रेवाशंकर कटारे "स्नेही"

साईखेड़ा, जिला- नरसिंहपुर म.प्र.

Joined July 2018

परामर्श दाता (BSW)
MA (हिंदी साहित्य)

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कलयुग के कन्हैया

सुख छीन रहे दुख बीन वजा वनके मनमोहन ये कलि वाले । अपने पन को पनपात नही ,मतभेद बढ़ात सभी दल वाले ।। कब राम रहीम चहें लरवो ,पर द्वँद ... Read more

कुर्सी रज

सहसा भारी हो गये ,नेता जी बीमार । सो डिर्गी से भी अधिक ,उनको चढ़ा बुखार । उनको चढा़ बुखार ,शहर के सर्जन सारे । दे नहिं सके रिलीव ,... Read more

चौका में चांद

चोका में चोका लगा ,रही एक दिन नार । चोका बिंदियाँ चांद सी ,प्रातः निरख सुनार । प्रातः निरख सुनार ,चांद पूनम सा घर में । दिखे धरा ... Read more

कुर्सी रज

सहसा भारी हो गये ,नेता जी बीमार । सो डिर्गी से भी अधिक ,उनको चढ़ा बुखार । उनको चढा़ बुखार ,शहर के सर्जन सारे । दे नहिं सके रिलीव ,... Read more

जिन्दगी

यूँ तो गमगीन होती है हर जिन्दगी । फिर भी नमकीन होती है हर जिन्दगी ।। मिलती है खुशियाँ कभी ,मुश्किल मंजिलें । अंततः गतिहीन होती है... Read more

आरक्षण

तरना मुश्किल होयगा, पढ़े कहीं गर ओर। आरक्षण के दोर मे, भला चराना ढ़ोर।। भला चराना ढ़ोर, छोड़ दो पढ़ना बरना। सर्विस को श्रीमान, पढ़ेगा ध... Read more

कुत्ता की पूंछ

कुत्ता की दुम मित्रवर, राजनीति की खान। बिन इसके संभब नहीं, अब जन का कल्याण।। अब जन का कल्याण, चहो गर मौज उडाना। सकल कलाऐ छांण, सी... Read more

दिल्ली

दिल्ली क्यो बिल्ली बनी, सहती नित प्रति घात। पाक, चीन जो आज कल, कुत्ता से गुर्रात।। कुत्ता से गुर्रात, बात नित करत कड़ी है। करे मधु... Read more