ruchi khaskalam

Joined February 2017

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मुस्कान की स्याही

हवा के हर खामोश ज़र्रे में आहट होती है, कुछ खामोश बेपरवाह चाहत में भी बात होती है, जिंदगी के कोरे पननें मुस्कान सी स्याही की पहल क... Read more

गुफ्तगू

गुफ्तगू की है आज उन खोये खवाबों से, फुसलाया है आरज़ू को ख़ामोशी से, अनजानी राहों से फिर पूछीं राहें, ताकि फिर पा सकूँ मंजिल उन टूट... Read more

"मैं" की तलाश

मुझे "मैं" की तलाश है क्या कोई मदद करेगा? अखबार मे खुद की गुमसुदगी का पैगाम दूँ भी तो कैसे जनाब चेहरे से आत्मा को पहचान नही ज... Read more