Residing at Agra
Serving in Govt sector
Sociologist by profession
Doctorate in medical sociology

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थोड़ा रुक ही जाते.....

थोड़ा रुक ही जाते हम आये तो थे धड़कने तेज थीं मगर कदम डगमगाये तो थे गीली मिट्टी सनी थी जो तेरे पैर में उन राहों पर आँसू बहाये... Read more