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कातिल पूनम की चांदनी...

कातिक पूनम की चाँदनी छिटकी मदिर उन्मादिनी ढुलका रही अमृत-कलश हुई रात नशीली कासनी जुन्हाई न्हाई गुराई निशा कोमल कमनीय ... Read more

जीवन इतना आसान कहाँ---

जीवन इतना आसान कहाँ--- जीवन इतना आसान कहाँ जीने लायक सामान कहाँ विचरते हैं शैतान जमीं पर मिलता अब इन्सान कहाँ मुखौटे लगे... Read more

आओ पुनर्निर्माण करें....

चहुँ ओर बरबादी का मंजर दिखाई देता है ! नहीं सुरक्षित अब कोई घर दिखाई देता है !! अपना या पराया कहें किसे हम और कैसे ! हर एक हाथ ... Read more

आओ पुनर्निर्माण करें....

चहुँ ओर बरबादी का मंजर दिखाई देता है ! नहीं सुरक्षित अब कोई घर दिखाई देता है !! अपना या पराया कहें किसे हम और कैसे ! हर एक हाथ ... Read more

जीने को ये जहान चाहिए...

जीने को ये जहान चाहिए उड़ने को आसमान चाहिए रात में चाहूँ चाँद तो क्या दिन में तो दिनमान चाहिए जीवन जीवट संग जीने को सुलगता ए... Read more

आरक्षण...

आरक्षण के नाम पर, प्रतिभा का हो रहा हनन ! क्या यह अन्याय नहीं है, मन में करो मनन !! मन में करो मनन, ए ! कानून बनाने वालों ! सम... Read more

पानी है जब तक, जीवन है....

बसता है जीवन पानी में खिलता है जीवन पानी में सूरज का गोला भी थककर पाए नव जीवन पानी में नेह-निमंत्रण पा उदधि का उतर आए चंदा ... Read more

हुईं आज से हम-तुम समधन....

पाया हम दोनों ने ही सम धन हुईं आज से हम-तुम समधन मैंने तुमसे और तुमने मुझ से पाया न रत्तीभर भी कम धन 'सभ्या' मिसाल है सभ्यता क... Read more

मैं तो अकेली चलती चलूंगी...

मैं तो अकेली चलती चलूंगी, धुन में अपनी मंजिल की परवाह नहीं मुझे कांटों की, चाह न किसी बुजदिल की छुपकर कितने ही वार करे, ओछी हरकत... Read more

मैं तो अकेली चलती चलूंगी...

मैं तो अकेली चलती चलूंगी, धुन में अपनी मंजिल की परवाह नहीं मुझे कांटों की, चाह न किसी बुजदिल की छुपकर कितने ही वार करे, ओछी हरकत... Read more

तब दर्द तो दिल को होता है ....

झूठ के जब पाँव पसरते सच एक कोने में रोता है । गम खाने वाला, रात को आँसू पीकर जब सोता है । तब दर्द तो दिल को होता है !... Read more

आई पावस ऋतु मनभावन

आई पावस ऋतु मनभावन घनन-घनन-घन बरसे सावन हुलस रहा सृष्टि का कन-कन अद्भुत ये कुदरत का आँगन सूखतीं नदियाँ, ताल, सरोवर सूखी हरि... Read more

कहाँ गए मेरे दिन वे सुनहरे....

कहाँ गए मेरे दिन वे सुनहरे ! संबंध सुखों से जब थे गहरे ! स्वच्छंद गोद में प्रकृति की, होती थीं अनगिन क्रीडाएँ ! ... Read more

तुम हो चाँद गगन के.....

मनमोहक ये छवि तुम्हारी इस मन में बसा ली है ! पल पल जपता नाम तुम्हारा दिल बन गया पुजारी है ! बेवफा ना हमें तुम मानो हमें बस ... Read more

अपनी जमीं पर.....

आसमां-सा ऊँचा उठकर झिलमिल सपनों में खो जाऊँ ! अपनों की ही आर्त पुकार एक बधिर वत् सुन न पाऊँ ! सागर - सी गहराई पाकर ... Read more

तेरी शुभ्र धवल मुसकान

मेरे गम के तम पर तेरी, शुभ्र धवल मुस्कान ! चाँदनी बिखर जाती है, ज्यों अँधेरी रात में ! स्वप्न सुनहरे आ ह्रदय में, गम के बादल... Read more

तेरी- मेरी एक कहानी

तेरी-मेरी एक कहानी --- विरह की देखो तोप दगी है दिल में बादल के चोट लगी है ! नेत्रमय हो गया तन सारा अश्कों की कैसी झड़ी लगी है... Read more

तेरे बिना

दिल कहीं न लागे तेरे बिना ! सुख सुख ना लागे तेरे बिना !! अब मेरा इस पर जोर कहाँ ! जाने कहाँ ये भागे तेरे बिना !! भोजन में अब... Read more

मन मेरे तू सावन सा बन

मन मेरे तू सावन-सा बन ! मृदुल मधुर भावों से अपने कर दे जग को पावन-पावन मन मेरे तू सावन-सा बन ! मिट जाए चाहे तेरी हस्ती हरी-भर... Read more

500 और 1000 के नोट बंद होने पर -

कैसी विवशता आई, खुल गयी भरी तिजोरी पाई- पाई निकल गयी जोड़ी जो चोरी- चोरी जोड़ी जो चोरी-चोरी, खुल गयी उसकी पोल मोदी जी क्या सम... Read more