babita garg

Joined November 2018

नमस्कार दोस्तों,
मैं बबीता गर्ग,सहर उपनाम से लिखती हूँ। बचपन से लिखने का शौक रहा है। पहली कविता दसवी कक्षा में लिखी थी। फिर पढ़ाई,नौकरी और गृहस्थी में लिखना भूल ही गयी थी। परन्तु पति अजय,बेटी खुशी और सभी मित्रों के प्रोत्साहित करने पर कलम फिर उठाई। अभी तक दस साँझा काव्य संकलन में मेरी कविता प्रकाशित हो चुकी हैं। दो लघु कथा संकलन में भी मेरा सहयोग रहा है। मंच पर भी सक्रिय हूँ। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी कविता प्रकाशित होती रहती है।
बबीता “सहर “

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माँ

माँ तो माँ होती है,उस जैसी और कहाँ है। निश्छल प्रेम की थाती,माँ जैसी और कहाँ है। नौ महीने नव जीवन की,धारा उसमें बहती। प्रसव... Read more