धीरे – धीरे बढ़ते कदम।
नया सवेरा करने रौशन।।

दो कदम तुम भी चलो,
दो कदम हम भी बढ़ें,
करने को शब्द गुंजन।

कुछ हाँथ तुम भी बढ़ाओ,
कुछ हाँथ हमारे भी बढ़ें,
करने साहित्य में हवन।

सुगमित अमिय हुआ सवेरा ,
छटेगा तम जो था घनेरा,
अब बनेगा उत्कृष्ट चमन।

सबका साथ सबका विकास,
दृढ़ निश्चयी होवे विश्वास,
महके ये सारा उपवन।

धीरे – धीरे बढ़ते कदम।
नया सवेरा करने रौशन।।

सौम्या मिश्रा अनुश्री

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