sampurna nand dubey

मऊ

Joined January 2018

लेखक & पत्रकार

Books:
सह्याद्रि समर्थ शिवा, यशोधारा

Awards:
हिंदी साहित्य गौरव

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अहिंसा

क्या कहा आज से हम गाँधी बन जायें? सद्भावना और सौम्यता की आँधी बन जायें? अरे! गीध के खाने भर जिसका माँस नहीं था आज जिया कल का कोई ... Read more

निरुत्तरित प्रश्न

धरती पर अत्याचार बढा मानवता शर्मिन्दा क्यों हैै हर वर्ष जला फिर भी रावण जलकर आखिर जिन्दा क्यों हैं दामिनी दमित क्यों होती है, भामि... Read more

अरूणिमा

अरूणिम अरूणिमा पर काले घन बन छाये रूकी नहीं आभा वह दूर तक बिखरा गयी निशा काली-काली भी नहीं कुछ बिगाड़ पायी माता की सुपूती नया रंग ... Read more