Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'

कोटा, राजस्थान

Joined September 2016

1970 से साहित्‍य सेवा में संलग्‍न। अब तक 14 संकलन, 6 कृतियाँँ (नाटक, काव्‍य, लघुकथा, गीत संग्रह, नवगीत संग्रह ), 6 सम्पादित पुस्तकें। 1993 से अबतक 6000 से अधिक हिन्‍दी वर्गपहेली ‘अमर उजाला’ व अन्‍य समाचार पत्रों में प्रकाशित। जून 2015 में राज.तक.वि.वि. कोटा से सेवानिवृत्‍त. साहित्‍य सेवा में संलग्‍न.

Books:
1. प्रतिज्ञा- नाटक
2. पत्थरों का शहर- गीत, ग़ज़ल और नज़्में
3. जीवन की गूँज- काव्य संग्रह
4. अब रामराज्य आएगा!!- लघुकथा संग्रह
5. नवभारत का स्वप्न सजाएँ- गीतसंग्रह
6. जब से मन की नाव चली- नवगीत संग्रह

Awards:
साहित्य श्री, साहित्य शिरोमणि, काव्य मनीषी, क्रासवर्ड विज़र्ड सहित 30 से अधिक पुरस्कार सम्मान एवं अधिकृत ‘विद्या वाचस्पति’ उपाधि.

Copy link to share

मान रख आना पड़ा मुझको तेरी मनुहार पर.

छंद- गीतिका मापनी- 2122 2122 2122 212 समांत- आर पदांत- पर मान रख आना पड़ा मुझको ते’री मनुहार पर. हैं समर्पित गीतिका मेरी ते’र... Read more

छोटी छोटी खुशियाँ ले कर आएगी कविता

(आज विश्‍व कविता दिवस की सभी साहित्‍यकार बंधुओं को शुभकामनायें) छंद- विष्णुपद (सम मात्रिक) शिल्प विधान- 16,10 अंत गुरु से. पदां... Read more

सरहद पर ख़ुशियाँ उतरें अब डोली में

भर दो खुशियाँ इक गरीब की झोली में. खेलो कभी-कभी बच्चों की टोली में, छोटी-छोटी खुशी मिलेगी तुमको ज्यों, ढूँढ़ें बच्चे खुशियाँ आँख... Read more

चुप रह कर सहते है देखी

चुप रह कर सहते है देखी, तटबंधों की पीर. सहमी आँखों में है देखी, सम्बंधों की पीर. झूठा-सच्चा जब-जब देखा, मौन रहे मन मार, घर की द... Read more

उम्र हाथों से' मेरे फिसलती रही

मापनी- 212 212 212 212 रात, दिन, दोपहर, शाम ढलती रही. ज़िंदगी रोज़ करवट बदलती रही. साल दर साल मौसम भी आए गए, उम्र हाथों से' मे... Read more

प्यार करना अगर है

मापनी- 212 212 212 212 प्यार करना अगर है जिगर चाहिए. पार करना हो' दरिया हुनर चाहिए. हौसले ही न काफ़ी हैं' इस राह में, ज़िंदगी ... Read more

वफ़ा करना, न कर पाओ तो' मत आना

छंद- सिंधु मापनी- 1222 1222 1222 चले जाना अभी आए अभी जाना. तुम्‍हे जी भर के’ भी देखा नहीं जाना*. जरा ढलने तो' दो दिन चाँद उग... Read more

ज्योत से ज्योत जली, हुए तम दूर घने.

आधार छन्द- मंगलवत्थु [मापनी मुक्त] शिल्‍प विधान- 22 मात्रायें(11, 11) यति के पूर्व व बाद में त्रिकल, अंत 2 गुरुओं से ... Read more

अब भाई बहिन न रूठें किसी त्‍योहार पर

1 कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया है। सर्वकामना पूर्ति का पर्व अद्वितिया है। भाई के प्रति बहिन की स्नेह अभिव्यक्ति का, यम ... Read more

अब भाई बहिन न रूठें किसी त्‍योहार पर

1 कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया है। सर्वकामना पूर्ति का पर्व अद्वितिया है। भाई के प्रति बहिन की स्नेह अभिव्यक्ति का, यम ... Read more

नारी का अपमान न हो, वो सुहाग बना

पदांत- बना समांत- आग जीवन का उत्कर्ष, प्रेम और त्याग बना. सर्वधर्म समभाव सब से, अनुराग बना. मोह, माया, मत्सर से, नहिं हो, तू... Read more

समंदर अभी तक भी हारा नहीं है

छंद- वाचिक भुजंगप्रयात मापनी- 122 122 122 122 पदांत- नहीं है समांत- आरा समंदर अभी तक, भी’ हारा नहीं है. उसे चाँद से कम, ... Read more

देवता तो बनो तुम मगर तब बनो

छंद- गंगोदक (रगणX8) मापनी- 212 212 212 212, 212 212 212 212 गीत ***** स्थाई/मुखड़ा ========== देवता तो बनो तुम मगर तब बनो, आ... Read more

बापू की राह अहिंसा की

छंद-द्विगुणित पदपादाकुलक (राधेश्यामी) चौपाई विधान- 16,16 आदि गुरु एवं अंत दो गुरु, द्विकल से आरंभ हो तो बाद में दो त्रिकल या दो ... Read more

हो राम सीताराम तुम...

छंद- हरिगीतिका मापनी- 2212 2212 2212 2212 पदांत- तुम समांत- आम हो राम, सीताराम तुम, हो कृष्ण, राधेश्याम तुम. दशरथ सुनंदन... Read more

रामचरित दोहामुक्‍तावली

1 राम लला के जन्म से, धन्य हुआ भू लोक. चार सुतों को देख के, दशरथ बने अशोक. क्या ऋषि-मुनि, क्या नागरिक, देवलोक भी धन्य, अवतारी क... Read more

सजे माँ का दरबार नवरात भी

छंद-शक्ति मापनी- 122 122 122 12 पदांत- भी समांत- आत सजे माँ का' दरबार नवरात भी. चढ़े माँ का' चोला व बारात भी. करें आरती र... Read more

मन की अभिलाषा

(हिंदी पखवाड़े में हिंदी पर रचनायें) छंद- चौपाई की अर्द्धाली मात्रा भार- 16 हिन्‍दी बने विश्‍व की भाषा स्‍वाभिमान की है परि... Read more

हिन्‍दी भाषा की बने, ऐसी अब पहचान

(हिंदी पखवाड़े में हिंदी पर रचनायें) आधार छंद- दोहा मात्रिक भार- 13, 11 (24). हिन्दी भाषा की बने, ऐसी अब पहचान। मेहनत से ... Read more

शीघ्र फरमान हो

(हिन्‍दी पखवाड़े पर हिंन्‍दी पर रचनायें) आधार छंद- वाचिक स्त्रग्विणी मापनी--212 212 212 212 पदांत- हो समांत- आन राष्ट्र भ... Read more

वो जबान है हिंदी

(हिंदी पखवाड़े में हिंदी पर रचनायें) छंद सार (मापनी मुक्तमक) मात्रा भार- 16,12 = 28 पदांत- है हिंदी समांत- आन जन जन की ह... Read more

यह चमत्‍कार दिखलाओ

(हिन्‍दी पखवाड़े में हिंदी पर रचनायें ) छंद- कुकुभ (16//14 अर्द्ध सममात्रिक) विधान- (अंत 2 गुरुओं से अनिवार्य-112 या 211 नहीं) ... Read more

मौन रहेंगे

विधा - गीतिका छंद- रोला (सम मात्रिक) मापनी 11 // 13 चरणांत में गुरु/वाचिक 443 या 3323 // 32332 या 3244 पदांत- मौन रहेंगे समां... Read more

नारी का मत कर अपमान

(गीतिका) छंद- आल्‍ह [विधान - चौपाई अर्धाली (16) + चौपई (15) मात्रा संयोजन- 16 // 15] नारी ***** घर की यह आधारशिला है, नारी का ... Read more

भारत माता

(कुकुभ छंद) पदांत- धरती है भारत माता, समांत- आनों की। अर्द्ध मात्रिक छंद 2222 2222 // 2222 222 (16-14) (अंत में दो लघु के ... Read more

बसंत

पदांत- हुआ वसंती समांत- अन जाने को है शरद, माघ का सावन हुआ वसंती रुत बसंत की भोर, आज मनभावन हुआ वसंती बौर खिले पेड़ों ... Read more

गणतंत्र

गीतिका ****** पदांत- का गणतंत्र समांत- अत्व आओ मनाएँ स्वतंत्रता-अपनत्व का गणतंत्र. आओ-मनाएँ, सहभागिता-समत्व का गणतंत्र. ... Read more

बेटी

मैं संतुष्ट हूँ माँ के चलने-उठन-बैठने खाने-पीने, नहाने-धोने यहाँ तक कि‍ सोते समय भी उसे ध्यान रहता है मेरे होने का. मुझे प... Read more

कर्मनिष्‍ठ बनना होगा

गीतिका (लावणी छंद) कर्म पथिक जो होना है तो, कर्मनिष्ठ बनना होगा। सत्यजीत जो होना है तो, सत्यनिष्ठ बनना होगा। कंटकीर्ण होती है... Read more

वतन फूले फले

हरिगीतिका छंद गीत मापनी 221 2221 2221 2221 2 जो पर्वतों की तरह रह कर अटल सरहद पर चले. उन को डिगा सकते नहीं तूफान हों ... Read more

हिन्‍दी

1 हिंदी के अभियान को, इतना दें सहयोग. लोगों से हर दिन कहें, इसका करें प्रयोग. जनता ही है जनार्दन, जनता ही सरकार जन जन से ही ब... Read more

कहीं तुम खूँ बहाना मत

(विधाता छंद) मापनी 1222 1222 1222 1222 पदांत- मत समांत- आना कभी टूटे हुए दरपन, से’ घर को तुम सजाना मत. कभी टूटे हुए ता... Read more

देख सको तो देखो

गीतिका (छंद- ‘सार’) मात्रिक भार - 16-12 पदांत- देख सको तो देखो समांत- अत रुके हुए पानी की हालत, देख सको तो देखो. बेघर बेच... Read more

बेटी घर का है उजियारा

चलो साथियो, मिल के घर-घर, इक अभियान चलाएँँ। बेटी घर का है उजियारा, यह संज्ञान करायें।। माँँ की गोद हरी हो जब बेटी से, सब कहते है... Read more

विश्व शांति दिवस, अहिंसा दिवस है आज

विश्व शांति दिवस, अहिंसा दिवस है आज। दिल्‍ली में फिर कैंची से गोद कर एक मासूम युवती की हत्या राजस्‍थान में लालबत्‍ती वाली गाड... Read more

बगल के नासूर हैं

कुसूरवार है येे मुँह पर कब तलक ताले रहेंगे नासूर हैं बगल के इन्हें कब तलक पाले रहेंगे। जब भी किया है पीठ पे वार किया है क... Read more

भारत मेरा महान् (देशगान)

उन्‍नत भाल हिमालय सुरसरि, गंगा जिसकी आन। उन्‍मुक्‍त तिरंगा शान्ति-दूत बन, देता है संज्ञान। चक्र सुदर्शन सा लहराए, करता है गुणगान। ... Read more

वर दे, वर दे, वर दे......

(सरस्‍वती वन्‍दना) वर दे, वर दे, वर दे..... हे वीणाधारिणी वर दे. हे हंसवाहिनी वर दे . वर दे, वर दे, वर दे..... हे निर्मल... Read more

झूठ (दोहावली)

झूठ कभी ना जीतता, कर लो जतन हजार। भले देर से ही सही, जीते सच हर बार।। ** झूठ सदा भारी पड़ा, बढ़े अधर्मी पाप। सत्य तभी निर्बल प... Read more

हिन्‍दी (दोहा-ग़़ज़ल)

आज हिन्‍दी दिवस है। इस अवसर पर हिन्‍दी-उर्दू एकता के लिए हमारी गंगो-जमन तहज़ीब की तरह हिन्‍दी-उर्दू अदबियत को समर्पित मेरी ताज़ा दोह... Read more

वामन अवतार

आज वामन जयंती है। वामन अवतार पर रोला छंद (11-13) में कथा- ****************************************************** कश्यप-अदिति सुप... Read more

माँँ ने कभी न हिम्‍मत हारी

माँ ने कभी न हिम्मत हारी। बस कुछ न कुछ करते धरते कदमों को न देखा थकते पौ फटने से साँझ ढले तक बस देखा है उम्र बदलते हर दम ... Read more

मधुबन माँ की छाँव है

‘आकुल’ या संसार में, माँ का नाम महान्। माँ की जगह न ले सके, कोई भी इनसान।।1।। माँ की प्रीत बखानिए, का मुँह से धनवान। कंचन तु... Read more

सरस्‍वती वंदना

1 वीणापाणि नमन करूँ, धरूँ ध्‍यान निस्‍स्‍वार्थ। यथाशक्ति सेवा करूँ, करूँ खूब परमार्थ। करूँ खूब परमार्थ, बनें जड़बुद्धि सचेतन। चल... Read more

जंंगल में भी आरक्षण की हवा

शहरों की आरक्षण की हवा, जंगल में भी पहुँच गयी। जंगली जीवों में भी कोतूहल जागा। वे अपने-अपने तरीके से अफवाह फैलाने लगे। बात वनराज तक ... Read more

मुझे सारा संसार हिन्‍दुस्‍तान लगता है

1 कुछ यूँ चले अम्‍नोवफ़ा की ताज़ा हवा शामोसहर। फ़स्‍ले बहाराँँ चारसू, जश्‍ने चराग़ााँँ शामोसहर। तालीमगाह-इल्‍मरसाँँ है तेरा शहर-म... Read more

पुरुषार्थ और परमार्थ के लिए कंचन बनो (प्रेरक प्रसंग/बोधकथा)

तेजोमय बढ़ी हुई सफेद दाढ़ी से दिव्य लग रहे साधु को देख कर नदी किनारे बैठा वह युवक उठा और साधु को प्रणाम कर जाने लगा। साधु ने पीछे से... Read more

जनता जागरूक नहीं है

विक्रमादित्य ने वेताल को पेड़ से उतार कर कंधे पर लादा और चल पड़ा। वेताल ने कहा- ‘राजा तुम बहुत बुद्धिमान् हो। व्यर्थ में बात नहीं करत... Read more

एक अनोखा दान (नाटक)

पात्र- 1- श्रीकृष्ण- पाण्डवों के पक्ष में पार्थ अर्जुन के सारथी। 2- अर्जुन- पाण्डवों का महानायक और श्रेष्ठ धनुर्धर। 3- कर्ण- क... Read more

गणेशाष्‍टक

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश।। (1) धरा सदृश माता है, माँ की परिकम्मा कर आए। एकदन्त गणनायक गणपति, प्रथम पूज्य कहलाए।। प्रथ... Read more