मेरी फोटोग्राफी और लेखन में प्रयास रहता है कि मैं प्रकृति के उस खिलखिलाते चेहरे को अपने हाथों से छूकर महसूस कर सकूं…। देखता और महसूस करता हूं कि प्रकृति और मेरे बीच में एक रिश्ता बन गया है…वह हंसती है, खिलखिलाती है और उदास होती है तो मैं उसके हर मर्म को सहजता से समझ जाता हूं…। वो उम्मीद से मेरे ओर देखती है…देर तक बातें भी करती है।

Copy link to share

मजदूरों के बच्चे

मजदूरों के बच्चे पूरा दिन गगनचुंबी इमारतों में धमाल करते हैं शाम होते ही लौट आते हैं झोपड़ी की जमीन पर। रुंआसे से चेहरे वाले... Read more

कान्हा से श्रीकृष्ण हो जाना

कान्हा से भगवान श्रीकृष्ण हो जाना एक यात्रा है, एक पथ है, मौन का गहरा सा अवतरण...। कान्हा हमारे मन के हर उस हिस्से में मचलते हैं, खि... Read more

...वो बचपन, वो तुम्हारी गुटर-गुटर

वो बचपन कैसे भूल सकता हूं और भूल नहीं सकता तुम्हारी गुटर-गुटर....। मेरे दोस्त, तब इतनी आपाधापी नहीं थी...तुम भी स्वच्छंद थे और मैं भ... Read more

...वो तुम जैसी सांझ

तुम्हारी तरह ही सुरमई, निर्मल, आभा का आंचल खिसकाती ये सांझ, अक्सर बहुत शरमाती है ये अक्सर बातें करने से कतराती है बचती है को... Read more

दहलीज तक आ पहुंची सांझ

ये सांझ कोई गीत गुनगुना रही थी, मेघ आसपास ही मंडरा रहे थे, सूरज जैसे थककर चूर था और सांझ की गोद को सिराहने लगाकर कुछ देर लेटा...लेकि... Read more

--- मैं खिल उठूंगी तुम्हारी छुअन से

...ओ प्रियतम, सुनो ना...। तुम्हारी छुअन के बिना मैं कैसी सूख सी गई हूं। तुम मुझे यूं ऐसे बिसरा गए हो कि अब कहीं मन नहीं लगता। ये तन,... Read more

बारिश तुम्हें आना होगा

सूखती जा रही हैं उम्मीदें सूखती जा रही हैं फसलें सूखती जा रही हैं कोपलें सूखता जा रहा है मन सूखते जा रहे हैं भरोसे सूखते ... Read more

तुम्हारा साथ

तुम्हारा साथ मेरे लिए वैसे ही है जैसे प्रकृति के लिए बारिश की बूंदें धरती के लिए बारिश की आस आसमां के लिए घनघोर घटा सूर्य के लि... Read more

ये भावनाओं का खौफनाक सूखापन

हमने क्या कभी अपने बचपन के बारे में बच्चों को बताया है, कभी अपने बच्चों को ये बताया है कि हम कौन से जमीन से जुड़े खेलों के बीच बड़े ... Read more

यूं ही तैरते रहो मेरे मन आंगन में

तुम मेरे अरमानों जैसे हो, तुम मेरी जिंदगी के तरानों जैसे हो, तुम मन जैसी मुस्कानों जैसे हो, तुम तपिश में बदली वाले आसमान जैसे हो,... Read more

देखो-देखो...प्रकृति ने अपना घूंघट हटा लिया है...

बहुत गर्मी है, लेकिन ये प्रकृति हमारी तरह बैचेन नहीं है, वो खिलखिला रही है, अभी-अभी मैंने देखा कि वो एक वृक्ष पर पीली सी मोहक मुस्का... Read more

ओ प्रियतम, सुनो ना---

...ओ प्रियतम, सुनो ना...। तुम्हारी छुअन के बिना मैं कैसी सूख सी गई हूं। तुम मुझे यूं ऐसे बिसरा गए हो कि अब कहीं मन नहीं लगता। ये तन,... Read more

ये कैसा अनूठा नेह और विश्वास है

हमने कभी पेड़ के पीछे से लरजते हुए अहसासों को देखा है, हमने कभी पेड़ और पत्तियों के वार्तालाप को सुना है, हमने कभी सूर्य के उस अहसास क... Read more