suresh sangwan

Joined November 2016

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जब तलक ज़िंदगी है फूल की महकता है

जब तलक ज़िंदगी है फूल की महकता है जलता जितना है सोना आग में संवरता है --सुरेश सांगवान 'सरू' Read more

हर तरफ़ फूल ही फूल खिलाते चलिये

हर तरफ़ फूल ही फूल खिलाते चलिये इस क़दर चमन सारा महकाते चलिये रखना कलाम रामानुज को दिल में अपने हर तरफ ज्ञान के दीप जलाते चलिये... Read more

छलका दिये आंसू देखा जब सूखा हमने

छलका दिये आंसू देखा जब सूखा हमने गुलशन इसी तरहा बाख़ूबी सींचा हमने रंग-ए-वफ़ा घुलता गया हवाओं में हाये पाया दर्द में मोहब्बत को... Read more

यूँ घेर लेते हैं झोंके उलझनों के मुझको

यूँ घेर लेते हैं झोंके उलझनों के मुझको तमाम ज़रूरी बातें काम की रह जाती हैं अंदाज़े बयां ऐसा है सनम तेरी खामोशी का जो तू नहीं क... Read more

लिखती है तब ही कोई नज़्म शायरा

लिखती है तब ही कोई नज़्म शायरा खाती है गहरा जब ज़ख्म शायरा मीठी सी धुन में जज़्बात कहे अपने समझती ज़िंदगी को इक बज़्म शायरा ... Read more

ज़बान पे कुछ और है दिल में है कुछ और

ज़बान पे कुछ और है दिल में है कुछ और जिस्म के दर्द और हैं दिल के हैं कुछ और ज़माने भर की बातें वो मुझसे बोलता रहा मैने जो सुनन... Read more

तेरे कहे का था यकीन बहुत, जाता रहा

तेरे कहे का था यकीन बहुत, जाता रहा कमान में जो तीर था जाने कहाँ जाता रहा कुछ और नही वो मेरा ख्वाब सुहाना था विसाल-ए-यार का... Read more

ज़ज़्बात अपने हैं ख़यालात अपने हैं

ज़ज़्बात अपने हैं ख़यालात अपने हैं लफ्ज़ मगर मैने चुराए हैं ज़मानेवाले कभी आन पर बनी कभी शान पर बनी वादा-ए-वफ़ा हमने निभाए ... Read more

दुनियाँ भर की खाक़ हम छानते रहे

दुनियाँ भर की खाक़ हम छानते रहे ज़िंदगी में ज़िंदगी से भागते रहे कुछ राबता तो है उस शहर से मेरा पलके बिछाए रास्ते मुझे ताक़ते ... Read more

ठहरे हुए पानी में पत्थर फेंकते रहे

ठहरे हुए पानी में पत्थर फेंकते रहे हिलता हुआ फिर अक्स अपना देखते रहे शहर में तूफ़ानों का आना- जाना लगा रहा हैरान नज़र भी ... Read more

ज़ुल्फ़ो के पेच-ओ-ख़म में गिरफ़्तार रहने दो

ज़ुल्फ़ो के पेच-ओ-ख़म में गिरफ़्तार रहने दो तीर- ए- नज़र ही काफ़ी है तलवार रहने दो ठोक़रों ने सिखा दी दुनियाँदारी अच्छी हा... Read more

जिंदगी का वो अपनी नज़राना लिए फिरता है

जिंदगी का वो अपनी नज़राना लिए फिरता है नज़रानों में हसरत-ए-मयख़ाना लिए फिरता है लबों पे तेरे आकर हर बात ग़ज़ल लगती है वर्ना ... Read more

कहना चाहती है इक़ सुनहरी सी मुस्कान कुछ

कहना चाहती है इक़ सुनहरी सी मुस्कान कुछ रस्म-ए-उल्फ़त का मुझको होता है इम्कान कुछ वो दिलक़श लम्हा इक़ बीज़ हरा छोड़ गया दिल में ... Read more

राहें बहारों की कौन देखे हम खिज़ाँ के पाले हुए हैं

राहें बहारों की कौन देखे हम खिज़ाँ के पाले हुए हैं काँटों से नहीं ख़ौफ़ ज़रा फूलों से हमको छाले हुए हैं बरसात की तरहा बरस प... Read more

इंसान कभी बुरे नहीं हालात बुरे होते हैं

इंसान कभी बुरे नहीं हालात बुरे होते हैं दिल से होते हैं साफ़ जो लोग खरे होते हैं रह-ए-तलब में ना हो परेशां ज़ुल्फो की तरहा ल... Read more

चल दिया सफ़र पर अब मिलना किससे मिरा हो

चल दिया सफ़र पर अब मिलना किससे मिरा हो क्या मिले कैसा मिले अच्छा हो क़ि बुरा हो सच से अगर टूटता है दिल-ए-नाज़ुक किसी का ... Read more

आएगी वो भी सिमटकर बहार क्यूँ ना हो

आएगी वो भी सिमटकर बहार क्यूँ ना हो उसके तस्व्वुर से दिल गुलज़ार क्यूँ ना हो दिल में शहनाई- सी बजे उसकी बातों से ना सुनूँ अब... Read more

मोहब्बत की तुमसे रवानी चली है

मोहब्बत की तुमसे रवानी चली है अब जाके मिरि जिंदगानी चली है मसला हमसफ़र का हो या मंज़िल का बात वही फिर से पुरानी चल... Read more

यूँ कि हम बोलते बहुत हैं पर कहना नहीं आता

यूँ कि हम बोलते बहुत हैं पर कहना नहीं आता जीये रहगुज़र में दिल में तो रहना नहीं आता आने से चला है किसी के न जाने से रु... Read more

दुनियाँ-ए- महफ़िल में हँसना हँसाना जान गये

दुनियाँ-ए- महफ़िल में हँसना हँसाना जान गये हम अपने दर्द छिपाकर मुस्कुराना जान गये तमन्ना थी चाँद तारों में हो अपना भ... Read more

आज का दिन भी कल के रोज़ सा है

आज का दिन भी कल के रोज़ सा है मे गंगू तेलि ये राजा भोज सा है ज़ुल्फ ही देख लेती है मौसम यहाँ नज़रों में तो हरसू इक़ सोज़ स... Read more

नहीं उम्र भर तबियत कुछ देर बहल जाएगी

नहीं उम्र भर तबियत कुछ देर बहल जाएगी तमन्ना -ए-दिल है जहाँ फिर मचल जाएगी वो परबत ज़रूर है पर पत्थर का नहीं दिखेगी आँच ज़र... Read more

बशर कैसे बचे बचा तो खुदा भी नहीं

बशर कैसे बचे बचा तो खुदा भी नहीं ज़िंदगी कुछ इश्क़ के सिवा भी नहीं दिल-ए-बीमार का हाल यही होना था कोई दुआ भी नहीं क... Read more

ईश्क़ जिसे लाचार कर दे मैं वो नहीं

ईश्क़ जिसे लाचार कर दे मैं वो नहीं आँख को ख्वाबों से भर दे मैं वो नहीं चाहिए तो बस तेरी नवाज़िश चाहिए निस्बत हो जिसको दौलत ... Read more

सलाम आया है अभी पैग़ाम बाकी है

सलाम आया है अभी पैग़ाम बाकी है उठा नहीं अभी तक वो गाम बाक़ी है तबीयत हो कि मौसम बिगड़ ही जाता है इनकी भी कोइ बननी लगा... Read more

शोख़ नज़रों में हाय मैख़ाना लिए फिरता है

शोख़ नज़रों में हाय मैख़ाना लिए फिरता है फिर भी हर दिल ख़ाली पैमाना लिये फिरता है दिल की शमाँ जले गर तू निगाह भर के देख ले आँखो... Read more

बग़ैर बरसे ही घटाओं को खोते हुए पाया हमने

बग़ैर बरसे ही घटाओं को खोते हुए पाया हमने ख़ेल तमाशा ही उल्फ़त में होते हुए पाया हमने उड़ती खबरें जलती तस्वीरें अख़बारी तहरी... Read more

तमन्ना थी ज़माने में कोई हमसा निकले

तमन्ना थी ज़माने में कोई हमसा निकले कोइ फिर उससे मोहब्बत का सिलसिला निकले गर है कोई लय कोई तर्ज़ ज़िंदगी मे... Read more

तमाम जिस्म की नज़र बना के देखिये हुज़ूर

तमाम जिस्म की नज़र बना के देखिये हुज़ूर दुनियाँ-ए-नज़र सि नज़र बचा के देखिये हुज़ूर क्या इम्तिहान-ए-ज़ब्त अगर वो सामने नहीं... Read more

बैठकर साहिल पे लहर का उठना देखेंगे

बैठकर साहिल पे लहर का उठना देखेंगे जल उठी शमां अब परवाने का मिटना देखेंगे खोकर खुद को ए नादां तू किसको ढूँढने चला लोग श... Read more

उस पे दुनियाँ लुटाने को जी चाहता है

उस पे दुनियाँ लुटाने को जी चाहता है सुलूक-ए-इश्क़ आज़माने को जी चाहता है बड़े तकल्लुफ में गुज़री है ज़िंदगी कल तक आज कुछ ... Read more

ख़ौफ़ के मंज़र यादों से मिटाओ फिर से

ख़ौफ़ के मंज़र यादों से मिटाओ फिर से सब मिलजुल कर मीठे नगमें गाओ फिर से बेरंग से मौसम हरसू हैं फ़िज़ाओं में चलो त्योह... Read more

खुशियों के अब जाने कहाँ घराने हो गये

खुशियों के अब जाने कहाँ घराने हो गये इस दिल को मुस्कुराए हाय ज़माने हो गये नज़र रह गई तकती मौसम-ए-बरसात को बादलों के जाने अब ... Read more

या खुदा कुछ भी मेरी क़िस्मत का कर दे

या खुदा कुछ भी मेरी क़िस्मत का कर दे रस्ता मोहब्बत से मिरे घर का कर दे मुझे खिड़की से बुलाए है चाँद रात को दिन कोई म... Read more

फूल में महक जबां पे फूलों का सिलसिला चाहिए

फूल में महक जबां पे फूलों का सिलसिला चाहिए इक छोटा सा मक़ां हो न महल ना क़िला चाहिए वही खिड़की वही मंज़र सूना सा गलियारे का ... Read more

ख्वाहिशों में खुद को उलझा के निकलती हूँ

ख्वाहिशों में खुद को उलझा के निकलती हूँ ज़िंदगी तिरे दर से में मुरझा के निकलती हूँ होते होते शाम के ये उलझ ही जाती है रोज... Read more

चलो आज ये बात भी आर-पार हो जाये

चलो आज ये बात भी आर-पार हो जाये दुश्मन दुश्मन ही रहे यार -यार हो जाये ये जो उछालते हो गिरा- गिरा के उठाते हो कहीं ऐसा न ... Read more

गुलशन-ए-दिल जिसने महकाया है

गुलशन-ए-दिल जिसने महकाया है वो मौसम अब जाकर आया है तान के चादर सोइ थी कब से उन्हीं ख्वाहिशों ने जगाया है क... Read more

कल ऐसा क्या लिये बैठा है

कल ऐसा क्या लिये बैठा है आज को मुश्किल किये बैठा है वो क्यूँ वफ़ाओं से ख़ाली है किस बाज़ार में दिये बैठ... Read more

पढ़नी होगी क्यूंकि क़िताब कोर्स की है

पढ़नी होगी क्यूंकि क़िताब कोर्स की है नहीं शौक़-ए-पढ़ाई हम पर फोर्स की है हिंदी एंग्लिश तमिल तेलुगू उड़ीया हिन्दुस्तानी ... Read more

ज़रा बज़्म को सजाइये इक बार

ज़रा बज़्म को सजाइये इक बार ग़ज़लें दिल से सुनाइये इक़ बार हक़ीक़त भी होगा फ़साना यही यकीं-ए-उल्फ़त दिलाइये इक़ बार ... Read more

पिज़्ज़ा बर्गर के मुक़ाबले बहुत पिछड़ी है

पिज़्ज़ा बर्गर के मुक़ाबले बहुत पिछड़ी है अब तो बस मरीज़ ही खाय दलिया खिचड़ी है जहाँ अश्क़ गिरें उठे आग वहाँ से कैसे... Read more

सारे जहाँ को छोड़कर आना

सारे जहाँ को छोड़कर आना इक़ इशारे पर दौड़कर आना यही तो है शर्त मोहब्बत की रुख़ हवाओं का मोड़कर आना जो महका दे ता-उम्र के ल... Read more

शहर से गुज़रे तो भटके हुए चेहरे मिले

शहर से गुज़रे तो भटके हुए चेहरे मिले कुछ ढूँढने ज़मीं तक लटके हुए चेहरे मिले होता कोइ हमदर्द कोइ हमनवां तो फिर क्यूँ हर संग... Read more

आफ़ताब में आग और बादल में पानी से

आफ़ताब में आग और बादल में पानी से बहुत खुश हूँ ए आसमाँ तेरी सायबानी से प्यारा इक ख़्वाब पलक पे आकर बैठ गया महक उठा है मोहब्... Read more

मजबूरी है आवारगी फ़ितरत नहीं मेरी

मजबूरी है आवारगी फ़ितरत नहीं मेरी रहने को घर ही ना मिले ये और बात है काली घटाओं को देखकर दिल खुश था बहुत सूखा मेरा ... Read more

ए ज़िंदगी मुझको तेरी रस्म- ओ- राह देखनी है

ए ज़िंदगी मुझको तेरी रस्म- ओ- राह देखनी है उठाए दिल में क़सक जब उठे वो निगाह देखनी है वक़्त जहाँ जा के ठहरता है मुझे वो शै दि... Read more

ना मिले गर सज़ा तो ज़ुर्म करने में हर्ज़ क्या है

ना मिले गर सज़ा तो ज़ुर्म करने में हर्ज़ क्या है कौन जाने इस दुनियाँ में इंसाफ़ की तर्ज़ क्या है तोड़ा गया इस से पहले के फ़ूल ... Read more

खुदा तो नहीं देखा पर एहसास मिलता रहा है

खुदा तो नहीं देखा पर एहसास मिलता रहा है पिता बन के मेरे साथ हमेशा चलता रहा है न दिखा सके किसी रात में ख़ौफ़ अंधेरे मुझको एक ... Read more

अदा कुछ और आप सीखिए ना सीखिए

अदा कुछ और आप सीखिए ना सीखिए अपने काम में दिल लगाना सीखिए सर- ए- रह मिल जाएगी ज़िंदगी बंदे दिल की गली में आना-जाना स... Read more