पं.संजीव शुक्ल "सचिन"

नरकटियागंज (प.चम्पारण)

Joined July 2017

D/O/B- 07/01/1976
मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।

Books:
कुसुमलता (अभिलाषा नादान की)
साहित्य संग्रह

Awards:
ख़याल समूह से सर्वश्रेष्ठ रचनाकार का सम्मान, साहित्यदीप मेधा सम्मान, काव्यांचल स्वर सम्मान, सूर्यम् साहित्य रत्न सम्मान, काव्य सागर सम्मान

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भ्रष्टाचार क्यों??

🖋️ #भ्रष्टाचार_क्यों..? 🖋️ _____________________________________________ -----------------... Read more

बेहतर ग़ज़ल

मानवीय मनोवृत्ति _____________________________________ जिन्दगी की शाम आये ना कभी, हर समय है सोचता इंसान ये। मैं रहूँ जिंदा ... Read more

ग़ज़ल

#बह्र 👉 #बहरे_रजज_मख्बून_मरफू_मुखल्ला #वज़्न 👉 १२१२ २१२ १२२ १२१२ २१२ १२२ #मुफाइलुन_फ़ाइलुन_फऊलुन_मुफाइलुन_फ़ाइलुन_फऊलुन #काफ़िया 👉 '... Read more

ग़ज़ल

लिया मुख मोड़ ही सबने दिखाई देता है। मिलें खुशियाँ तुझे मन ये दुहाई देता है। नहीं कोई शिकायत है हमें इस बात की- रहे सब खुश सदा द... Read more

ग़ज़ल

दिनांक - ३/१/२०२० विषय - खट्टा / मीठा विधा - ग़ज़ल ************************** कभी मीठा कभी खट्टा कभी नमकीन सी राहें। कभी ... Read more

ग़ज़ल

#तिथि - ४/१/२०२० #दिवस - शुक्रवार ************************************†******** भले ढूंढो दिया लेकर नहीं अब यार मिलता... Read more

गीतिका छंद

गीतिका छंद 2122 2122 2122 212 या ला ल लाला / ला ल लाला / ला ल लाला / लालला माँ तुम्हारे प्यार की हर, वो कहानी याद है। कष... Read more

गीतिका छंद【माँँ】

गीतिका छंद 2122 2122 2122 212 या ला ल लाला / ला ल लाला / ला ल लाला / लालला माँ तुम्हारे प्यार की हर, वो कहानी याद है। कष... Read more

देशभक्ति ग़ज़ल

मुलाहिज़ा फरमाइए... देशभक्ति ...ग़ज़ल **************************************** मौत को दावत मैं दे हरबार सरहद पे खड़ा हूँ। मौत ... Read more

ग़ज़ल

मापनी 👉 २१२२ २१२२ २१२२ २१२ ग़ज़ल 👇 गाँव अपना है मगर अब गाँव जैसा कुछ नहीं। मिल रहा है भाव लेकिन भाव जैसा कुछ नहीं। मिट गये... Read more

हाइकु

ठंड की मार बेरहम बयार सिहरे हाड़। ठण्ड है प्रचण्ड कापता तन मन है ठिठुरन। कापते लोग आग का उपयोग ठण्ड भगाये। शीत लहर बर... Read more

सचिन के दोहे

नारायण उर मे बसें, भटक रहा है जीव। दुग्ध बिना कैसे मिले, जग को उत्तम घीव।। कष्ट सहन होता नहीं, रघुवर देखो आज। दुष... Read more

बेटे का अवतरण दिवस ...बधाई संदेश

देता हूँ शुभकामना, बेटे बारंबार। जन्मदिवस पे आपको, खुशियाँ मिले अपार।। खुशियाँ मिले अपार, जगत में नाम कमाओ। स... Read more

सार छंद आधारित गीत

#विधा - सार छंद आधारित गीत #रचना -👇 इच्छाओं के वस में होकर, कष्ट मनुज पाता है। अभिलाषा के महा भँवर में, धसता ही जाता ह... Read more

लावनी छंद आधारित गीत (रौद्र रस)

#विधा 👉गीत (लावनी छंद आधारित) #रचना 👇 ----------------------------------------------------- #मुखड़ा अग्रज दो आशीष मुझे मैं, वाण... Read more

सरसी छंद आधारित गीत

#विधा 👉 गीत (सरसी छंद आधारित) #रचना: 👇 ------------------------------------------------------------------ #मुखड़ा पहने चोला ... Read more

अनुराधा घनाक्षरी

माँँ पद्मनीलया को प्रणाम - पं.संजीव शुक्ल 'सचिन' माता का नाम:- श्रीमती मंजू देवी शहर का नाम:- मुसहरवा (मंशानगर), पश्चिमी चम्पारण,... Read more

कुंडलिया छंद

शहरों की बस चमक में, भुला दिये हैं गाँव। लेकिन शहरों में कहाँ, पीपल की वह छाँव। पीपल की वह छाँव, दे सदा शीतल छाया। हर्ष... Read more

मुक्तक

विधा - #मुक्तक जिये जा रहा हूँ, अकेले अकेले। सिये जा रहा हूँ, अकेले अकेले। जहर जिन्दगी बन गई आज मेरी- पिये जा ... Read more

प्रेम रंग (कुंडलिया)

प्रेम- रंग ********************************** प्याला पीकर प्रेम का, कृष्णा, हुई निहाल। सुधबुध तन है खो रहा, देख मोहन... Read more

मुक्तक

करो कुछ काम तुम ऐसा, जगत में नाम हो जाये। भले पथ पे सदा चलना, जगत सम्मान हो जाये। बुराई है जहर जग में, बुरे से दूर ही ... Read more

अमर्ष (क्रोध)

#विषय--- #अमर्ष का समानार्थी #क्रोध **************************** नवीन एक शोध कर। शत्रु पे तू क्रोध कर। रक्त ... Read more

जीवन चक्र

जीवन चक्र (कविता) जन्म मरण जीवन का पहिया, नित्य यहाँ पर चलता है। बात सत्य यह कालचक्र भी हमसे हरपल कहता है। जन्म मरण के बीच... Read more

भुजंगप्रयात छंद

भुजंगप्रयात छंद १२२ १२२ १२२ १२२ जिये जा रहा हूँ, अकेले, अकेले। सिये जा रहा हूँ, अकेले, अकेले।। नहीं . एक साथी, न... Read more

भुजंगप्रयात छंद

भुजंगप्रयात छंद १२२ १२२ १२२ १२२ शुचे ! पास मेरे, कथाएँ पड़ी हैं। निशानी तुम्हारी, व्यथाएँ पड़ी हैं।। हरे वक्ष के है,अभी घ... Read more

कुंडलिया छंद

नेता से नाता नहीं, नेता करे अनेत। देख दशा अब देश की, जाओ सब हीं चेत।। जाओ सब ही चेत, नेत से नाता जोड़ो। करे नही... Read more

कुंडलिया छंद

सादर नमन ......👇👇 न्यायपालिका ने किया, सुंदर सा उदघोष। हरि जीते सँग में खुदा, हुआ परम संतोष।। हुआ परम संतोष, फैसला स... Read more

कुंडलिया छंद

बरसे नयना याद में, पिया गये परदेश। निर्मोही आया नही, ना भेजत संदेश।। ना भेजत संदेश, कहूँ मैं किससे दुखड़ा... Read more

विजात छंद 【गीत】

छंद- विजात छंद विधान-यह १४ मात्रिक मानव जाति का छंद है। इसकी १,८ वीं मात्रा का लघु होना अनिवार्य है। इसके अंत में २२२ वाचिक भार हो... Read more

समय 【मुक्तक】

मात्राभार - २८ विषय - समय --------------------------------------------------------- लगाकर पंख उड़ता है, समय क्या खूब चलता है। स... Read more

घनाक्षरी 【 आरक्षण 】

#आयोजन--#मासिक_प्रशस्ति_पत्र_ #विधा-- घनाक्षरी 🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥 .....आरक्षण.... ===\===... Read more

कहाँ गये वो दिन

विषय--चाय ************************** कहाँ गये वो दिन? ^^^^^^^^^^^^^^^^^ वो दिन भी कितने सुन्दर थे। हम तुम जब साथ में रहते... Read more

विजात छंद

🙏🙏🌹प्रार्थना🌹🙏🙏 ************************ प्रभु मेहमान बन आओ। साक घर मेरे भी खाओ।। विदुर के घर गये थे तुम। चखे थे बे... Read more

चोट दिल पे लगी मुस्कुराते रहे।

******** #सादर_समीक्षार्थ******* चोट दिल पे लगी मुस्कुराते रहे। बस खुशी ही खुशी हम दिखाते रहे। जख्म दिल पे... Read more

मनोरम छंद

#छंद - मनोरम #विधान - 【२१२२ २१२२】 ******************************** मीत मन के द्वार खोलो। प्रेम से कुछ यार बोलो।। साथ जो... Read more

मुक्तक

💐💐💐💐💐मुक्तक💐💐💐💐💐 पीर अन्तरमन की छूपा कब पाते हैं। वेदना हृदय की बरबस बह जाते है। है दर्द प्रीत का कठिन इस जगत मे... Read more

मनोरम छंद (बीभत्स रस)

विधान 👉 【 २१२२ २१२२ 】 ************************* युद्ध भीषण हो रहा था। मनुज मति तब खो रहा था।। मांस के चिथड़े पड़े ... Read more

गणेश वंदना

गणेशोत्सव की आप सभी को आनंतशः अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं।।🙏🙏🙏🙏🙏✍️✍️✍️✍️✍️✍️ गणेश वंदना ************************** जय ... Read more

दोहावली

👇👇.👇✍️✍️👇👇दोहा👇👇✍️✍️👇👇👇👇 नाम जपे भव से तरे, और मिले प्रभु धाम। सत्य यही स्वीकारिये, जपो राम का नाम।। 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇... Read more

दोहा

दोहे ======== रचे महावर पाव में, गजब किया श्रृंगार। एक बार तो देख लो, ऐ मेरे सरकार।। मैं विरहन बनकर फिरूं, तुम बैठे परदे... Read more

मुक्तक {मात्राभार १४}

चले आओ चले आओ। सजन अब घर चले आओ। विरह में मैं न मिट जाऊं- दरश देने चले आओ।। ✍️पं.संजीव शुक्ल "सचिन" Read more

कृषक 【लावणी छंद गीत】

सूखे से संतप्त कृषक हैं, पड़ी बेड़ियां पावों में। अति वृष्टि से बाढ़ का खतरा, रुदन पड़ा है गावों में। माह आषाढ़ पल में बीता, इन्द्र द... Read more

तुम्हारा ही सहारा (मुक्तक)

👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 इनायत है हरी तेरा, सभी से प्यार मिलता है। तुम्हारे ही भरोसे पर, सकल संसार चलता है। सदा आशीष देना तुम, सभी में प्रेम ... Read more

मुक्तक

हमें जिसने यहां भेजा , वही हमको खिलाता है। जगत में जीव हैं जितने, वही सबको जिलाता है। मिला हमको यहाँ जो भी, उसी ईश्वर की मर्जी से-... Read more

सावन

#सादर_समीक्षार्थ सावन आस लाता है, सुखद बरसात लाता है। गमों के पीर से बोझिल, विरह की रात लाता है। समझ पाता नहीं कोई,... Read more

मेरे खेवनहार

*********************🙏************************ मेरे खेवनहार ____=====____ ऐ मेरे सरकार, तुम ... Read more

विडम्बना

सावन के संगीत गये खो, कहाँ दिखे अब सावन। सावन की वह बात पुरातन, जो दिखता मनभावन। कॉल विडीयों युग मे गर जो , हुये पिया पर... Read more

मनुहार

#विधा - गीत ++++++++++++++++ मनुहार ********* सजन आओ चले आओ। मिलन के गीत अब गाओ।। कि सावन आस देता है।... Read more

विधाता छंद

विधा - विजात छंद विषय - उर्मिल व्यथा ********#सादर_समीक्षार्थ************* कहूँ पीड़ा लखन प्यारे। तुम्हें ढूंढे नयन... Read more

मनुहार

प्रभु मेहमान बन आओ। साक घर मेरे भी खाओ।। विदुर के घर गये थे तुम। चखे थे बेर सबरी तुम। अहिल्या तार आये थे। दैत... Read more