Sangita Goel

Joined August 2016

मेरी विधा दोहे, कुंडलियाँ, कविता, छंद, हाइकु, गजले, शेर, शायरी,मुक्तक, लघुकथा, कहानी, two liners,, गीत, भक्ति गीत, इत्यादि।।। अपनी गजले गाना मुझे पंसद है। नोएडा,, काफी सारे कार्यक्रम में भाग ले चुकी हूँ।।।। साहित्य से जुड़ी हुई हूँ।।। Facebook पर Sangita goel नाम से।।

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मुक्तक

वादा किया मगर ना वादाखिलाफी की अपनो के लिए नासूर अपनी जिंदगी की कोई नही है साथ, हरिक गैर बन गया जो मिला कबूल कर न कोई तिश्नगी की... Read more

शेर।।।

कभी समझा देना जरा इशारो में कही बाते... कागज पर लिखा तो मायने बदल गए।।। संगीता गोयल 14/5/2018 Read more

गजल

खयाल ख्याल में यूँ ही नही गिला करते तसव्वुरात के पर्दे नही हुआ करते।। ये जिंदगी जो सताने लगे खुदी को जब यूं जिंदगी के ब्याना... Read more

शायरी

मेरी तहरीर ही मेरा अंदाजे बयां होगी चर्चा ए दिल फिर जाने कहाँ कहाँ होगी मत सोचा कर मुझे इतना तुु ख्यालो में मेरी जीस्त तेरे वास... Read more

2 शेर

दिखा रही है जिंदगी भी खेल कुछ अजीब से नयी मिली है मुश्किले नये मिल रहे हैं हादसे बिखर गई है जिंदगी, समझ नहीं है आ रहा टूटता ... Read more

शेर

क्या क्या न सहा जीस्त ने सिर्फ तेरे वास्ते जब अलग थी मंजिले अलग थलग थे रास्ते।।।। Read more

गजल

जिंदगी की राह में बनके बेगाना चल दिए लूट कर सुख चैन देखो कर दिवाना चल दिए आपकी ही बात है अब आपसे ही कर रहे सुन शिकायत लो हमार... Read more

शेर..

कत्ल ही करना था तो कर दिया होता बेबजह वजूद को टटोला किसलिये।।। संगीता गोयल "गीत" 6/8/16 Read more

शेर..

तसव्वुरात की परछाई उभर आई फिर से कौन ये अक्स अपना दिखा गया फिर से। संगीता गोयल 6/8/16 Read more