हम सविता मिश्रा दूसरों के दर्द को भी अपना समझते है, महसूस करते है| शायद इसी लिए दर्द पर ही ज्यादा लिखते है | हम कोई कवियत्री नहीं है बस मन में जो भाव उठापटक कर परेशान करते है उन्हें ही कलम बद्ध कर लेते है | अब इसे आप कविता-कथा कह लीजिए या बस यूँ ही हमारे मनोभाव |
लेखन विधा …लेख, लघुकथा, कहानी तथा मुक्तक, हायकु और छंद मुक्त रचनाएँ |
ब्लाग – मन का गुबार
2012.savita.mishra@gmail.com

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मेरी बिटिया बड़ी नाजो से पली

मेरी बिटिया बड़ी नाजो से है पली इतने लोगों की रसोई उससे कैसे बनी।| सास-ननद चलाती हैं हुक्म दिनभर बिटिया तू क्यों रहती है यूँ सहक... Read more