माँ

रेतीले पथ पर जेठ की धूप मे चेतना का दीप जगाए हर पल मुस्कराए संस्कार की छाँव में संस्कृति के गाँव में सर पे सूरज उठाए शील की ट... Read more

एक शेर

ख्वाब हो बेताबी हो न पाना हो कुछ कम तब कही से लगता है अभी जिंदा हो तुम संदीप शर्मा Read more

कहने को

नफरत है दहश्त है इस दुनिया में मोहब्बत तो है बस कहने को संदीप शर्मा "कुमार" Read more

जरा याद करो इतिहास को

एक कविता जरा याद करो इतिहास को नज़र उठाने से पहले । कितनी जंगे हार गये हथियार उठाने से पहले ।। गैरों के बलवू... Read more

प्रेम

एक कविता प्रेम दर्शन है कोई प्रदर्शन नहीं प्रेम संस्कृति है कोई संस्कार नहीं प्रेम शजर की छाँव है कोई शाख का पत्... Read more