seervi prakash panwar

Atbara, tec.-sojat city, dis.-pali rajasthan 306104

Joined July 2017

नाम – सीरवी प्रकाश पंवार
पिता – श्री बाबूलाल सीरवी
माता – श्री मती सुन्दरी देवी
जन्म – 5 जुलाई 1997
पता – अटबड़ा, तह-सोजत सिटी, जिला- पाली राजस्थान
शिक्षा – इंजीनियरिंग(वर्तमान)
रुचि- लेखक(writer)
संपर्क – 9982661925
Facebook-www.fb.com/seerviprakashpanwar
Blog-www.seerviprakashpanwar.blogspot. com
www.ekajeebpal.blogspot.com
www.seervibhasha.blogspot.com

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आख़िर वो शायर टूट गया......

वो कलम टूट गया, वो शायर रूठ गया, अपने ही एक रूप में, एक शायर डूब गया, क्या वजूद रहा उस शायर का इन नन्ही पलकों के आगे, आखिर खुद ... Read more

मेरा यार नज़र आएगा....

मोहबत की इन रंगीन तस्वीरो में देखो,ऐतबार नज़र आएगा! इन तस्वीरों से धुल हटा कर देखो, एक अहसास नज़र आएगा! जज्बातो की हैं मेरी यह कहानी... Read more

मुसाफ़िर हूँ कलम का...

सुनो ऐ इश्क़ वालों, मै तुम्हारा एक अख़बार लिखने आया हूँ! जो छोड़ दिया तुमने अपनों को, मै वो एक रूप गढ़ने आया हूँ! आखिर सब कुछ भूल कर न... Read more

मेरा इश्क़...

कोई ख़ामोश हैं मेरी चौखट पर मग़र..आना जाना काफ़ी हैं! कोई घूर रहा हैं नम आँखों से मगर..बात गहरी काफ़ी हैं! आख़िर जी कर भी मरना तो आसां ... Read more

मत रो माँ .आँगन भीग रहा, कहा जलाऊ में फुलझड़ी..

यह अंधड़ सी क्यों चल रही, दीप जलने क्यों नहीं दे रही, क्यों यह सुना-सुना आंगन, फुलजड़ी जलने नहीं दे रहा, आखिर क्यों वो टेढ़ी-मेढ... Read more

ये पल-पल बरसते बादल

ये पल-पल बरसते बादल, मै कैसे नहाऊं आज! ये हर पल रूठते अपने, मै कैसे मनाऊ आज! बरसों कि एक कहानी को भी, ... Read more

तारीख़

अखबारों से मत पूछो कि आज तारीख क्या हैं...उन्हें तो हर रोज बदलना हैं! बीहड़ के बाग़ी से मत पूछो कि मक़सद क्या हैं...उन्हें तो हर रोज ल... Read more

नफ़रत

एक नफ़रत सी हो गयी ए जिंदगी इस शहर से! ख़ुद गर्ज सी हो जिंदगी खुद में ही समा गयी खुद से! बहूत कुछ खोया इस जमी से,कुछ पाया भी होंगा! ... Read more

ज़रा छुपा ले....

ज़रा छुपा ले... चेहरें की इस मुस्कुराहट को, कोई घूर रहा था...कही नज़र न लग जाए! ज़रा छुपा ले...आँखों की इन उम्मीदों को, कोई गुन-गुना... Read more

बेउम्मीद मुसाफ़िर

ज़लज़ला न कहो मुझे... अभी आग की जरूरत हैं! शायर न कहो मुझे.... अभी शब्दों की ... Read more

आख़िरी हम सफ़र...

जो खेल रचा हैं मैने...उसे खत्म करने आया हूँ! जो रूप गढ़ा हैं मैने...उसे मिटाने आया हूँ! आखिर खत्म होती हैं मेरी,इश्क़ की यह दुनिया! ... Read more

ग़ज़ब हो रहा.............

"आखिरकार.... साहब माफ़ करना, सोचने की बात हैं कि, "ग़ज़ब हो रहा था" या "सब कुछ ग़ज़ब हुआ था" साहब..... इसमें अज़ीब यह नहीं कि... Read more

नाजायज़ रहती अग़र माँ...............

"नाजायज़ रहती अग़र माँ तुम तो,वक्त का अहसास नहीं होता, दुध का दर्द तो होता पर,कानों को आहाट की ज़रूरत नहीं होती, माना कि तूम ना दु... Read more

" भाषा"

" भाषा" --सीरवी प्रकाश पंवार शरू कहा से करू थोडा मुश्किल तो हैं। वैसे हमेशा अकेला चलना पसंद ... Read more

आखिर मेरा लल्ला फिर घर आएगा! उम्मीदों का ताज फिर से पहनाएगा!!

आख़िर मेरा लल्ला फिर घर आएगा! उम्मीदों का ताज फिर से पहनाएगा!! इन्तजार हैं इस चौखट पर, कल मेरा लल्ला फिर घर आएगा! थक चुकी हैं आ... Read more

एक तुम्हारा नाम

तुम जिन्दा रहोगी हर पल इस अज़ीब से रूह में! क्यों कि जिन्दा 'था' मै तेरे जीने के तरीकों में! अग़र इतिहास लिखा गया मेरी ऊचाईयों का तो... Read more

जरूरी नही था

ज़रूरी नहीं था की दुनिया के रंग देखूँ, ज़िगर का टुकड़ा बनाना भी ज़रूरी नहीं था, बस ज़रूरी था की तेरे गर्भ में पल भर रहूँ, वैसे तो बेटी... Read more

भूलने को भूल जाता हूँ...

एक जीत है तुझमे की पास खीच ले जाती हैं! कोई बात हैं तुझमे की भूलने को भुला देती हैं! आख़िर कहा-कहा रोकूँ में खुद को कि! ज़िन्दगी नय... Read more

वक्त रात पर अड़े

अब काँच पर पत्थर गिरे, फर्क न पड़ता अब जिद को! अब वक्त रात पर अड़े, इंतजार न होता अब आँखों को! आख़िर कब तक तक़दीर पर डालकर मै खेल ऐसा ... Read more

मेरी ज़िद हैं इस...

मेरी ज़िद हैं इस जग़ह के कण-कण में, मै यहाँ कैसे राह बनाऊँ! मै टूटा हूँ इस जग़ह पर एक पल में, मै यहाँ कैसे घऱ बनाऊँ! ये जो बड़े-बड़े ... Read more

क़ीमत......

जो घर -घर घूमने वाला आवारा समझा हैं मुझे, क्या यही कीमत थी मेरे विश्वास की.... जो चौराहे पर खड़ा कर मुर्ख समझा हैं मुझे, क्या यही ... Read more

हस लेना आज...

हस लेना आज..मेरी परछाईयों पर, तुम जी भर के! आख़िर जिन्दगी की राह पर कब तक आँखे झुकाता मै! रोना पड़े कभी..मेरी धुंधली इन परछाईयों पर,... Read more

राखी

मै कैसे आऊँ बाहर यहाँ हर कोई इश्क़ में जाया दिखता हैं! कही खोये इस जहाँ में ये राखी बिन हाथों नजऱ आती हैं! वज़ह पूछी उनसे तो कह दिया... Read more

दीये की बाती .......

अब उसके बिना जीना दीये की बाती सा लगता! और उसके संग जीना बेवजूद अफ़सानों सा लगता! ऐ ख़ुदा..... एक तेरी आस, पर तू मुख़बधिर बन सब देख ... Read more

नेता और सैनिक

साहब, किसी नेता की गाड़ी का काँच तोड़ने से इतना बवाल क्यों मचा देते हैं। जब किसी सैनिक पर पत्थर फेके जाते हैं तो कहा छुप जाते हो?? पह... Read more

अग़र ना बोली तो...

अग़र ना बोली तेरी हरकतों पर तो मज़ाक समझ लोंगे, मज़बूर हैं तेरे रिश्ते से तो घर का अख़बार समझ लोगें, वो मुख़बधिर तक बन गयी तेरी हैवानिय... Read more

दिल की ज़मी में खो गयी कही....

शहरों के इन अंधेरों से निकाला तो... परछाईयों में खो गयी कही, अफ़साने से लफ्ज़ो से निकाला तो... बेवजूद बातों में खो गयी कही, आंखिर ... Read more

कोई जब रूह गढ़ता हूँ तो.......

कोई जब रूह गढ़ता हूँ तो वो शब्द बन जाता हैं, कोई जब शब्द गढ़ता हूँ तो वो आवाज़ बन जाता हैं, मै क्या दर्द लिखु इश्क़ और इश्क़ बाज का, ज... Read more

"हाऊ मच दिस...

"हाऊ मच दिस... इक दोई चार... ना बेटा, इक दोई चार ना, एक दो तीन चार... सुबह सुबह की यह करतल ध्वनि, कानों को महफूज़ करती थी, आ... Read more

मै इश्क़ विरोधी हूँ....

हम तो उस महफ़िल में ही मर गए थे जहाँ आवाज़ उठाई थी, मेरी उठाई हर एक आवाज को गलत बताई थी, मै इश्क़ करता हूँ यह बात हर बार गिनाई थी, फ... Read more

जो दरारों में दिख जाए......

जो दरारों में दिख जाए उससे उम्मीद क्या करना, जो दिलो में दिख जाए उनसे एतबार क्या करना, घर-घर दो पल की उम्मीद लिए फिरने वालो, जो ह... Read more

उम्मीद न होंगी...

साहब..... शहर में कुछ अशांति सी दिख रही, कोई बोल रहा था कि.... जो किया वो अच्छा ही था, मगर कोई बोल रहा हैं... चौखट के बाहर निका... Read more

देश भक्ति

साहब धूर्त हो तुम की बलिदान का कर्ज पैसो से चुकाते हो, पागल हो तुम की उनके घर जाकर साल ओढ़ाते हो, हमने एक खोया तो क्या हुआ एक ओर व... Read more

तुम जिन्दा रहोंगीं....

तुम जिन्दा रहोगी हर पल इस अज़ीब से रूह में, क्यों कि जिन्दा हूँ मै तेरे जीने के तरीकों में, अग़र इतिहास लिखा गया मेरी ऊचाईयों का तो,... Read more

हमें मंजूर तो है.....

कोई लिख रहा हैं हमकों, हमे मंजूर तो हैं... थोड़े पागल थोड़े मासूम हम, हमे मंजूर तो हैं... हालातों से जले हैं मगर बंजर तो नही, थोडा ... Read more

कुछ पलो की नाराजगी को...

कुछ पलो की नाराजगी से तुम खुद पर दाग मत समझना, जो ना मिलु पल भर तो खुद को अकेली मत समझना, मै गहरा समंदर हूँ जिसका मुक्कमल किनारा क... Read more

मरहम लगा दे ज़ख्मो पर....

मरहम लगा दे ज़ख्मो पर, तड़प रहा में तेरे लफ्ज़ो पर, एक रूप जड़ा था आँखों में, बह रहा हैं आज अश्क़ों में, धूप पड़ी तेरे हाथों पर, छवि ... Read more

ढूंढ़ रहे...

बे वक्त के इन परिंदों को देख़ो....कही आशियाना ढूंढ़ रहे, बे वजह घूम रहे इन दरिन्द्रो को देखो...कही अपना घर ढूंढ़ रहे, आंखिर उड़ानों का... Read more

एक गीत रचा हैं मैने....

एक गीत रचा हैं मैने.... एक गीत रचा हैं मैने........ एक गीत सुना हैं तूने.......... फिर याद मेरी यू आई, आँखों से आँसू निकला, एक ... Read more