विनोद शर्मा सागर

सीतापुर उ0प्र0

Joined March 2018

शिक्षक एवं स्वतंत्र साहित्यकार

Books:
विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में
रचनाओं का प्रकाशन

Awards:
नहीं

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कैसे वतन भूल जायें

ज़मीं भूल जाएं गगन भूल जाएं। न हम से कहो हम वतन भूल जाएं।। शहीदों ने खींचा है इसको लहू से। मुनासिब नहीं यह चमन भूल जाएं।। ... Read more

बेटियाँ

बेटियाँ सबसे हैं प्यारी बेटियाँ। । माँ बाप की और दादा दादी की। घर में सबकी हैं दुलारी बेटियाँ। । पैसे प्यार में बेटे बिगड़े... Read more

दुआ चाहिए

या ख़ुदा बस यही इक दुआ चाहिए। यार मेरा मुझे बावफ़ा चाहिए। । ज़िन्दगी आज तेरा पता चाहिए। मंज़िलों का मुझे रास्ता चाहिए। । ... Read more

आम आदमी

आम आदमी चूसा जाता है आम की तरह नये क़ानून के नाम पर नयी व्यवस्था के नाम पर रोज़ मंहगाई के नाम पर उधड़ जाती है खाल इसक... Read more

गज़ल

---- गज़ल--- ज़िन्दगी पे लदी उधारी है। चंद साँसों की रेज़गारी है।। दाँव हर खेल हार बैठे हम। वक़्त निकला बड़ा जुआरी है।। आद... Read more

गज़ल

-------- गज़ल-------- कितने आँसू बह निकले हैं इक लम्हा मुसकाने में। जीवन सारा बीता जाये ख़ुद को ही समझाने में।। साना है खू... Read more

गज़ल

---- गज़ल------ मुझे जख़्म दे पर दवाई न दे। भरोसा हमें तू हवाई न दे।। नज़र से कहा कुछ जुबां से कहा। खता हो गयी अब सफ़ाई न द... Read more

गज़ल

किया वक़्त ने ये मेरा फ़ैसला है। क़दम दर क़दम ज़िन्दगी फ़ासला है।। चलो हसरतों का उजाला जलाओ। अँधेरों में रोने से क्या फ़ायदा है... Read more

कविता जन्म लेती है

==== गीतिका==== पराजय जब न हो स्वीकार कविता जन्म लेती है। लगे जब जीत भी इक हार कविता जन्म लेती। । कुचल जायें हृदय के जब अधूर... Read more