Poet, story,novel and drama writer
Editor-in-Chief, ‘Mahila Vidhi Bharati’ a bilingual (Hindi -English)quarterly law journal

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साकार

मन में रहे हमेशा आशा और विश्वास मत भटको अधेरों में कभी न होना निराश मत करो कभी तनाव मत करो कभी विवाद जब तय नियति विधान फिर क... Read more

साकार

मन में रहे हमेशा आशा और विश्वास मत भटको अधेरों में कभी न होना निराश मत करो कभी तनाव मत करो कभी विवाद जब तय नियति विधान फिर क... Read more

कविता

रविंद्रनाथ टैगोर की बंगला कविता का हिंदी अनुवाद कभी कभार हो जाती है तुम से मुलाकात ओ प्रिय प्रभु, क्यों नही मिल जाते तुम हो ज... Read more

कहाँ हो चिड़िया तुम?

कहाँ हो चिड़िया तुम? कूछ वर्ष पहले.तो तुम खूब आती थी गाती थी सुबह सवेरे घर की खिड़की के उपर या किसी खाली स्थल पर धौंसला बनाती... Read more

पहचान

चलता रहता है सतत वार्तालाप, कभी उलाहना देते हुए, कभी सजदा करते हुए, कभी आँसूओ का सैलाब कभी तुम्हारी पुलक का अहसास कभी मौन मे... Read more

कविता

मांग मेरी अनन्त सत्ता से पक्षी-पवन-सी हो उडान मेरी बन जाऊं धरती और आकाश सूर्य से अवतरित होता किरणों का प्रकाश धूम आऊं हर नक्ष... Read more

सूरज

. सूरज सूरज, तू न होता . धरती पर जीवन न होता न होती नदियां और सागर न पानी के मीठे... Read more

सूरज

. सूरज सूरज, तू न होता . धरती पर जीवन न होता न होती नदियां और सागर न पानी के मीठे... Read more

याद तेरी अमलतास

याद तेरी अमलतास आज तुम नहीं हो मां याद कितना आती हो सूने पलों में मुझे बच्चों-सा रुलाती हो कभी कभी लगता गोद में लो गी उठा। वै... Read more

बाल कविता

बाल कविता पंछियों को देख उड़ता मै भी अब उड़ना चाहूं पूछ रही हूं मैं मां से पंख मैं कैसे उगाऊं उड़ रही उड़न तश्तरी पर नह... Read more

प्रश्न

प्रश्न चलता रहता है सतत वार्तालाप, कभी उलाहना देते हुए, कभी सजदा करते हुए, कभी आँसूओ का सैलाब कभी तुम्हारी पुलक का अहसास ... Read more

नमस्कार बार बार

प्रभु मूरत हर उगते सूर्य में हर फूल में हर किसलय में हरी घास पर ओसकणों में मेरे मन की हर धड़कन में भोले भाले हर बचपन में मेरे त... Read more

दोहे मां पर

मां मन की ज़मीर है, देह की है काया काशी काबा है वहीं, जग की है माया । मां से ही हैं हम सब, मां बिना न कोई कृष्ण भये अवतरित, जब ... Read more

हिंदी

हिंदी की राह में कैसे बने गा कोई दीवार जब उसे मिल गया है मेरा, तुम्हारा हम सब का साथ। Read more

परिवर्तन

परिवर्तन क्या खो दिया है हमने क्या पा लिया है हमने कितने कच्चे हैं हम अपने हिसाब के हीरों के बदले ठीकरों का व्यापार किया ह... Read more

भारत देश को मेरा नमन

भारत देश को मेरा नमन सदा प्रेम का पाठ पढ़ाता युद्ध इसे कभी नहीं भाता संस्कृति विहग है यह अपना देश देश संस्कार जगाता ... Read more

क्या लिखू?

मैं ने सोचा आज एक नायाब कविता लिखू सोचा तो किस पर लिखूं सोचा चांद पर लिखूं सदियों से जिसकी उपमा दी जाती है प्रिया के सुंदर चेहर... Read more

बाल कविता

बाल कविता बच्चों को दिवाली उपहार देखो खेले मेरी मुनिया भांति भांति के सुंदर खेल। कभी उछाले गेंद हवा में कभी पलंग के नी... Read more

पुकार

पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं जानती थी तुम नहीं आ सकते थे क्योकि पुजारियों ने तुम्हे बन्द कर रखा ह... Read more

पुकार

पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं जानती थी तुम नहीं आ सकते थे क्योकि पुजारियों ने तुम्हे बन्द कर रखा ह... Read more

नमन

भारत देश को मेरा नमन सदा प्रेम का पाठ पढ़ाता युद्ध इसे कभी नहीं भाता संस्कृति विहग है यह अपना देश देश संस्कार जगाता ... Read more

हिंदी

हिंदी हिंदी भारत माँ की बोली माँ के दूध -सी मिश्री घोली उसके सब हैं,वह है सबकी जैसे रिश्ता दामन-चोली हिंदी है हर मुख की शो... Read more

यादों की छांव.में

अरसा बीता चले गये तुम फिर भी दिल से याद न जाये जाते सावन की बदली ज्यों मुड़ मुड़ आकर मेंह बरसाए। कूक रही है कोयल तब से पप... Read more

बाल कविता

पढ़ना चाहें गे एक बाल कविता। थोड़े समय के लिए बन जाये बच्चे। पंछियों को देख उड़ता मै भी अब उड़ना चाहूं पूछ रही हूं मैं मां से... Read more

अहसास

अहसास कितने ही बीत गए वर्ष हर्ष में भी, विषाद में भी जिन्दा हूँ क्यों,में मर नहीं सकी अब तो हो गई है आदत सहज सहज जीने की... Read more

आज की स्त्री

आज की स्त्री आंखों में विश्वास भावों में संवेदना विचारों में प्रकाश फैसलों का बोझ उठाती वह करती है सड़क पार कभी नहीं लगा उसे ... Read more

युद्ध और शान्ति

नहीं देखता भारत स्वपन कभी विश्व विजय के नहीं किये युद्ध किसी देश से उसे गुलाम बनाने के लिये या उस पर अधिकार जमाने के लिये या उ... Read more

पुकार

पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं जानती थी तुम नहीं आ सकते थे क्योकि पुजारियों ने तुम्हे बन्द कर रखा ह... Read more

सच

सच यह सच है पत्थर की लकीर-सा जब मिलती हैं सहस्र भुजाएँ लहलहाने लगते हैं खेत भर जाते अन्न के भंडार नहीं रहता कोई भूखा पेट श... Read more

खुशी

बहुत दिनों के बाद आज खालिस खुशी ने डाला फेरा जैसे उषा का आंचल हो गया सुनेहरा पर्वत से छलकती आती जैसे नदिया की धार तपते मौसम क... Read more

चाह

चाह मेरे ह्रदय का हिमालय बार बार उठ खड़ा होता है वह फैल जाना चाहता है निरन्तर विस्तार पाते गगन की तरह वह मिलना चाहता है हर ... Read more

सभ्यता

नहीं बनाई जा सकती कोई भी सभ्यता ईंट और गारे से लौहे और औजारोंं से बनती है सभ्यता जन जन के कर्म से साफ सोच और संवेदना के मर... Read more

सभ्यता

नहीं बनाई जा सकती कोई भी सभ्यता ईंट और गारे से लौहे और औजारोंं से बनती है सभ्यता जन जन के कर्म से साफ सोच और संवेदना के मर... Read more

कहर

बार बार रहा कांप धरा का धरातल मच रहा है तांडव तनाव व् विनाश का चाँद-सितारों पर विजय रथ दौड़ाने वाला जल-थल-हवा में विजय-दुदंभि... Read more

दामिनी जिंदा है अभी

आज निर्भया यानी दामिनी या असली नाम ज्योति का जन्मदिन है। ज्योति की मां ने आज पत्रकार को उसका कमरा खोल कर दिखाया। निर्भया पर तब लि... Read more

हिंदी

सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं हिंदी हिंदी भारत माँ की बोली माँ के दूध -सी मिश्री घोली उसके सब हैं,वह है सबकी जैसे रिश्ता... Read more

खबर।

खबर बहुत पहले की प्रकाशित मेरी एक रचना । तडफती धूप में खाली खेतों की फट्टी बिवाईयां पर खडा है वह आकाश पर नजर गड़ाये कहीं मे... Read more

पेड़

मेरा पेड़ तपती दुपहरी में जलाता है सूर्य जब हर इमारत, हर सड़क तब भी खड़ा रहता अटल मेरा पेड़ अचल एक ठांव हर राहगीर, हर रेहड़ीवाल... Read more

शब्द

शब्द जब मैं शब्दों के बीच होती हूँ अकेली नहीं होती साथ चलता है समय आकाश के संग धरती इन्द्र धनुषी हो जाती है शब्द रिश्ते-नाते... Read more

बदलाव

पुरुष वर्चंस्व का विरोध करती फिर भी पुरुष के लिये सजती नहीं बिठा पायी तालमेल नारी कथनी करनी में अंतर करती अच्छा हो छोड़े वह अप... Read more

पहचान

अपने से पहचान कर लो । अपने से पहचान कर लो क्या किया जीवन में अब तक दो गे धोखा खुद को कब तक चल रही हैं सांसे जब तक कुछ तो अच... Read more

यमुना, एक मरन्नासन नदी

यमुना , एक मरनासन्न नदी कहां हो तुम कृष्ण? गाए चराते थे बांसुरी बजाते थे यमुना के किनारे रास रचाते थे बज उठते थे सृष्टि के ... Read more

चिड़िया

चिडिया उड़ती चिडिया गाती चिडिया मन को बहुत लुभाती चिडिया सुबह सवेरे घर की छत पर गीत सुनाने आती चिडिया पेड़ पेड़ पर ड... Read more

गज़ल

कौन है जो बादलों की ओट से मुस्काता रहा कर के ईशारे रोशनी के पास बुलाता रहा आखों पर परदे थे पहचान नहीं पाये हम उसे बारिश की बौछ... Read more

आईना

आईना कहीं नहीं हूँ मैं अपनी कविता में नहीं है मेरा कोई सपना या फिर कोई अपना हैं तो बस आंसू या फिर आहें या फिर कराहें जो कि... Read more

अहं

अहं जब जब सोचा पा ली है विजय मैंने अपने अहं पर पता नहीं क्यों जरा- सी-ठोकर लगने पर फिर किसी गहराई से फुफकार उठता है अहं कितन... Read more

बेटियां

जब से बता दिया है उसे नही है भेद लड़का हो या लड़की वह चहकने लगी है स्कूल मे , कालेज में सेना में, कार्यलय में ज्ञान के बड़े बड़े प... Read more

बेटियां

जब से बता दिया है उसे नही है भेद लड़का हो या लड़की वह चहकने लगी है स्कूल मे , कालेज में सेना में, कार्यलय में ज्ञान के बड़े बड़े प... Read more

वर्षा में नदी

सुस्त-सी पड़ गई नदी अचानक उठ खड़ी होती है वर्षा में वर्षा में वह निकाल देना चाहती है उसकी नस नस में भरा गया जो जहर मुक्ति के रास्... Read more

चाह

वंदना कविता बन अम्बर-सी फैल जाऊं शून्य सभी स्वयं में भर बादल-सी लहराऊं, जितने भी संतप्त ह्रदय सन्ताप हैं धरा के बहा दूं ब... Read more