राही अंजाना

काशीपुर उत्तराखण्ड

Joined November 2018

अध्यापक व कवि

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ईनाम

सब कुछ सहना है मगर तुम्हें अपना नाम नहीं लेना है, आदमी तभी हो तुम जब तुम्हें कोई ईनाम नहीं लेना है, रखना है रोककर तुम्हें अपने आ... Read more

रूह

जिस्म ऐ माटी में इस रूह को डालता कौन है, बनाकर इन पुतलों को ज़मी पर पालता कौन है, मिलाकर हवा पानी आसमाँ आग पृथ्वी को, वक्त वक्त... Read more

जुगनू

मन्ज़िल की तलाश में खुद राहों को जाना पड़ा, ख्वाबों की तलाश में जैसे आँखों को जाना पड़ा, चाँद सूरज जब रौशनी कर न सके मेरे दिल में, ... Read more

तस्वीर

तस्वीर उसकी खोजते- खोजते खुद अपनी गुमा बैठा हूँ, आज मन्दिर में ही देखो अपनी मस्ज़िद बुला बैठा हूँ, वक्त लगा है अँधेरे समझ के दायर... Read more

खो जाऊं

मैं खो भी जाऊँ तो मुझे ढूंढने मत आना तुम, और आना तो किसी को बोलके न आना तुम, बड़ी देर लग गई है मुझे यहां समझदार होने में, अब प्य... Read more

माँ

एक पल को भी जो मुझको नज़रों से ओझल होने न देती थी, बचपन में जो मैं छुप जाता वो एक पल में ही रो देती थी, ख़्वाबों की दुनियाँ में भ... Read more