आपकी भावनाओं एवं चाहत को मैं अपने शब्दों के स्वपनिल संसार में ले जाने की एक मासूम कोशिश.जैसा देखा वैसा ही सोचा और जस का तस लिख कर आपके सामने प्रस्तुत किया.
मेरा ब्लॉग का लिंक है :- http://rakeshkirachanay.blogspot.in/

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नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले

नारी के हालात नहीं बदले, हालात अभी, जैसे थे पहले, द्रौपदी अहिल्या या हो सीता, इन सब की चीत्कार तू सुन ले। राम-कृष्ण अब ना आने... Read more

प्रेम-गीत

जी ना सकूँगा तुम बिन मैं यारा, गर तुने मुझको प्यार से पुकारा, मैं तुमसे प्यार करूँगा, ना इंकार करूँगा, हो जाऊँगा मैं तुम्हारा , ... Read more

करुणा

करुणा शाखों से पत्ते जब टूटे पतझड़ में, शाखें कब शोक मनाती हैं, जब बसंत में पत्ते गिरते हैं शाखों से, तब देखना पत्ते जहाँ से टूट... Read more

आधी-आबादी की व्यथा

आधी-आबादी की व्यथा अश्कों में डूबी कलम, लिख रही मेरी दास्ताँ। मुझको था बस एक भ्रम, मेरे स्वाभिमान को, तुमसे है वास्ता।। ... Read more

वाक्यांश- बख्शीश

वाक्यांश- बख्शीश रामाकांत दसवीं पास कर सेठ हजारीलाल के यहाँ घर के छोटे-मोटे काम पर लग गया। जब वह 18 साल का हुआ तो सेठ जी ने उसको का... Read more