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विधा-चूरनवाला

बाल कविता_*चूरनवाला* देखो चूरनवाला चूरन लाया । संग में रंगबिरंगी गोलियाँ लाया।। कुछ खट्टी मीठी और तीखी लाया। फिर ऊँचे स्वर में ... Read more

विधा―प्रदूषण

―प्रदूषण वो सिगरेट सुलगा रहा था। वो जिंदगी को जला रहा था।। **** वो कश पे कश लगा रहा था । वो फेंफड़ों को गला रहा था ।। *****... Read more

विधा दीपावली

**दीपावली **दीपों का त्यौहार घर को करें रोशनी से जगमग अमावसी रात उजाला चहुँ ओर-- धनतेरस धनलक्ष्मी बौछार। नरकासुरवध नरकनिकार। शाम ... Read more

विधा तारीख

एक *तारीख* वो थी। पापा रिश्वतखोर थे।। मम्मी परेशान थी। सब मचाये शोर थे।। बंधी हथकड़ी देखे वो थी। थानेदार पकड़े पतिचोर थे।। ... Read more

विधा आओ चले कहीं दूर देश

आओ चले कहीं दूर देश पंख फैला विचरण करते आओ चले कही दूर देश हिंद का शांति संदेश पहुँचाते चलो शांति दूत बन जाते ... Read more

विधा करवाचौथ

करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं करवाचौथ तो एक बहाना है। जीवनसाथी साथ निभाना है।। चूड़ियाँ खनकना तूझे बुलाना है। पायलिया रुनझुन तु... Read more

विधा कविता क्या कहूँ

क्या कहूँ वो आई चुपके से कार पे क्या कहूँ। आज टीम ने पकड़ा मैं क्या कहूँ।। पुलिस हाथ मलते रह गयी क्या कहूँ। बेटी होने की दुहाई ... Read more

विधा शरदपूर्णिमा

शरदपूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं -- कान्हा रासरसाइया पूनों रात। मुरली बजाइया गोपी दौड़ि आत। सारी रात बाँसुरी धुन मा लीन रही, स... Read more

विधा बुढ़ापा

बुढ़ापा जापान में माता पिता का बुढ़ापा। अकेले मे रोबोट से खेलता बुढापा।। अपनत्व का एहसास दिलाता बुढ़ापा। जवानी से बढ़ापे की ओर जाता ... Read more

विधा बरसाती रोग

बरसात का देखिए कमाल। कहीं सूखा है कहीं बाढ़। तबाही चारों ओर है मची बरसाती रोंगों की भरमार।।. डाक्टर के नखरे हजार। रोगी है रोग... Read more

विधा दोहे रक्षाबंधन

भाई पिता समान है ,कहती भारतभूमि। प्यार भरे रिश्ते है ,हिन्द की है कर्मभूमि।। पोहे अनगिनत मोती ,धागे है अनमोल। बहना न माँगे गहना , र... Read more

विधा कुण्डलिका रक्षाबंधन पर

यादें हैं बचपने की, राखी है बँधवाए। मुँह में मिठाई खाये, एक रूपया टिकाए।। एक रुपया टिकाए , चार दूरहीं दिखाये।। बारि बारि चिढ़... Read more

विधा मित्रता

मित्रता पे संदेह किया सुदामा ने। द्वारिका नंगे पाँव आये थे। दीनता फिर भी न गयी अंतर्यामी से चने छुपाये थे।।. पड़े पाँव में छाले थ... Read more

विधा बाल लीला श्रीकृष्ण

जयश्रीकृष्ण कन्हाईया तूझको पुकारे यशोदा मैया वेणीबनावे मनहिं हर्षावे माटीखाये देखे तौ भूमण्डलदिखावे देखि मैया धरा गिरती उठे... Read more

भजन -जयश्रीकृष्ण

हे कृष्णमुरारी ,हे गिरिधरधारी । हे मुरलीधारी ,मकृराकृतकुण्डलधारी । कंठवैजंतीधारी , शीशमोरमुकुटधारी। हे कान्हा ! तू दधिमुखलिपटाये... Read more

मुक्तक -जयश्रीकृष्ण

तेरी छोटी पयियाँ तेरी चूमती हथियाँ तू धरती चूमें तेरी पकड़ती बयियाँ तेरी छोटी मोती दतियाँ तेरी बजती पयजनियाँ तू कठुला मुखडाले तेरी स... Read more

कविता --विरहणी

विरहणी ऐ पवन ! जरा रुकजा मेरे संगसंग चल। राहें भूली मैं प्रियतम राह दिखाते चल। राह पथिक बनके जरा धीरे --धीर चल। मै आई दूर द... Read more

विधा कविता

विरहणी ऐ पवन ! जरा रुकजा मेरे संगसंग चल। राहें भूली मैं प्रियतम राह दिखाते चल। राह पथिक बनके जरा धीरे --धीर चल। मै आई दूर द... Read more

मुक्तक चाँद में पिया को देखूँ

"माँ भारती" ऐ चाँद तुझे बारि बारि देखूँ । अँधेरी राते पिया को तुझमें दखूँ। तारे टिमटिमाते हँसी उड़ाते, मुखड़े पे छायी उदासी देख... Read more

वंदे मातरम

माँ युद्धभूभि में घूमती। राक्षसों सें कभी नहीं डरती । गरजतेहुये सिंहों से कभी डरो नहीं, वीरों शक्ति से सामना करो।।. कभी काय... Read more

अंधविश्वास

सपेरे साँपो को पालते है । बिषैले दाँतो को जो तोड़ते है। आतंकी अपनो में है खुला घुमता, निरापराधी प्राणी को जो जकड़ते है.।।. बीन... Read more

मुक्तक - सावन कजरी

आईं सखियाँ गाये कजरी। बिजुरिया मोती सी चमकी। पिया ठाड़े दूरहि मुस्काये, भीजी चुनरिया तनहिं लिपटी।।. ****** मेंहदी रची ... Read more

मुक्तक --सुनहरा सपना

धरा से आतंकियो को मिटा दो। अहिंसा की ज्योति को जगा दो। तीर्थयात्री जयकारा लगाते चलें, त्रिलोकनगरी फूलों से खिला दो। ... Read more

मुक्तक-- काश्मीर

धरा से आतंकियो को मिटा दो। अहिंसा की ज्योति को जगा दो। तीर्थयात्री जयकारा लगाते चलें, त्रिलोकनगरी फूलों से खिला दो। सज्जो ... Read more

मुक्तक--घरौंदा

रेत का घरौंदा सागर का किनारा प्यार से बनाया भूलक्कड़ मस्तिष्क हाथ रखा टूट गया सज्जो चतुर्वेदी***** Read more

किस रूप में

मानव माथे पड़ी लकीर कभी मिटती नहीं फकीर माँगे देने से अमीरी घटती नहीं। प्रभु न जाने किस भेष मे आ जाये द्वार, दर्शन पा जीवन धन्य क... Read more