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महिला दिवस पर विशेष...

नर और नारी.... एक नहीं दो-दो मात्राएँ हैं भारी।आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए एक दिन सुनिश्चित किया गया है पूरा शहर,अखबा... Read more

पूरे शहर में छाया है..

दीवारें खड़ी हो रही थी यहाँ तो हर घर में कमबख्त तोड़ने का हौसला कहाँ से आया.. गली से चलकर चौराहे से जुड़े हर घर में यही एक जुम... Read more

निखरता जा रहा ..

बढ़ा दी है चौकसी पहले से ज्यादा अब दबे पाँव जाना है लाजमी कैसे मन को समझाऊँ नादान है कैसे इसे बताऊँ मत उलझ उसकी बिखरी अल्कों... Read more

कुछ सिमटे मोती थे.....

झिलमिलाते दीपों की ओट में कुछ सिमटे मोती थे ! उत्सव था प्रकाश पर्व का दूर करना था अन्तस के अँधेरे को! खट्टी-मीठी यादों का आँग... Read more

दीपक जलाते रहें...

दीप जलते रहें जगमगाते रहें हर बरस उत्सव के पल आते रहें! . मिट्टी के दीये पटाखों की झड़ी हमेशा मन को खिलखिलाते रहें! . दुकानों ... Read more

हिन्दी दिवस पर विशेष....

भाषा विचारों की अभिव्यक्ति है जिसके माध्यम से हम एक दूसरे के मनोभावों को जानने और समझने का प्रयास करते हैं प्रत्येक देश में अनेक प्र... Read more

अधिकार तुम्हें था....

अधिकार तुम्हें था रुठ जाने का एक-बार नहीं सौ बार जाने का इस कदर दूर तो न होते तुम मुझसे साँसे भी इन्तजार करें तुम्हारे आने का.. ... Read more

कब आओगे तुम...

पलकें बिछी थी कोरों पर सुवासित की झड़ी उठ रही एक तरंग मानस सागर में जो उथल-पुथल करती ह्रदय देती झकझोर! उम्मीद और आशा की तरं... Read more

आफत.....

आफत... शाम का वक्त था बाजार की रौनक शुरू ही हुई थी कि मेरा महाविद्यालय से आना हुआ! अचानक ही एक हाय-हैलो वाली सखी सामने दिख गयी मुझ... Read more

सबसे बड़ा रुपइया भइया...

शव लादे कन्धों पर पाँव लड़खड़ा रहे थे नन्हीं मुन्नी हाथ पकड़ चल रही थी अपने पैरों पर ... मील दर मील चलता गया करूणा का केन्द्र बनता... Read more

वाह-वाही करके तो देखो..

पत्नियाँ हो जाती हैं खुश बस एक बार वाहवाही करके तो देखो प्रिये! आज तुम बहुत सुन्दर लग रही हो! ये नीली साड़ी तुम पर बहुत जँचती है... Read more

कसौटी प्रेम और विश्वास की....

तुमको न भूल पायेगें.... मित्रता विशेषण ही नहीं अपने आप में विशेष्य भी है महज कुछ शब्दों के क्रम में बाँधा नहीं जा सकता! रक्त के रिश... Read more

दायरा...

फुँहारे पड़ी अचानक आँखों का दर्द समझूँ या बारिश का पानी! कह दूँ मन की व्यथा आज फिर तुमसे उबरने को समझूँ या उलझने को ठानू! द... Read more

बता क्यूँ नहीं देते.....

एक बार ही जी भर के सजा क्यूँ नहीं देते इन रूढ़ियों, परम्पराओं को मिटा क्यूँ नहीं देते! . जन्म से ही पाप समझी जाती हैं बेटियाँ इ... Read more

ऐसी निशानी दे दी....

माँ तुमने ऐसी कहानी दे दी ज़िन्दगी भर की निशानी दे दी! . शक्ल-सूरत सब एक जैसे उम्र भर की निगरानी दे दी!. . देख मुझे हर शक्स ... Read more

रह-रहकर वही बात...

अन्तर्मन को कुरेदती रही रह-रहकर वही बात! नहीं हैं भाव गहरे लेकिन कुरेदते-कुरेदते हो गये घाव बहुत गहरे! पहुँचना है उत्तुंग शिख... Read more

आदमी आदमी को खाये जा रहा है....

आदमी आदमी को खाये जा रहा है जी हाँ सरकार! यही आक्रोश दिल को दहलाये जा रहा है! तुम तलवे तक चाट लेते हो सत्ता में आने से पहले! ... Read more

शाम न हो जाए...

आ लौट चले बसेरे पर अपने सुर्ख शाम न हो जाए! उन्नींदी आँखों में तेरी परछाई फिर आम न हो जाए! . जाना है दूर तलक अभी कुछ पल ठहरते ह... Read more

सात फेरे सात वचन.....

जीवन के बन्धन मजबूत होते हैं अग्नि के फेरों संग सात फेरे सात वचन बन जाते हैं ज़िन्दगी में अहम् हाथ थाम एक-दूजे का निभाते हैं स... Read more

मैं नहीं हूँ कलमकार.....

मैं नहीं हूँ कोई कलमकार बस दे देती हूँ शब्दों को आकार बिन सोचे बिन समझे गढ़ देती हूँ नये शब्दों का भण्डार कभी गहरे कभी छिछले कभ... Read more

विस्मित करता प्रभात....

प्रभात का प्रकाश विस्मित करता हर रोज नयी ऊर्जा का संचार खुल रहे हैं फिर उस देहरी के द्वार! जाना है हर रोज नियमित नयी दिनचर्य... Read more

प्रिय मित्र जुगाड़....

कहीं भी हो तुम्हारे बिना सारे काम अधूरे जान पड़ते हैं! प्रिय मित्र 'जुगाड़' यदि तुम किसी बाबू की टेबल पर लग गये तो कागजी कामो... Read more

मन की मनमानी....

काव्य सृजन-97 कर लिया मन ने अाज फिर मनमानी! चिर निद्रा तल्लीन हुए आँखों ने ठानी! बढ़ता गया समय का वेग तब हाथों ने ठानी! ... Read more

खिलौने का मोह.....

नहीं छोड़ पाया अपने खिलौने का मोह वो बालमन! छीना-झपटी करते रहे घण्टों एक-दूसरे के संग! नजर मेरी टकटकी लगाये देख रही थी उनके गु... Read more

वट सावित्री पूजन....

वट सावित्री... समाज की परिपाटी भी क्या खूब है हम आप मिलकर एक नये समूह का निर्माण करते हैं समूह से समुदाय समुदाय से संस्था और एक संस... Read more

भारत के वीर जवानों

भारत के वीर- . हे!भारत के वीर जवानों तुम मातृभूमि की रक्षा करना! रणयुद्ध में दिखला देना अपनी वीरता का वेग दुश्मन हिल जाए तन... Read more

सरकारी स्कूलों की व्यथा....

. मास्टर जी विद्यालय में बैठ बच्चों से पंखा झलवा रहे थे खुद भी हवा और अपने रिश्तेदार को भी खिलवा रहे थे! सरकारी भोजन से अतिथि... Read more

दो किनारे रह गये...

अपनों के लिए हमेशा हारती रही! जीतने का हुनर धीरे-धीरे भूलती गयी सोचा था एक दिन सब सुलझ जायेगा ये कहाँ मालूम कि मैं इतना उलझ... Read more

जब भी सुनी बात....

जब भी सुनी बात खुले वातावरण की गाँव की कल्पना मन में उभर आयी जब भी मन ऊबा शहर की तंग गली से गाँव का सौम्य, स्वच्छ परिवेश याद... Read more

हाइकु.. .

हाइकू- . तुम और मैं कागज की है कश्ती दूर किनारा! . पलकें गिरी आँसू किये किनारा तुम और मैं! . साथ मिलता रुकते कुछ पल त... Read more

प्रभु तुम ध्यान रखना.. .

हम अबोध हम नादान प्रभु तुम ध्यान रखना! . असत्य के मार्ग से हटे सत्य पर विजय करें! हर घड़ी ये उपकार करना! . हम अबोध हम नादान... Read more

दोहे....

दोहा... . कउन कहै मन के बात, कउन सुनावै तान| मन कैदी होय गा अब,जब से कीन प्रणाम|| . पूजन अर्चन सब करा, दीन दीया जलाय| पूरी हो... Read more

साथ अधूरे थे.. ..

भाव भी गहरे थे राज भी सुनहरे थे बस चेहरे की रंगत फीकी पड़ गयी थी क्योंकि साथ अधूरे थे! . शब्दों को ढालने की कोशिश की लफ्ज... Read more

धर्मगुरु.. .

धर्मगुरू.......(कहानी) दिन भर की चिलचिलाती धूप के बाद शाम की ठण्डकएक अजीब सा शुकुन देती हैमन यही कहता कुछ पल ठहर कर इस एहसास को सम... Read more

मातृत्व दिवस पर माफ़ीनामा. ....

मातृत्व दिवस पर..... (माफ़ीनामा) प्यारी माँ.... माँ तो साक्षात् ममता की मूरत है जाने-अनजाने हम माँ से नाराज भी हो जाते हैं झगड़... Read more

खुदा से मिलन के लिए.. ..

फिजाएँ भी रोक रहीं हवाओं के जरिये! मत जा तू सूना रह जायेगा ये शहर! आसमान भी रोया लिपट कर धरती की बाँहों में! रोक ले उसे... Read more

हर स्त्री का सपना.. ..

माँ बनने का ये सुखद एहसास हर स्त्री के मन में होता है!नौ महीने गर्भ में धारण किये अपने बच्चे के लिए हर सुख और दु:ख सहन करती है! सब क... Read more

मन बेचैन होता है.... .

मन बेचैन होता है... बात जब ह्रदय से जुड़े रिश्तों की हो तो जाहिर सी बात है जरा सी आह भर से मन बेचैन हो उठता है! और जहाँ पर एक पिता... Read more

जिन्दगी का सफर

बहुत खुशनुमा रहा ज़िन्दगी का सफर चलती रही तुम साये की तरह दर-बदर! . आँखें खुले तो चेहरा तुम्हारा सामने जाने कैसे छूट गया फिर भी... Read more

ये अखबार... .

समय की अहमियत बताता ये अखबार कैसे केवल एक दिन का मेजबान दूसरी सुबह ही उसका काम तमाम! सुबह होते ही आँखों की नजर में दिन बीतते ही... Read more

पुराने शहर के मंजर निकलने लगते हैं!

पुराने शहर के मंजर निकलने लगते हैं आँखें जहाँ भी खुले समन्दर निकलने लगते हैं! . नसीहत है प्रेम तुम्हारा मेरे लिए अब तो हर दिल म... Read more

अपनी पीड़ा...

कब तक दबाती फिरोगी अपने दर्द की पीड़ा को इन जुल्मों को सहना पाप है! जागो,उठो अपने अधिकारों को समझो अब और मत होने दो चीर-हरण... Read more

जरुरत ही क्या जख्मों को कुरेदने की...

जरूरत ही क्या उन जख्मों को फिर से कुरेदने की! जिनका अस्तित्व मर चुका हो! मानवीय संवेदनाएँ लुप्त हो गयीं हों! जब तुम्हें स... Read more

मित्र की मित्रता..

तुम्हें शब्दों में परिभाषित करना आसान नहीं है मित्र! प्रेरणा मिली तुमसे अनुभव हुए गहरे श्रृंगारिकता का एक पक्ष हिस्से में दर्... Read more

कुछ देर ठहरो.. .

कुछ देर और ठहरो अभी बातें बहुत बाकी हैं! हवा के इस रुख से परेशान मत हो जाना है, दूर तलक अभी! कुछ पल ठहर कर, फिर से सोचो तुम्हा... Read more

गर्मी के चटपटे...

सूरज भइया के ये नखरे! अब सबके पसीने छुटा रहे हैं हर व्यक्ति की नजर सुबह न्यूज पेपर मिलते ही मौसम तापमान पर जा पहुँचती है मेरी भी नजर... Read more

नेता जी के कारनामे...

मौसमी फलों के सेवन की तरह है ,चुनावी मौसम में नेताओं का दरवाजे पर आना! घर-घर जाकर खाना खाने की प्रथा और मीडिया में छाने की वजह ... Read more

हो गये अब तुम बड़े...

. अब तुम बड़े हो गये बेटा मैं अपने सब अधिकार खो चली! कभी मेरे प्रेम से तुम थे आज मेरी ओर देखना भी सही नहीं हाँ फर्क है, कल और आज मे... Read more

मुश्किलों को नाकाम करना..

हर पहलू पर काम करना परेशानियों को हमेशा नाकाम करना . मिल जाये गर समन्दर में मोती अपनी हसरतों को दिल से सलाम करना! . संघर्ष की... Read more

प्यारी बहना... .

"बहना"कभी आँसुओं के संग मत बहना हमेशा हर घड़ी संग-संग रहना! . भइया है तुम्हारा सबसे प्यारा मम्मी नहीं तो क्या हुआ भइया की परी हो... Read more