Saurabh purohit M.B.A from Jhansi
working in Delhi.

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रिश्तों की गांठों को सुलझाने कौन आएगा।

दिल तो दिल है इसको समझाने कौन आएगा रिश्तों में पड़ी गांठो को सुलझाने कौन आयेगा। महफिल में यूँ तो लोग बहुत खुश नज़र आये, जो शख्स न... Read more

ईंटों का ढांचा भी घर लगता है...।

सदियों सा सिर्फ एक पहर लगता है, पानी सादा भी अब तो ज़हर लगता है। आँखें भारी है कुछ नशे सा आलम है, कल की ही नज़र का असर लगता है।... Read more

दिल तो दिल है,समझाने कौन आएगा।

दिल तो दिल है इसको समझाने कौन आएगा रिश्तों में पड़ी गांठो को सुलझाने कौन आयेगा। महफिल में यूँ तो लोग बहुत खुश नज़र आये, जो शख्स न... Read more

मकान देख रखे है ज़माने वाले।

कभी तन्हाई में सुध ना लेता था कोई, ये कहाँ से आ गए है हक़ जताने वाले। रातें थी तन्हा दिल अकेले भी खुश था, कुछ यार मिल गए है अब स... Read more

किस्से पुराने याद आये है।

आज किस्से फिर पुराने कुछ याद आये है, कुछ तज़ुर्बे है जो फिर लिखाये गए हैं घर की दीवारों को शीशे में बदला क्या मैंने, हर एक हाथ ... Read more

मोहब्बत जिनके मन में है......

औरो से युहीं कोई खफा नहीं होता, रूठते है वही मोहब्बत जिनके मन में है| कोशिशे कितनी भी हो कम ही रहेगी ज़माने की, मिल कर ही रहेंग... Read more

खबर कर दो.....!

चंद लम्हात ही सही,मुझे नज़र कर दो, तुमसे मिलने ही आया हूँ,खबर कर दो। कई फरियादें उठती है,बिछड़ जाने की, चले आओ किे दुआएँ, बेअसर क... Read more