लेखन में रूचि एक काव्य संग्रह प्रकशित । साझा संग्रहों में संकलित । दो संग्रहों का सम्पादन । आकाशवाणी , दूरदर्शन शिमला से नैमित्तिक सम्बद्ध रहा ।
सम्प्रति : राजकीय सेवा के तहत अध्यापन ।
ब्लॉग : roshanvikshipt.blogspot.com

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सब गरीब है , इबादत लिखेंगे

कभी मिले तो शिकायत लिखेंगे कैसी है अब, तबियत लिखेंगे, हार गया है ज़माने से जो जो उनके लिए अब हिमायत लिखेंगे, प्रश्न रह गये है... Read more

आदमी आदमी को ही लूटता है

आदमी आदमी को ही लूटता है अपना पराया सभी को लूटता है क्‍या खोया क्‍या पाया सोचता है दुख भीतर ही तो कचोटता है जीवन में... Read more

सुंदरता

उसकी बातें उसकी सुंदरता की तरह ही आकर्षक होती थी। कोई भी उससे मिलता तो उसका मुरीद हो जाता। मैं भी उसकी उसकी बातों से बेहद प्रभावित र... Read more

माँ...

ऊन और सिलाइयों के बीच अंगुलियां बुन डालती थी जुराबें सर्दियों के लिए, टीवी पर निरतन्तर देखते धारावाहिक के बीच ही देख लेती भी... Read more

मित्रता

यूँ तो उससे कोई पुराना परिचय नहीं था, मात्र इतना कि वो दूकानदार था और मैं उसका ग्राहक। रोज उससे दूध की थैली ले जाता और दुआ सलाम हो ज... Read more