आर एस बौद्ध

अलीगढ़

Joined May 2018

मैं आर एस बौद्ध”आघात” सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में सहायक प्रबन्धक के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी स्नातकोत्तर तक की शिक्षा धर्म समाज महाविद्यालय ,अलीगढ़ से हुई है । मैंने उत्तर प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय से व्यावसायिक प्रबन्धन में स्नातकोत्तर किया है । मेरी रुचि लेखन में है और सामाजिक पहलूओं पर लिखना पसन्द करता हूँ । मेरी लेखनी का अधिकतर भाग बहुजन मिशनरी गीतों के साथ समाज से जुड़े मूल मुद्दों पर आधारित मिलती है । मेरी कवितायें व रचनायें दलित दस्तक, डिस्प्रेसड एक्सप्रेस, युगधारा ई-पत्रिका, यादव शक्ति पत्रिका, फ़ॉरवर्ड प्रेस, हिंदी साहित्यपीडिया ,अमर उजाला व समर इंडिया में प्रकाशित हो चुकी हैं ।

Books:
प्रतीक्षारत

Awards:
बैंक द्वारा लगातार दो वर्षों तक बेहतर कार्य के लिये दिया गया ELIET अवॉर्ड तथा बैंक में राजभाषा क्रियान्वयन हेतु राजभाषा शाखा प्रभारी के रूप में कार्यरत हूँ । हिंदी साहित्यपीडिया की कविता प्रतियोगिता “माँ” के लिये कविता का प्रशस्ति पत्र के लिए चयनित व कविता काव्यसंकलन में प्रकाशन के लिए चयनित होना । राजभाषा कार्यान्वयन समिति हाथरस (नराकाश) द्वारा बैंकिंग कार्यप्रणाली में हिंदी के प्रयोग हेतु हिंदी योद्धा पुरुस्कार से पुरुस्कृत करना । “दलित दस्तक” पत्रिका द्वारा हिन्दी भाषा के प्रचार -प्रसार हेतु ट्रॉफी से सम्मानित ।

Copy link to share

यूँ इस तरह से...

तुम इस तरह से ..सताओगे.. तो वफ़ा कौन करेगा...2 बनके हमदर्द रहेंगे ...2 ज़माने के दुःख-दर्द सहेंगे...ज़माने के दुःख दर्द सहेंगे... ... Read more

ये बिन मौसम की बरसात...

ये बिन मौसम की बरसात, अजब -गज़ब है इसकी शान । बूँद-बूँद यूँ टपक रही है, लिए संग हवा और ओलों की माँद ।। इधर-उधर ये कूकर देखो, प... Read more

आज शहर सँवरा है मेरा...

आज शहर सँवरा है मेरा, नवेली दुल्हन की तरहां । ख़बर कैसे निज़ाम की लग गयी, बेजुबाँ चमन को किस तरह ।। हर तरफ़ शोर मचा ऐसे, कि ज... Read more

ललई तुम्हें करबद्ध नमन..

कब आओगे होश में बहुजन, एक कभी तुम बन न सके । याद करो उस नायक को जो व्यसन की ज़िंदगी जी न सके ।। बहुत ज़ोर था मनु व्यवस्था का, ... Read more

आरक्षण की अजब कहानी सुनो

आरक्षण की अजब कहानी. वो कहते थे इसको भीख यारो, काहे अब बो भिखारी ख़ुद ही बन गए ..। कहते रहते थे सारा सत्यानाश हो गया अब सत्यान... Read more

हे क्रान्तिज्योति है तुम्हें नमन...

माता सावित्रीबाई फुले को समर्पित मेरी कविता... क्रान्ति ज्योति है तुम्हें नमन, शिक्षा ज्योति है तुम्हें नमन । नारी हित शिक्षा ... Read more

बीत गए दिन सुख -दुख में

बीत गए दिन सुख-दुःख में, पास रह गई यादें खट्टी-मीठी । गत बर्ष को कर चले विदा, स्वागत है नव बर्ष का ।। शायद मेरी वज़ह से दिल दुःख... Read more

ऐ बहुजन तू जाग जा..

ऐ बहुजन तू जाग जा...2 नींद तेरी कहीं तेरा आशियाँ करदे ना बरबाद, तू आ अब होश में, ग़हरी नींद से उठ जा ।। ऐ बहुजन तू जाग जा.... Read more

हमारा क्या है...

मेरी नई रचना.... हमारा क्या है...हम तो फ़कीर हैं ...2 मरती है भुखों जनता यहाँ, लेक़िन खिंचीं लक़ीर हैं ..... हमारा ... Read more

माँ मैं धन्य हो गया..

माँ मैं धन्य हो गया...2 प्यार से लोरी सुनते-सुनते.....माँ मैं धन्य हो गया...। मैं तेरे आँचल में सोया.. मन में जब आया ख़ुशी हुआ ।... Read more

ये कैसा दौगलापन

ये सेवा भाव हमारा , है कैसी संवेदना तुम्हारी, मरते हैं हम दम घुटकर, उस पर राजनीति तुम्हारी। न करते साफ़ हृदय व अंतर्मन को, तो ... Read more

*"प्यार का अंत और शुरुआत"*

#प्यार का अन्त और शुरुआत# #दिल मेरा टुकड़ा-टुकड़ा हो गया# #नौकरी मिले 1 वर्ष बीत चुका था, घर-परिवार, मौहल्ले ... Read more

तुम मेरे दीपक बन जाना..

तुम मेरे दीपक बन जाना, मैं बाती ही बन जाऊंगा । मैं अक्सर रोज अंधेरी गलियों में दीपक जलवाऊंगा ।। ये वादा है मेरा तुमसे , ज्ञान के... Read more

भोर हुई वो घर से निकला..

भोर हुई वो घर से निकला , जग सारा जब सोया था । तन उसके दो गज का गमछा, शिक़वे न किसी से करता था । सुबह से लेकर दो पहर तक, रहत... Read more

अवला मैं कैसे तुझे भूलूँ...

अवला मैं कैसे तुझे भूलूँ ... हरपल और हरदम मैं बस तेरे ही साथ रहूँ । अवला मैं कैसे तुझे भूलूँ ..... जन्म से... Read more

माँ मैं धन्य हो गया..

माँ मैं धन्य हो गया...2 प्यार से लोरी सुनते-सुनते.....माँ मैं धन्य हो गया...। मैं तेरे आँचल में सोया.. मन में जब आया ख़ुशी हुआ ।... Read more

अधूरी रह गईं हसरतें..

मुझे कोई नशा नहीं है तेरा, गुजरा बिन तेरे भी चलता है । कसक क्यूँ मन में रहती है, बे-ग़ैरत नादान इस दिल को ।। समझ पाया हूँ नहीं तु... Read more

दो पल गर याद कर लेते..

दो पल गर याद कर लेते, न रहता दर्द सीने में । क्या तुम्हें याद नहीं वो पल, जिस्म दो रहते थे चमन में ।। जिस्म दो जान एक हम थे, हलच... Read more

वीरांगना फूलन तुम्हें प्रणाम...

वीरांगना फूलन तुम्हे सलाम... वो कहने को भी अवला थी, वो कहने को भी नारी थी । जिसे सुन शिहर उठता मन नारी का, उस अत्याचार की मार... Read more

वो एक दिन...

मेरे उपन्यास का कुछ भाग..... आगे की कहानी आपको में शेयर करूँगा पढ़कर कमेंट जरूर करें .... सर्दियों के दिन थे दो दिनों की साप्ता... Read more

छोड़कर चमन को एक पँछी जहाँ से दूर ...

श्रंद्धांजलि 💐💐💐💐💐💐💐💐 "महाकवि गोपालदास नीरज जी को समर्पित मेरी कविता" छोड़कर चमन को एक पँछी जहाँ से दूर चला गया, देकर लाख यादो... Read more

चल -चल.... रे साथी चल-चल..

चल-चल...रे साथी चल -चल...2 तज के सारे इन भ्रमों...2, धम्म शरण चल । चारों तरफ़ है घोर अशान्ति, मिली है उर न मिलेगी तुझको मुक्ति... Read more

ख़याल उनका रहता है...

मेरे महबूब का गुस्सा भी कितना लाज़बाब है, चमन में खिलने वाली कली की खुश्बू बेमिशाल है । यूँ तो नाराज भी हम हो जाते उनपर, आज मुस्का... Read more

चमन क्यूँ है ये उलझन में...

चमन क्यों है ये उलझन में ..... न जाने तू न जानूँ में । बड़ा बेचैन सा मौसम बना है ... आज महफ़िल में ।। चले हैं सब हमसफर बनकर ...... Read more

शिक़वा नहीं शिकायत है

वो बैठे मेरे आशियाँ आकर, खिला जैसे गुल चमन में है, बड़े शिद्दत से सज़ाया है शामियाने को मैंने, यूँ ऐसे नफरतों से ना देखिये मुझे ।।... Read more

अगर भीम बाबा का जन्म न होता

अगर भीम बाबा का जन्म न होता.... शोषितों का इस जहाँ में.... वंचितों का इस दुनिया में , बुरा हाल होता ।। अगर भीम बाबा ... Read more

क़सूर क्या था..

मुझे यूँ तन्हा छोड़कर , वो क्यों सता रहे हैं । मुक़्क़द्दर है ये मेरा, कि अब बेबक्त याद आ रहे हैं । आख़िरी मंज़िल मानते थे, कभी उस... Read more

बीते दिनों की कहानी...

नहीं मिलेगा आपको गॉंव में सत्कार, पहले की सदियों जैसा।,.....गुम हो गए वो दिन मेरे.... न करता कोई अब फ़िक्र कहाँ, रहा न वो भाईचार... Read more

मैंने कब सोचा था...

मैंने कब सोचा था ... मेरी छांव में रहेगा मानुष खुशी- खुशी .. जब परछाई पड़ी और की रहता दुखी - दुखी ।। मैंने कब सोचा था... इत... Read more

ये कैसी आजादी

ये कैसी आजादी है जब, रोता सारा देश यहाँ । देखा हमने ये पहली बार , यूँ हँसता पहरेदार यहाँ ।। वतन को वापस वो दिन लौटा दो, जब रहती... Read more

वो चली आज फिर सँवर कर

वो चली आज फिर सँवर कर, ले उम्मीदें बटोरे, मगन है अपनी ही धुन में,आशियाँ मिल ही जायेगा । खुश हैं उसके घरवाले , पड़ौसी भी उत्सुक है... Read more

प्यासी बैरन

ओ बेरिया तेरी ...बैरन प्यासी ...2 बहुत दिनों से दर नहीं भटके .. बैरन रहत उदासी .... ओ बेरिया तेरी बैरन प्यासी ..2 दिन बति... Read more

किसान की दिनचर्या

भोर हुई वो घर से निकला , जग सारा जब सोया था । तन उसके दो गज का गमछा, शिक़वे न किसी से करता था । सुबह से लेकर दो पहर तक, रहत... Read more

तूने सोती कौम को जगा दिया

तूने सोती कौम को जगा दिया । संविधान देश का बना दिया रे....2 गले में हांड़ी कमर में झाड़ू , तब न कोई देवता आया । भीमराव ही बने मसी... Read more