Sanjana gupta

Samastipur , Bihar

Joined December 2018

कुछ लिखना होता है ।।
जब मन अंदर से कुछ कहता है
लेकिन दुसरो से नही कह सकता है
तो मैन हल्का हो जाये इसलिए
कुछ लिखना होता है ।।

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ज़िंदगी

तुमने देखा भी नही ऐ ज़िन्दगी मैं कैसे यू बिगड़ती गयी खुद को बिगाड़ती गयी तुमने शिकायत नही की मैं बदहवास होती गयी और तुमने टोका भी... Read more