Santosh Shrivastava

भोपाल , मध्य प्रदेश

Joined November 2018

लेखन एक साधना है विगत 40 वर्ष से बाल्यावस्था से होते हुए आज लेखन चरम पर है । यूनियन बैंक मे कार्यरत के दौरान बैंक के मैगज़ीन, भारतीय रिजर्व बैक के अलावा अन्य बैंक पत्र पत्रिकाओं के अलावा राष्ट्रीय स्तर की मैगजीन में सतत लेखन , काम्पटिशन में अनेक पुरस्कार प्राप्त । कवि गोष्ठी, सेमिनार, परिचर्चा में सहभागिता एवं मंच संचालन। आकाशवाणी से कहानी , कविता पाठन प्रसारण, नाटक स्थानीय एवं हवामहल से प्रसारित। अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त ।

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मानवता और दहशतगर्द

दिनांक 16/2/19 मानवता के हत्यारे मानवता तब चूर चूर हो गयी जब लिपटे वीर जवान तिरंगे में दहशतगर्दों का क्या है काम ... Read more

देश का जबाज सैनिक

लघुकथा " रेल अबाध गति से जा रही थी । मै दोस्त की बारात में भोपाल से पुणे जा रहा था। अहमदनगर से कुछ सेना के जवान सवार हुए ... Read more

वीर जवान

वीर जवानों तुमको है कोटी कोटी नमन देश की सीमाओ पर डटे रहते मुस्तैदी से न ठंड की चिंता न गर्मी का खौफ दुश्मन पर करते वज्रपात... Read more

मिट्टी की खुशबू

वतन की खुशबू मिट्टी में समाई माथे लगा लूँ सारी जिन्दगी की ये है कमाई मिट्टी के खिलोने खेलते बीता बचपन मिट्टी के घड़े... Read more

ये दिल - बुजुर्गों को समर्पित एक कविता

चेहरे पर झुरिया है सिर सपाट है आदत से मजबूर है ये दिल हर वैलेन्टाइन डे पर बिखर जाता है ये दिल बीवी का पेहरा है दरवाजे पर... Read more

मेरी कहानी पत्नी की जुबानी (हास्य )

पत्नी ने कहा : आओ जी मै आपके दाग धो दू मैने कहा : मै तो दूध का धुला हूँ तुम क्या धोओगी ? वह बोली : मुँह मेरा मत खुलवाओ शादी... Read more

राधा का कान्हा

भावों के मोती है रूप सलोना है सुन्दर है चित्र राधा सी है मित्र हे कान्हा तू तो बड़ा सलोना है कान्हा ! छेड़ता जब धुन ... Read more

दाग तेरी विचित्र कहानी

इन्सान की जिंदगी भरी दाग से निकला जो बच कर वह बेदाग हो गया वरना दाग से तो देवता भी बच नही पाए दाग चुनरी पर बैचैन सुन्... Read more

मुकाम जिन्दगी के

कांटो पर चलने वाले मुकाम पा जाते हैं मखमल पर चलने वाले अक्सर भटक जाते है महलों की चमक इरादों से भटका देती है झोपड़ी वाले ... Read more

जिंदगी के अंजाम

मुकाम है अंजाम किसी मंजिल का अच्छे काम का अंजाम भी होता है शुभ कह गये है साधु संत सकारात्मक सोच तथ्यपरक शौध ऊँच... Read more

जहर

जहर भरा है सर्प से भी ज्यादा इन्सान में अपना बन कर काटता है आस्तीन में ही छिपा रहता है इन्सान की भाई, भाई के लिए उगल... Read more

गुलाब मिसरी (हास्य)

वेलेंटाइन डे से एक महिने पहले से एक सुंदर लड़की मोना को एक लड़का सुदीप रोज़ एक गुलाब का फूल दिया करता था🌹 मोना लाल गुलाब... Read more

माँ का आशीर्वाद

बेटा कब से आवाज दे रही हूँ कहाँ है ।" कहते हुए रमादेवी , सुरेश के कमरे की तरफ गयी । वहाँ सुरेश गुमसुम सा बैठा था । रमादेवी को चिंत... Read more

तकिया

"पिताजी जैसे ही मुझे मालूम हुआ आपने अपना छोड़ कर अलग किराये का कमरा लिया है तो मैं अपनेआप को रोक नहीं सकी और फौरन चली आई ।" संगीता... Read more

घर की इज्जत -एक दहलीज

मर्यादा में बंधी रहती है दहलीज एक चौखट में बंधी है दहलीज दहलीज के अंदर है घर की इज्जत बाहर गयी तो सरे आम बदनाम है आबरू ... Read more

वह पागल औरत

पागल औरत चौराहे पर हंगामा हो रहा था लोग तरह तरह की बातें कर रहे थे : " न जाने किसका पाप पेट में पाले घुम रही थी यह पागल आज वह स... Read more

हरियाली और खुशहाली

हरीभरी धरा लगती है सब को अच्छी कहती है ये जंगलों की कहानी सच्ची वन्यजीवों के हैं यहाँ के रहवासी पंछियों के उड़ते समू... Read more

जिन्दगी में सवालों का घेरा

जिन्दगी गुजर जाती है सवालों के जंजाल में ! बड़ी बेदर्द से जबाव मांगती है जिन्दगी हर सवाल का सवाल कभी यक्ष प्रश्न ... Read more

मत करो सफल साज़िशों को सफल

दुश्मन होती है साजिशे दुनियां में भाई भाई को बांट देती है ये साजिशे शकुनि की साज़िशो के चलते करा डाला था उसने महाभारत ... Read more

जिन्दगी की डोर

जब तलक जुड़ी हैं जिन्दगी , सांस से उड़ती है पतंग आसमां में अनजान जगह अनजानों के बीच उड़ती है पतंग बैरानी सी आसमां... Read more

चाँद है तो शीतलता है

रात के अंधेरे में मैंने पूछा चाँद से कहाँ भटक रहे हो चाँद कहा प्यार से भटको को दिखाता रहा हूँ राह दिनभर की तपन से दिला... Read more

जय विज्ञान

जय जवान जय किसान के बाद अब हुआ है जय विज्ञान का उद्घोष जब हुआ तीनों का साथ देश का हुआ चहुंओर विकास और हुऐ मजबूत हाथ ... Read more

दरिन्दे

वो मासूम थी सामने दरिन्दा था किया उसने कराटे का वार वो हुआ धराशायी चीख कर भागी मासूम सीखे सब बेटियाँ इसी तरह के वार... Read more

सब कुछ खत्म (क्षणिका)

1 बंद कमरा मारपीट की आवाजे औरत की चीख सब कुछ खत्म 2 मस्ती में युगल तेज रफ्तार एक चीख और सब कुछ खत्म स्वलिखित लेखक... Read more

दुश्वारियां

मासूम चेहरे पर हो जब मुस्कान खिलने गले फूल महके क्यारियाँ मिले जब हक बराबरी का आसमां छूए ये नारियाँ अब गिला शिकवा का... Read more

अजब तेरी कहानी कागज

क्या लिखूं तेरे बारे में कागज जितना लिखूं उतना है कम कागज बचपन बीता नाव बना पानी में बहाते तुझे कागज तो कभी हवाई जहाज ब... Read more

बाबू जी की मुस्कान

"संध्या ने अपनी पूरी जिन्दगी घर के देखभाल और घर को बनाने में गुजार दी । मैं तो बस आफिस में चपरासी था । इस तनख़्वाह में दो बच्चों... Read more

बालमन और नटखट यादें

बचपन के वो खिलोने कन्चे , गिल्ली डंडे, चपेटे, चक्की और चूल्हा शादी गुड्डे-गुड़िया की राधा बनी दुल्हन और किसन बने है दूल्हा ... Read more

बेटा दामाद

" बाबू जी मुझे रिटायर हुए तीन साल हो गये मेरी पेंशन अभी तक नही बनी बाबू जी बडी परेशानी में हूँ।" रामलाल हाथ जोड़ कर पेन्शन प्रकर... Read more

सफर इन्सानियत का

हे इन्सान तू इन्सान बन कर रहना सीख फरेब , चापलूसी जो कूट कूट कर भरी है तुझ में उससे निकल और इन्सानियत से जीना सीख ईश्व... Read more

हौसला

गगन में उड़ने की चाह थी उसकी बैठा खिडकी के पास देखता गगन में उडते पंछी पर वह लाचार था पैरों से था असहाय मन का था पक्का... Read more

रंगीली दुनियां

मन देखे आसमां में दिल रंगीन हो जाए उड़े सतरंगी चुनरिया जब ऊंची बदरिया पिया संग तब ठुमके दुल्हनिया रंगों की निराली दुनि... Read more

नारी की लज्जा घूंघट

लम्बा सफर तय किया है घूंघट तूने चेहरा न दिखे बस सबब था तेरा हर किसी ने बस चेहरा ढका दिया तेरा प्रश्न यह है चेहरा क्यो ढका ... Read more

आत्मनिर्भर

पंछियों के बच्चे आत्मनिर्भर हो उड जाते हैं इन्सान के बच्चे जिन्दगीभर माँ बाप से पूछते है "तुमने किया ही क्या है हमार... Read more

महफ़ूज जिन्दगी

मैं तो खुद पर हुकुमत करता हूँ इसलिए महफ़ूज रहता हूँ दूसरों पर हुकुमत करने वाले तो डरे से रहते है मेरा मौला मेरा सिपहसलार ... Read more

सार्थक वार्ता

समझौता वार्ता है हर समस्या का समाधान सकारात्मक दृष्टिकोण से करो वार्ता चाहे बात देश की हो या परिवार की जब टूटता है ... Read more

चाहत

आखें हँसती रहती हैं दिल उदास रहता है इस तरह मैं उसके करीब रहता हूँ किसी से कुछ कहता नही हूँ वह मुझसे दूर रहता है बहाना कु... Read more

बहुत हैं ख्बाईशे

ख्बाईशे बहुत ज्यादा पाल रखी है मैने जानता हूँ जिन्दगी छोटी है और ख्बाईशे लम्बी हैं ख्वाइशों के लिए दिन रात भागता भटकता हूँ ... Read more

बच्चों में संस्कार- दादी की पूजा

आज भी भाती है वह पूजा दादी की पहले लड्डू गोपाल को नहलाना श्रृंगार करना टिका लगाना और आसन पर बैठाने फिर दादी के सामने लड्ड... Read more

मेरी जिन्दगी की कैताब

मेरी जिन्दगी की किताब को गौर से पढ़िए करीबी सा लगूं मुझे दिल खोल के पढ़िए। अरसे से पड़ी बन्द किताब के पीले पन्नों में सूखे हु... Read more

सफर आजादी का

कम न हो देशप्रेम का जज़्बा यह दिलों में बना रहे शत्रु के षड्यंत्र न हो कामयाब सतर्क हर एक हो रहना है इरादे हो हर भारतीय के ... Read more

वन्देमातरम

हर भारतवासी का देश है ये तो यक्ष प्रश्न है ये अनेकता में भी एकता है तो धर्म का बंटवारा क्यो ? जाति का बंटवारा क्यो ? सम्प... Read more

भारत तूझे नमन है

(देशभक्ति कविता) जवान ने कभी हार न मानी देशभक्ति से सदा रहा सराबोर एक अकेला रह गया था एक चौकी पर वह शत्रुओ के बीच ... Read more

धरा तेरे रूप अनेक

हरी भरी धरा हमारी रूप अनेक लिए हुए कभी जल से भरी भरी कभी पतझड़ से उड़ी उड़ी आया बसंत जो झूम के फुलवारी सी बनी धरा मनमोहक र... Read more

हे माँ तूझे सलाम

जन्म लिया है भारत भू पर हमने कण कण में बसी है सोन्धी सुगंध हे भारत मा तूझे कोटी कोटी है नमन जन्म दिया है माँ तूने ... Read more

बोझ के पहलू अनेक

जब हो काम के प्रति उत्साह , लगन तो नहीं लगता बोझ वह माता पिता को नहीं लगते बोझ बच्चे वह रूखा सूखा खाते है पैदल चल... Read more

कलम है जीवन्त समाज

माँ सरस्वती की कर वंदना नमन करूँ शीश नाए फिर ले कलम हाथ में लेखन करूँ शुरूआए विचारों पर सीधा प्रहार करें कलम ऐसा हथियार ... Read more

चुनावी फंडे (हास्य)

आया चुनाव का मौसम हर तरफ सदा बहार जाल बिछाऐ बैठे नेता फंसती जनता बेहाल जनता चुनाव में रानी है आश्वासन देख जाल में... Read more

हमसफर के बिना अधूरी है जिन्दगी

सफर जिन्दगी का बहुत मिलते है मुसाफिर जिन्दगी में कुछ चलते है साथ कुछ बिछड़ जाते है हमसफर के बिना अधूरी है जिन्दगी बहु... Read more

यादें बचपन की

पैंसठ साल के रामलाल दादा ने घर से बाहर निकलते हुए अपने पड़ोसी दोस्त दयाशंकर को आवाज दी : " चलो आज कन्चे खेलते है इसके बाद गिल्ली डं... Read more