राजेश लठवाल

गोहाना

Joined August 2017

संस्थापक प्रमुख ‘सज्जन सेवा संघ’ व ‘सज्जन वृद्ध अनाथाश्रम और धर्मशाला’

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बुजुर्ग ओनर किलिंग

जैसा सुना था, उससे भी बदतर हाल में जीने को मजबूर था वो – पशुओं से भी बदतर। उलझे लम्बे सफेद दाढी व सिर के बाल। बडे-बडे मुडे हुए मैल स... Read more

52 बुद्धों का दिल

कृष्ण की तरह हो ग्वाला , गीता गाने को दिल करता है। शिव की तरह हो ध्यानी-प्रेमी , समाधी पा जाने को दिल करता है।। नारद की तरह हो महर... Read more

‘‘मैं .........जीवन......... हूॅं’’

मैं .......... अनगढ आवारा पत्थर। मैं .......... अनगढ आवारा पत्थर, फेंक दिया इस धरा पर। पूर्वजन्म के संस्कार, ले आए जाने किस पा... Read more

‘‘शिक्षा में क्रान्ति’’

1 एक की तुलना दूसरे से हो रही; हीनता के बीज सबमें बो रही, प्रतिस्पर्धा की मूच्र्छा में डूबो रही; ‘स्वयं’ स्वयं को पाने से खो रही... Read more