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माँ

******** जीवन की अरुणाई माँ है ,भीनी सी अमराई माँ है , त्याग तपस्या की मूरत सी,भावों की गहरायी माँ है | ग्यान म... Read more

रोटी

रोटी (1) मन क्लान्त है दुख शोक से सम्भावनाएँ शून्य हैं | स्पंदन हीन सभी दिखते मनभावनाएँ शून्य हैं | मासूम रोटी को तरसते दर्द को ... Read more

स्वतन्त्रता दिवस

स्वतंत्रता दिवस है आज मिल के गायेंगे उत्सव मनाएँगे यहाँ उत्सव मनाएँगे | छोड़ेगे झूठे रास्ते छोड़ेगे झूठी शान, बदलेगे भाग्य देश का... Read more

दोहे

करना प्रभु इतनी दया , रखना करुणा दृष्टि | उपजे जग में प्रेम धन , ऐसी करना वृष्टि || नवता को धारण करे , अब मनु की संतान | नवल वर... Read more

मुक्तक

1) सुखद परिवर्तन हो जिस रोज चाँदनी फैलेगी उस रोज प्रेम ,करुणा , ममता विस्तार नवल जग रूप सजे उस रोज || (2) ग्यान की लौ का बड़... Read more

नज़्म

बह्र -122 122 122 122 यहां आदमी अब खुदा हो रहा है | जमाना कहां था कहा हो रहा है | अजब हो गये आज हालात सारे – यहां शक्स हर बा... Read more

माँ

माँ जीवन की अरुणाई माँ है , भीनी सी अमराई माँ है , त्याग तपस्या की मूरत सी भावों की गहरायी माँ है | ग्यान मयी गीता गंगा है ... Read more

मैं हूँ माँ

मन के भाव ……… माँ समाहित सकल ब्रम्हान्ड साँसों की गति ,लय ,ताल तू जीवन आधार | ममत्व की असंख्य लहरें , आलोड़ित हों मुझमें , भ... Read more

तुम से हम हम से सफल आराधना

प्रीत पावन मधुर कर स्पर्श से, नेह शीतल कर दिया तापित बदन | कुन्तलों को आ पवन दुलरा गया , रात रानी सा महकता मन अँगन | एक तारा प... Read more

तुम से हम हम से सफल आराधना

प्रीत पावन मधुर कर स्पर्श से, नेह शीतल कर दिया तापित बदन | कुन्तलों को आ पवन दुलरा गया , रात रानी सा महकता मन अँगन | एक तारा प... Read more

तिरंगा

1) रहे विश्व भर में चमकता तिरंगा | गगन चूम ले यह फहरता तिरंगा | हो सबको मुबारक ये गणतंत्र पावन – बने पथ प्रदर्शक लहडरता तिरंगा |... Read more

आल्हा

आल्हा – युग्म गीतिका हम हैं वीर शिवा के वंशज ,राणा की हम हैं तलवार | अरि का शीश काटने को अब ,मचल रही है इसकी धार | दुश्मन से ... Read more

बसन्त

मधु गंध बहे गाये मलंग , प्रिय लागे मुझको ऋतु बसंत | फूली सरसों पीली -पीली , धानी -धानी भाये धरती | मनहर कुसुमोंसे भरी -भरी , लह... Read more

नारी

आल्हा छंद” युग्म गीतिका ••••••••••••••••••••••••••••••• साहस शौर्य शक्ति की प्रतिमा , नारी का जग पर उपकार | दुर्गा लक्ष्मी राज... Read more

नज़्म

बह्र -122 122 122 122 यहां आदमी अब खुदा हो रहा है | जमाना कहां था कहा हो रहा है | अजब हो गये आज हालात सारे - यहा... Read more

सर्दी

प्रत्यावर्तन मानसून का मौसम में बदलाव हर ऋतु में सिहरन छायी सर्दी का ठहराव | एसी कूलर दुबक गये सब , कम्ब... Read more