही...

क्या हम दोनों वही तो नही... जो प्रेम के छनिक उफान में बहने को हो आतुर एक दूसरे के बांहों में सूखे झरने की शीतल छाँव के तलाश ... Read more

मुक्तक

१. कुछ गम कुछ खुशियां तेरे दामन में वो टांक गया उम्र था कि एक और साल चुपके से फलाँग गया ! ...सिद्धार्थ २. हम दोनों एक ही माँ... Read more

गीत

बाबा के दुलारी धीया, अम्मा के भी प्यारी हो चरखा की सूत भईली बिटिया हमारी हो ललना सब राग गावें, धियवा भईल भारी हो कइसे बचाईं इनका ... Read more

मुक्तक

हमारी किस्मतों के फ़ैसले वो क्यों करें ? हमारे प्यार जताने के तरीक़े वो तय क्यों करें ? हमारी माँ अभी जिन्दा है, हम गाय को माँ क्... Read more

मुक्तक

१ कुछ अपने कुछ मेरे कुछ सब के बारे में लिखो, कुछ तो लिखो यूँ चुप न रहो चुप्पी मुर्दों पे जंचती है जिन्दा हो तो जिंदगी की गिरहों... Read more

मुक्तक

१. अच्छा है दिल को भी कभी कभी खून के आंसू रोने दो अपनी आवारगी पे इसे भी तो पशेमाँ कभी जरा होने दो ! ... सिद्धार्थ २. मेरे इं... Read more

ऊर्जा का अभिनव रूप...

न तो तुम्हें परेशान न ही तंग देख सकती हूं तुम परेशान हुए तो इस चरा चर में सब बेरंग सा हो जाएगा, शब्दों का सारा का सारा माधुर्य ... Read more

कुछ पूछूं तुमसे...

कुछ पूछूं तुमसे... क्या तुमको हंसना अच्छा नही लगता ? ...ऐसा तो नही तो हंसों न...दांत से नही, दिल से चीज कहने पर नही मेरी जा... Read more

एक हसीन वादा था तुम से

१. एक हसीन वादा था तुम से, कुछ न मांगने का भी इरादा था एक गिला किये बिना ही जाना, क्या ये इश्क से भी ज़्यादा था। ...सिद्धार्थ ... Read more

कफ़न ओढ़ाके के यहीं दफ़ना दूँ आज...

हम मर चुके हैं हम उतने ही मरे हैं जितना पांडव स्वर्ग जाते समय मरे थे जब उनका मानव देह गल- गल कर गिर रहा था हमारा भी अंग प्रत्... Read more

मुक्तक

सब ये कहते हैं आँखों में मेरे समंदर, होठों पे फूलों के मुस्कान की कहानी है एक जेब है जो मेरे सीने से लिपटा है जिसमे क़तरा-क़तर... Read more

कभी इश्क तो कभी इंकलाब गाना है

दिल अपना अजब सा कारखाना है, इसे कभी इश्क तो कभी इंकलाब गाना है छोटी सी बात है मुझे हर शय से प्यार है पलकों पे ख़्वाबों का उम्... Read more

'मेरी नन्ही सी गुड़िया'

जमीं पे चलते चलते किसी दिन आसमां के सीने पे तू पांव रख देना मेरे ख़्वाबीदा आँखों के पानी से अपने कहकशां के दिलक़श रवानी से ये रौश... Read more

औरत के अंदर एक औरत थी

औरत के अंदर एक औरत थी डरी हुई सहमी सी वो लिखती आग थी बोलने से डरती थी इस लिए वो चुप ही रहती थी उसे और डराया गया उसे कस के... Read more

कदमों के निचे से तेरे

कदमों के निचे से तेरे धर्म के ख़ार हटाने थे मुझे इस लिए कागज़ कलम की अहमियत बताने थे तुझे फूलों भरा होता नही जीवन का डगर मेरे बच्... Read more

किस का जूता, किस का सर

किस का जूता, किस का सर कौन है किस के कदमों पर जातिवाद गर खत्म हुआ तो ये कौन भंगी है जो, झुका है गुठनों पर... ? थूक चाटता है आज भ... Read more

मुक्तक

१. जिसकी पंखुड़ियों को न खिलने की सज़ा मिली हो यार वो फूल खुशबू कहां तक लुटाए जमाने में... ... सिद्धार्थ २. तुम पंख क्यों नहीं दे... Read more

अनुत्तरित प्रश्न और मैं

कई अनुत्तरित प्रश्न और मैं एक युद्ध जो मुझ में ही विराजमान है जाने कब से, युद्धविराम की तलाश में भटक रही हूँ, मन के गलियारे में ... Read more

अजीब सा मसला है पुर्दिल इस दौर का

अजीब सा मसला है पुर्दिल इस दौर का विपक्ष में बैठे थे तो, थे बेटियों के पहरेदार। तब बढ़-बढ़ कर बताते कभी थकते नही थे बेटियों के इज... Read more

मुक्तक

१. हजारों एब हैं मुझमें, एब से लबालब भरी हूं मैं खूबी बस इतनी,नफरत में भी प्यार ढूंढ लेती हूं मैं जख्म गर सीने के हो तो,ठहाकों से... Read more

जब तक हम भीड़ से,समूह में नही बदलेंगे

जब तक हम भीड़ से समूह में नहीं बदलेंगे जब तक अपनी बिखरी हुई एकता को नहीं समेटेंगे जब तक अपनी छोटी-छोटी शक्तियों को एकत्रित कर ए... Read more

मुक्तक

हर गली हर नुक्क्ड़ से बस एक आवाज़ अब आएगा भगत अश्फाक के देश में अब भूरे गोरे न टिक पायेगा ग़ुलाम होठ भी उठ के तब इंक़लाब के नगमे गा... Read more

मैं सदैव तुम्हारे मौन का साथ दूंगी

मैं सदैव तुम्हारे मौन का साथ दूंगी तुम्हारे मौन को सुनुंगी उसे पूरी सिद्दत से गुनुंगी क्यूं कि तुम ने सुना था मेरे अंतहपुर के मौ... Read more

तुम सदैव रहोगे केंद्र बिंदु...

तुम रूह में बसे हो निकालूं कैसे अपने बेपरवाह ज्जबतों को संभालूं कैसे...? ... सिद्धार्थ २. वो देखो, नदी का दूसरा किनारा अनंत तक ... Read more

प्यार छुपी होती है...

१. उदासी के सूखे पत्तों में भी बहार छुपी होती है... उदास दिलों के बंद दरवाज़े में भी हंसी की हल्की सी टंकार छुपी होती है जो कानो... Read more

३.भगत

कितने वादे किये थे तुम सब ने, बलिदान हमारा व्यर्थ न जायेगा स्वतंत्र भारत के आंगन में सब को एक समान ही हक मिल जायेगा सारे के सारे... Read more

2 . भगत

चलो आज फिर से एक बार 'भगत' को पुकार जाय इंक़लाब की नोक पे भूरे अंग्रेजों को ललकारा जाय। कुंडली मार के जो हैं बैठे हुए, भूखे बच्चों ... Read more

1 .भगत

१. आज हमारे नायक का दिन है आज भारत के पहले अर्बन नक्सल का जन्म दिन है एक दिन उनकी यादों के नाम एक दिन क्रांति के जियाले के नाम ... Read more